गाँधीनगरः एक ही गाँव से नाता रखने वाले दो दामाद-भांजों के बीच होगा हाई वॉल्टेज चुनावी संघर्ष

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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की उम्मीदवारी की वजह से हॉट सीट बन गई है। भाजपा ने यहाँ से अपने सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी की जगह पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे अमित शाह को उम्मीदवार बनाया है, इसलिये पूरे देश की नजर इस सीट पर जमी हुई है। काँग्रेस ने गाँधीनगर उत्तर के मौजूदा विधायक सी. जे. चावड़ा को शाह के खिलाफ यहाँ चुनावी मैदान में उतारा है।

चुनाव में कई बार राजनीतिक दलों के साथ-साथ पारिवारिक सम्बंधियों के बीच भी रोचक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। ऐसा ही संयोग इस सीट पर भी बना है। इसलिये इस सीट पर चुनावी जंग और भी दिलचस्प हो गई है। काँग्रेस और भाजपा के यह दोनों उम्मीदवार पारिवारिक रूप से एक ही गाँव से जुड़े हुए हैं। दोनों उम्मीदवारों का ससुराल और ननिहाल पक्ष एक ही गाँव में है।

पिलवाई के लोगों को है क्यों है अफसोस ?

दरअसल मेहसाणा जिले की वीजापुर तहसील का पिलवाई गाँव इन दोनों राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की ससुराल और ननिहाल है। लगभग आठ हजार लोगों की आबादी वाले इस गाँव में लगभग 4,500 मतदाता हैं। अमित शाह और सी. जे. चावड़ा की उम्मीदवारी से इस गाँव के लोग बहुत उत्साहित हैं, लेकिन उन्हें इस बात का अफसोस भी है कि वे इन दोनों के लिये मतदान नहीं कर पायेंगे, क्योंकि यह गाँव गाँधीनगर लोकसभा इलाके में नहीं आता है।

सी. जे. चावड़ा के ननिहाल और ससुराल पक्ष के लोग आज भी इसी गाँव में रहते हैं, जबकि अमित शाह के ससुराल पक्ष का मकान तो है, लेकिन ससुराल और ननिहाल पक्ष के लोग व्यवसाय के लिये मुँबई और पुणे में जा बसे हैं। यह लोग कभी-कभी ही इस गाँव में आते हैं। हालाँकि अमित शाह की पत्नी सोनलबेन शाह अक्सर इस गाँव में आती हैं और उनके परिवार द्वारा बनवाये गये मंदिर भगवान श्रीनाथजी की हवेली में दर्शन करती हैं।

मंत्री बनने के बाद पिलवाई आए थे शाह

अमित शाह जब पहली बार गुजरात में मँत्री बने थे, तब यहाँ आये थे और पहली बार इस गाँव के लोगों को संबोधित किया था। इस गाँव के लोगों को इस बात का गौरव तो है कि उनका गाँव अपने दो दामादों और भाँजों की उम्मीदवारी का साक्षी बना है, लेकिन साथ ही इस गाँव की कुछ समस्याएँ भी हैं। गाँव में वर्षों से पीने के पानी और सिंचाई के पानी की गंभीर समस्या है, जिसके कारण यहाँ खेती करने में परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि कोई भी जीते, उन्हें तो खुशी ही होगी, लेकिन जीतने के बाद विजयी उम्मीदवार इस गाँव की समस्याओं का निपटारा करे।

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