क्या है सच्चाई मोदी से पूर्व सैनिकों की नाराज़गी वाली VIRAL चिट्ठी की ? भेजी तो गई राष्ट्रपति को, पर पहुँची नहीं : जानिए क्या है पूरा मामला ?

लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सेना के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर पूर्व सैनिकों की ओर से कथित रूप से राष्ट्रपति को चिट्ठी भेजे जाने के मुद्दे पर बवाल मच गया है। कुछ पूर्व सैनिक कह रहे हैं कि जो चिट्ठी मीडिया या पब्लिक डोमेन में घूम रही है, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है, तो कुछ इस चिट्ठी का समर्थन कर रहे हैं। चुनावी मौसम में मोदी विरोधी इस तथाकथित चिट्ठी का राजनीतिक फायदा उठाने के लिए कांग्रेस भी कूद पड़ी है।

मीडिया रिपोर्ट्स में ये कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा की ओर से चुनाव प्रचार में सेना का उल्लेख कर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश से पूर्व सैनिक नाराज़ हैं और उन्होंने एक चिट्ठी लिख कर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेजी है, परंतु आश्चर्य की बात यह है कि ऐसी कोई चिट्ठी राष्ट्रपति को मिली ही नहीं है।

कांग्रेस चीख-चीखकर कह रही है कि पूर्व सैनिकों ने चिट्ठी लिखी है, उसने अपने ट्विटर हैंडल पर एक चिट्ठी सार्वजनिक भी की है।

दूसरी ओर राष्ट्रपति भवन की ओर से स्पष्टता की गई है कि उनके पास ऐसी कोई ‘चिट्ठी आई ही नहीं है।’ फिलहाल तो इस विवाद में कई पूर्व सैनिक कूद पड़े हैं और उनके बीच ठनी हुई है। दूसरी तरफ राजनीतिक दलों में भी इस मुद्दे पर शाब्दिक घमासान चल रहा है।

इस चिट्ठी में पूर्व आर्मी चीफ एस. एफ. रॉड्रिग्स और एयर चीफ मार्शल एन. सी. सूरी के भी हस्ताक्षर हैं, परंतु वह कह रहे हैं कि उन्होंने ऐसी किसी चिट्ठी के लिये अपनी सहमति नहीं दी है। दूसरी ओर मेजर जनरल रिटायर्ड हर्ष कक्कड़ और पूर्व आर्मी चीफ शंकर रॉय चौधरी ने चिट्ठी को पढ़ने और सहमति से उनका नाम इसमें शामिल किये जाने की बात स्वीकार की है।

क्या और कितना सच लिखा है इस चिट्ठी में ?

दरअसल गुरुवार को लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के दिन मीडिया में एक चिट्ठी वायरल हुई, जिसे कांग्रेस ने भी अपने ट्विटर हैंडल पर रखा और दावा किया कि यह चिट्ठी पूर्व सैनिकों ने वर्तमान नरेन्द्र मोदी सरकार के विरुद्ध राष्ट्रपति को लिखी है। चिट्ठी के नीचे उल्लेखित नामों को लेकर जहाँ कोई पुष्टि नहीं है, वहीं चिट्ठी राष्ट्रपति भवन तक पहुँचने की भी पुष्टि नहीं है ऐसे में इस चिट्ठी में तीनों सेनाओं के पूर्व प्रमुखों सहित बड़े-बड़े रिटायर्ड सेना अधिकारियों के हस्ताक्षर होने का उल्लेख है। इस चिट्ठी में कुल लगभग 156 पूर्व सेनाधिकारियों ने हस्ताक्षर किये होने का उल्लेख है। इस चिट्ठी में पूर्व सैनिकों ने भाजपा और मोदी सरकार की ओर से चुनावी भाषणों में सेना का कथित राजनीतिक दुरुपयोग किये जाने का कड़ा विरोध किया है। हालांकि राष्ट्रपति भवन की ओर से स्पष्टता की गई है कि उन्हें पूर्व सैनिकों की ओर से लिखी गई कोई चिट्ठी मिली ही नहीं है।

इस चिट्ठी में सेना के जिन सेवानिवृत्त अधिकारियों के हस्ताक्षर होने का दावा किया जा रहा है, उन अधिकारियों से मीडिया की ओर से सवाल पूछे जाने पर कुछ अधिकारियों ने साफ इनकार किया है कि उन्होंने न तो ऐसी कोई चिट्ठी लिखी है और न ही ऐसी किसी चिट्ठी में हस्ताक्षर किये हैं। कई अधिकारियों ने तो ऐसी किसी चिट्ठी के बारे में जानकारी होने से ही इनकार कर दिया, परंतु विवाद तब पैदा हुआ जब कुछ अधिकारियों ने स्वीकार किया कि हाँ, चिट्ठी लिखी गई है और उन्होंने चिट्ठी से पूरी तरह सहमत होने के बाद उसमें हस्ताक्षर भी किये हैं। विवाद का कारण यह भी है कि जो पूर्व सैनिक चिट्ठी से अनजान होने का दावा कर रहे हैं, इस चिट्ठी में उनके भी हस्ताक्षर हैं। हालांकि वह इनकार कर रहे हैं कि उन्हें नहीं पता कि चिट्ठी में उनके हस्ताक्षर कैसे आये ? ऐसे अधिकारी चिट्ठी को फेक बता रहे हैं। परंतु कुछ अधिकारियों के स्वीकार करने से विवाद गहरा गया है कि अगर वह स्वीकार करते हैं कि उनकी सहमति से चिट्ठी लिखी गई है तो चिट्ठी फेक कैसे हो सकती है ?

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