जानिए ट्रम्प के सीने को क्यों रौंद रहा मोदी का ‘रूसी S-400’ ?

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अहमदाबाद 31 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। जब से देश में नरेन्द्र मोदी ने सत्ता की बागडोर संभाली है, तब से भारत में सुरक्षा से जुड़े कई ऐसे महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जो पड़ोसी देशों की आँखों में खटक रहे हैं। मोदी हर दिन-हर महीने कुछ ऐसे कड़े फ़ैसले लेते रहे हैं, जो पड़ोसी देशों विशेषकर चीन और पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाले साबित हो रहे हैं। भारत को एक मज़बूत राष्ट्र बनाने का बार-बार संकल्प दोहराने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हर एक कदम देश के रक्षा हितों से जुड़ा होता है और बात जब रक्षा हितों की आती है, तो मोदी किसी की परवाह नहीं करते, फिर वह दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका या उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आपत्ति ही क्यों न हो ?

मोदी के सत्ता संभालने के बाद देश की तीनों सेनाओं को अत्याधुनिक शस्त्रों से सुसज्ज करने का अभियान चल पड़ा है। इसी अभियान के तहत जहाँ एक ओर मोदी सरकार भारतीय वायुसेना (INDIA AIR FORCE) यानी IAF को ऐसी मिसाइलों से लैस करने जा रही है, जिससे न केवल वायुसेना को शक्तिशाली बनाएगी, अपितु भारत का सुरक्षा घेरा भी अधिक चाकचौबंद होगा। वायुसेना के बेड़े में जो मिसाइल शामिल होने वाली है, उससे जवान एक बार में 100 दुश्मनों की पहचान कर उन हमला कर सकेंगे। इतना ही नहीं, इस मिसाइल के ज़रिए 400 किलोमीटर की रेंज में 30 किलोमीटर की ऊँचाई तक दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन को भी मार गिराना आसान होगा। मोदी सरकार वायुसेना को जो मिसाइल मुहैया कराने वाली है, उसे अमेरिका तक के कई रक्षा विशेषज्ञ दुनिया का बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम मानते हैं। यह मिसाइल अमेरिका में बने मिसाइल डिफेंस सिस्टम Terminal High Altitude Area Defence यानी THAAD से कहीं अधिक प्रचंड शक्तिशाली है।

भारत को मजबूत बनाने में रूस की अहम भूमिका

अब आपको इस मिसाइल के बारे में भी बता देते हैं। वास्तव में इस मिलाइल का नाम है S-400, जो हमारे सबसे पुराने सहयोगी और निरंतर परम् मित्र की भूमिका निभाने वाले रूस की ओर से हमें मिलने वाली है। रूस वह देश है, जिसने हमेशा-हर परिस्थिति में न केवल भारत का साथ दिया है, अपितु आवश्यकता पड़ने पर अपनी सैन्य शक्ति को भी भारत की सहायता के लिए भेजने में संकोच नहीं किया। भारत और रूस के मैत्री संबंध भारत की स्वतंत्रता से पहले ही स्थापित हो गए थे, जब 13 अप्रैल, 1947 को तत्कालीन सोवियत संघ और भारत ने आधिकारिक रूप से दिल्ली व मॉस्को में मिशन स्थापित करने का निर्णय किया था। यह मित्रता वर्ष-प्रतिवर्ष निरंतर घनिष्ठ होती गई और 1971 में रूस ने यह सिद्ध भी कर दिखाया कि वह भारत का सच्चा और परम् मित्र है। भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध के दौरान जब अमेरिका और ब्रिटेन ने पाकिस्तान का साथ दिया, तब बीच भँवर में फँसी भारत की नैया को उबारने के लिए सोवियत संघ ने अपने न्यूक्लियर बेड़े को भारतीय सेना की सहायता के लिए भेजा। यह रूस का सबसे बड़ा उपकार है भारत पर। यही कारण है कि भारत आज भी अमेरिका के मुक़ाबले रूस को अधिक महत्व देता है और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इसी नीति पर आगे बढ़ते हुए रूस से एस-400 मिसाइलें ख़रीदने को लेकर दृढ़संकल्प हैं, जबकि अमेरिका को इससे आपत्ति है। ट्रम्प की आपत्तियों के बावजूद भारत ने पिछले वर्ष नई दिल्ली आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एस-400 मिसाइल समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। 5.43 अरब डॉलर (लगभग 39 हजार करोड़ रुपए) की इस रक्षा डील से पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान भौंहें तन गईं। बड़ी बात यह है कि भारत-रूस के बीच हुई इस इस डील ने अमेरिका के भी होश उड़ा दिए हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका भारत और रूस की दोस्ती को पसंद नहीं करता।

ट्रम्प ने धमकाया, पर मोदी नहीं डिगे

एस-400 रक्षा डील से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मोदी से इतना चिढ़ गए कि उन्होंने भारत को धमकी देते हुए यहाँ तक कह दिया कि यह सौदा करके भारत ने बड़ी भूल की है, जिसका परिणाम भारत को भुगतना होगा। दरअसल अमेरिका चाहता था कि भारत रूस की बजाय उससे मिसाइल खरीदे, परंतु भारत ने रूस को प्राथमिकता दी। अपनी अनदेखी से ट्रम्प बुरी तरह तिलमिला गए। एस-400 इसलिए भी अमेरिका की चिंता का कारण बनी हई है, क्योंकि अमेरिकी वायुसेना में शामिल विश्व के के सबसे बढ़िया स्टेल्थ जेट को भी एस-400 मिसाइल के आगे कमतर आँका जा रहा है। मोदी ने अमेरिका को धता बता कर रूस से यह डील कर अमेरिका की दादागीरी को आईना भी दिखाया है, जो हमेशा अपनी धमकियों के बल पर विश्व के सभी देशों पर हावी रहने की कोशिश करता है, परंतु ट्रम्प यह भूल जाते हैं कि आज का भारत मोदी का भारत है।

क्या हैं एस-400 की विशेषताएँ ?

एस-400 मिसाइल सिस्टम पूर्ववर्ती एस-300 का अपडेटेड वर्ज़न (अद्यतन संस्करण) है। एस-400 मिसाइल 400 किलोमीटर के दायरे में आने वाली मिसाइलों और पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी नष्ट कर सकती है। एस-400 डिफेंस सिस्टम एक तरह से मिसाइल शील्ड का काम करेगा, जो पाकिस्तान और चीन की एटमी क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को सुरक्षा देगा। एस-400 एक बार में 72 मिसाइलें दागने में सक्षम है। यह रूसी मिसाइल अमेरिका के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट एफ-35 को भी मार गिराने की क्षमता रखती है, वहीं परमाणु क्षमता वाली 36 मिसाइलों को एक साथ हवा में फुस्स कर सकती है। यह भी बड़ी बात है कि एस-400 डिफेंस सिस्टम विश्व में एकमात्र चीन के पास है और भारत इस डिफेंस सिस्टम को खरीदने वाला विश्व का दूसरा देश है।

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