जानिये दिल्ली की हवा में ज़हर घोलने वाले गुनाहगारों को ! वायु प्रदूषण से बचने के ये हैं आसान घरेलू उपाय

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 4 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर का कलंक झेल रही देश की राजधानी दिल्ली की हवा में जो ज़हरीले तत्व घुल गये हैं, उनमें नाइट्रोजन ऑक्साइड, ओज़ोन, बेंजीन, कार्बन मोनो ऑक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड शामिल हैं। इन विषैले तत्वों के कॉकटेल ने दिल्ली की हवा को ज़हरीला बना दिया है। इसके अलावा फेफड़ों में आसानी से पहुँचने वाले पार्टिकुलेट मैटर का भी घना कोहरा छाया हुआ है। इसने न सिर्फ दिल्ली वासियों, बल्कि पूरे देश के लोगों में शासन-प्रशासन और प्रदूषण बढ़ाने वाले गुनाहगारों के विरुद्ध गुस्सा पैदा कर दिया है। यह गुस्सा इतना बढ़ गया है कि लोग मीडिया तथा सोशल मीडिया पर जाहिर कर रहे हैं। इतना ही नहीं, अब तो हेल्थ इमरजेंसी की नहीं, बल्कि क्लाइमेट इमरजेंसी लागू करने तक की माँग उठने लगी है। यदि दिल्ली की हवा को ज़हरीली बनाने वाले गुनाहगारों की बात की जाये तो सबसे बड़ा गुनाहगार कंस्ट्रक्शन को बताया जा रहा है, जिसका योगदान प्रदूषण में लगभग 45 प्रतिशत है। इसके बाद खुद दिल्ली के निवासी हैं, जिन्होंने न सिर्फ प्रदूषण की शिकार होने के बावजूद दिल्ली में दीवाली पर पटाखे जलाये, बल्कि लगभग 1 करोड़ गाड़ियों से प्रदूषण ओक रहे हैं। इन्हीं दिल्ली वासियों के केमिकल सहित विभिन्न उद्योगों ने यमुना नदी को नाला बना दिया। इसके बाद दिल्ली के आसपास चल रहे ईंट भट्टे और अंत में हरियाणा-पंजाब में पराली (खेतों में फसलों का कचरा) जलाने वाले किसान हैं। आपको यह भी बता दें कि दिल्ली का शासन प्रशासन जो हर बार प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर दूसरे राज्यों के किसानों पर दोषारोपण करने लगता है, उसका योगदान मात्र 10 प्रतिशत है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि इस प्रदूषण के लिये सिर्फ और सिर्फ दिल्ली वासी ही जिम्मेदार हैं। सर्दी के मौसम में आम तौर पर साँस और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ जाती हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि आगामी दिनों में यदि प्रदूषण का स्तर इसी तरह का रहा तो दिल्ली के बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों की हालत क्या होगी और अस्पतालों में रोगियों की बाढ़ आ जाएगी। दिल्ली की इस समस्या को राष्ट्रीय आपदा के रूप में लेने की आवश्यकता है और इससे पहले कि अन्य इलाकों में ऐसी स्थिति पैदा हो, उससे पहले ही नीति निर्धारकों को निद्रा से जाग कर इस पर रोकथाम के लिये कारगर कदम उठाने चाहिये। अन्यथा इस समस्या को नज़रअंदाज़ करना अन्य राज्यों व शहरों के लिये आत्मघाती सिद्ध हो सकता है।

वायु प्रदूषण से क्या होता है सेहत पर असर

साँस लेने के लिये शुद्ध हवा की आवश्यकता होती है। स्वस्थ रहने के लिये शुद्ध हवा अत्यावश्यक है। दूसरी ओर हवा में ज़हरीले तत्व घुल जाने से श्वसन सम्बंधी और फेफड़ों सम्बंधी संक्रमण के अलावा हृदय को भी नुकसान होता है। मस्तिष्क सम्बंधी विकार भी पैदा होते हैं। थकावट, सीने में दर्द, तनाव, आँखों में जलन, नाक और गले में परेशानी होती है इसके अलावा जिगर, तिल्ली और रक्त को भी नुकसान पहुँचता है। रक्त हमारे शरीर के प्रत्येक अंग में पहुँचकर ऑक्सीजन को पूरे शरीर में पहुँचाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि शरीर को विशिष्ट पोषण देने से उसे प्रदूषण से लड़ने की शक्ति और क्षमता प्राप्त होती है। इसलिये हम आपको कुछ सरल और घरेलू उपाय बता रहे हैं, जिनसे आप प्रदूषित वायु से होने वाले शारीरिक नुकसानों से आसानी से बच सकते हैं।

