पहली बार नहीं रुकी समझौता एक्सप्रेस : भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव का टार्गेट बनती रही है यह ट्रेन

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विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 8 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। मोदी सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा छीन लिये जाने से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और उसने इसी बौखलाहट में भारत के साथ व्यापारिक और राजनयिक सम्बंध तोड़ दिये। इसके अलावा अब उसने दोनों देशों के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस को भी अपनी वाघा बॉर्डर पर ही रोक दिया है। यह पहली बार नहीं है कि जब समझौता एक्सप्रेस को ब्रेक लगाया गया है। जब भी भारत पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति पैदा हुई है, तब-तब इस ट्रेन को टार्गेट बनाया गया है। आइए जानते हैं यह ट्रेन कब शुरू हुई और कब-कब रोकी गई है।

1976 में शुरू हुई समझौता एक्सप्रेस

1947 में विभाजन के बाद भी भारत और पाकिस्तान के बीच आम नागरिकों के आवागमन के साधन के रूप में रेलसेवा चालू रखी गई थी और यह सेवा व्यापक स्तर पर फैली हुई थी, परंतु 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने रेल की पटरियों को व्यापक नुकसान पहुँचाया था और पटरियाँ उखाड़ फेंकी थी। इससे दोनों देश के बीच रेल सेवा बंद हो गई थी। इसके बाद 1971 में दोनों देशों के बीच फिर युद्ध हुआ। इस बार पाकिस्तान का विभाजन हुआ और उसका पूर्वी हिस्सा बांग्लादेश के रूप में अस्तित्व में आया। भौगोलिक परिस्थियों के हिसाब से इन दोनों देशों (पाकिस्तान और बांग्लादेश) के बीच भारत एक पुल है। भारत से होकर ही दोनों देशों के लोग एक-दूसरे के यहाँ आवागमन कर सकते हैं। इस प्रकार भारत-पाकिस्तान और बांग्लादेश तीनों ही देशों के लोगों के रिश्तेदार तीनों ही देशों में रहते हैं, जिनसे शादी-ब्याह, होली, ईद दिवाली या शोक प्रसंगों पर मिलने का सिलसिला जारी रहता है। इसीलिये तीनों देशों के नागरिकों के हित में भारत पाकिस्तान के बीच रेलसेवा फिर से बहाल करने का विचार किया गया। भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच शिमला समझौते में समझौता एक्सप्रेस की नींव पड़ी। 22 जुलाई 1976 को अटारी (पंजाब-भारत) से लाहौर (पाकिस्तान) के बीच समझौता एक्सप्रेस शुरू हुई थी। इस प्रकार समझौता एक्सप्रेस का इतिहास 43 साल पुराना है। पहले यह ट्रेन प्रति दिन चलती थी, परंतु 1994 में इसे सप्ताह में दो दिन कर दिया गया। शुरुआत में यह ट्रेन एक दिन में ही पाकिस्तान जाकर भारत लौट आती थी, परंतु अब यह दिल्ली से लाहौर के बीच चलती है और दूसरे दिन भारत लौटती है।

भारत से किस दिन जाती है समझौता एक्सप्रेस ?

भारत के पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से हर बुधवार और रविवार को रात 11.10 बजे समझौता एक्सप्रेस पाकिस्तान जाने के लिये निकलती है। इस ट्रेन के लिये पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक अलग से प्लेटफॉर्म बनाया गया है। इस ट्रेन में बैठने से पहले यात्रियों को कई स्तर की जांच-पड़ताल से गुजरना पड़ता है। इस ट्रेन में कुल 6 शयनयान और एक वातानुकूलित तृतीय श्रेणी (3rd AC) कोच हैं। दिल्ली से निकलने के बाद अटारी बॉर्डर तक इस ट्रेन का बीच में कोई स्टोपेज नहीं है। भारतीय रेलवे की ओर से इस समझौता एक्सप्रेस को राजधानी एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस जैसी प्रमुख रेलगाड़ियों से भी ज्यादा तरजीह दी जाती है, ताकि यह ट्रेन लेट न हो।