वायु प्रदूषण से बचने के आसान घरेलू उपाय

गुड़ खाएँ

गुड़ में आयरन होता है, जो रक्त के माध्यम से ऑक्सीजन को पूरे शरीर में ले जाने की फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता है। यदि गुड़ खाना पसंद न हो तो गुड़ की चाय बना कर भी पी सकते हैं।

नींबू-अदरक-पुदीना का सेवन करें

विटामिन सी युक्त खट्टे और रसीले फल खाएँ, विशेष कर नींबू और संतरे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं, ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें ओमेगा फैटी एसिड होता है, मैग्नीशियम भी प्रदूषकों से लड़ने में शरीर की मदद करते हैं। सुबह अदरक और पुदीना के साथ नींबू पानी पीना चाहिये। इससे श्वसन मार्ग को खोलने और फेफड़ों से विषाक्त पदार्थों को खत्म करने में मदद मिलती है।

अंगूर का रस

अंगूर का रस विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकाल कर फेफड़ों को साफ करता है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट होता है, जो फेफड़ों में सूजन को रोकता है। अस्थमा और फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित लोगों के लिये यह रस पीना बहुत लाभदायी है। फेफड़ों को स्वस्थ बनाने के लिये सप्ताह में एक बार इस रस का सेवन अवश्य करना चाहिये।

हरी चाय

हरी चाय पीने से पाचन तंत्र से ज़हरीले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। हल्की गर्म हरी चाय पीने से पेट से सम्बंधित विकारों को दूर करने में भी मदद मिलती है और हरी चाय फेफड़ों की स्थिति में भी सुधार करती है। हरी चाय को अदरक, नींबू पुदीना के साथ भी ले सकते हैं।

हल्दी-अदरक का पेय

हल्दी में कर्क्यूमिन होता है, जो एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी ऑक्सीडेंट, कैंसर रोधी होता है और इसमें एंटी टॉक्सिसिटी गुण भी होते हैं। यह अंगों को नुकसान पहुँचने से बचाती है और शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को भी बाहर निकालती है। जबकि अदरक मितली को ठीक करने में मदद करता है, जो कि अधिक धुएँ से आती है।

गाजर का रस

गाजर के रस में बीटा-कैरोटीन और विटामिन ए, के, सी और बी का स्तर उच्च होता है। इसका रस रक्त की क्षारता को सुधारने में मदद करता है और फेफड़ों के कैंसर के खतरे को भी कम करता है।

इस प्रकार इन उपायों से आप अपनी शारीरिक रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ा कर वायु प्रदूषण और स्मॉग से निपट सकते हैं। इसके साथ ही आपको कुछ सावधानियाँ बरतने की भी आवश्यकता है।

वायु प्रदूषण से बचने के लिये आवश्यक सावधानियाँ

  • घर से बाहर निकलने से बचना चाहिये। विशेष कर सुबह के समय जब सबसे अधिक प्रदूषण होता है।
  • आँखों का चश्मा अवश्य पहनें, इससे आँखों को प्रदूषण से बचाया जा सकता है।
  • यात्रा के बाद और सोने से पहले साफ पानी से आँखों को अवश्य धो लेना चाहिये।
  • आँखों को हाथों से छूने से बचें और हाथ धोने के बाद ही आँखों को छूना चाहिये। आँखों को रगड़ना नहीं चाहिये।
  • आँखों में जलन होने पर सिर्फ डॉक्टर द्वारा बताई गई आई ड्रॉप को ही इस्तेमाल करें।
  • ऐसे वातावरण में कॉन्टेक्ट लेंस पहनने से बचना चाहिये और मेकअप भी नहीं करना चाहिये।
  • लंबे समय तक स्क्रीन डिवाइस जैसे मोबाइल फोन और लैपटॉप का उपयोग भी नहीं करना चाहिये।
  • घर में संभव हो तो अच्छी क्वॉलिटी वाला एयर पॉलुशन लगवाएँ, इससे घर की हवा साफ होती है।

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