वापसी में पाकिस्तान के लाहौर स्टेशन से यह ट्रेन भारत में हर सोमवार और गुरुवार को पहुँचती है। इस बीच ट्रेन के ड्राइवर (लोको पायलट) और गार्ड नहीं बदले जाते हैं। भारत में यह ट्रेन दिल्ली से अटारी बॉर्डर तक जाती है। इसके बाद अटारी से वाघा (पाकिस्तान) बॉर्डर तक तीन किलोमीटर की सीमा पार करती है। इस बीच बीएसएफ के जवान घोड़ों से इसकी निगरानी करते हैं, आगे चलते हुए वह पटरियों की भी पड़ताल करते हैं। सीमा पार करने के बाद यही काम पाकिस्तान की ओर से किया जाता है और पाकिस्तान में यह ट्रेन वाघा बॉर्डर से लाहौर तक जाती है।

कब-कब रुकी समझौता एक्सप्रेस ?

  • 13 दिसंबर-2001 को भारत के संसद भवन पर आतंकी हमले के बाद भारत ने समझौता एक्सप्रेस ट्रेन रोक दी थी।
  • 12 साल पहले फरवरी-2007 में समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में एक जबरदस्त बम धमाका हुआ था, जिसमें 68 लोगों की मृत्यु हुई थी और 12 लोग घायल हुए थे। मारे गये लोगों में अधिकांश पाकिस्तानी नागरिक थे। जब यह वारदात हुई तब ट्रेन दिल्ली से लाहौर जा रही थी। इस मामले की एफआईआर के अनुसार दिल्ली से लगभग 80 किलोमीटर दूर हरियाणा के पानीपत जिले में दिवाना रेलवे स्टेशन के पास रात को 23.53 बजे यह धमाका हुआ था। इसके साथ ही दो सूटकेस भरके जीवित बम भी बरामद हुए थे। इस घटना के बाद भी सालों तक मामले की जांच हुई, परंतु सबूतों के अभाव में आरोपियों को जमानत मिल गई। इस धमाके के बाद भी सुरक्षा कारणों से ट्रेन को रोक दिया गया था।
  • इसी साल 27 दिसंबर 2007 को पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो पर हमले के बाद इस ट्रेन को रोक दिया गया था।
  • फरवरी 2019 में भी पाकिस्तान के बालाकोट में भारत की एयर स्ट्राइक के बाद समझौता एक्सप्रेस को रोक दिया गया था।
  • 4 मार्च 2019 से पुनः शुरू हुई समझौता एक्सप्रेस को अब एक बार फिर 8 अगस्त-2019 को रोक दिया गया है। पाकिस्तान की ओर से गुरुवार को यह ट्रेन भारत में दाखिल होती है, परंतु पाकिस्तान ने इस ट्रेन को अपनी वाघा बॉर्डर पर ही रोक दिया। इससे भारत आ रहे 110 यात्री वाघा बॉर्डर पर फंस गये थे। हालाँकि ट्रेन को भारत में लाने के लिये भारत के नॉर्दन रेलवे ने ड्राइवर और इंजन वाघा भेजा था, जो ट्रेन के पाकिस्तानी लोको पायलट और गार्ड को भारत में स्थिति सामान्य होने का भरोसा दिलाकर ट्रेन को अटारी लाने में सफल हुए हैं। नॉर्दन रेलवे के प्रवक्ता दीपक कुमार के अनुसार ट्रेन रोकी नहीं गई थी, बल्कि पाकिस्तानी लोको पायलट और गार्ड को भारत में धारा 370 हटाए जाने के बाद स्थिति तनावपूर्ण होने की आशंका थी, इसलिये उन्होंने ट्रेन को वाघा में ही रोक दिया था। उन्होंने बताया कि भारत से 70 यात्री पाकिस्तान जाने के लिये ट्रेन की राह देख रहे हैं।
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