मोदी के नामांकन से क्या है सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र का कनेक्शन ? : देखिए VIDEO और समझिए पूरी कहानी

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काशी की ऐतिहासिक धरोहरों ही नहीं, अपितु पौराणिक मान्यताओं को भी सम्मान दिया मोदी ने

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2019 में फिर एक बार वाराणसी लोकसभा सीट से नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। गुरुवार को मोदी ने वाराणसी में विराट रोड शो किया, तो शुक्रवार को काशी के कोतवाल (चौकीदार) कहे जाने वाले काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना की और इसके बाद नामांकन पत्र दाखिल किया।

मोदी के नामांकन पत्र के प्रस्तावकों में कुल चार लोग शामिल थे। हम यहाँ केवल एक प्रस्तावक की चर्चा करने जा रहा हैं, जो मोदी के नामांकन को सतयुग में हुए सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र से जोड़ता है। यह प्रस्तावक है जगदीश चौधरी, जो डोम राजा परिवार से आते हैं। मोदी के नामांकन पत्र के प्रस्तावकों में जगदीश चौधरी का नाम जुड़ते ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न केवल काशी की ऐतिहासिक, अपितु पौराणिक धरोहर को भी सम्मान देने का कार्य किया है।

राजा हरिश्चंद्र के ख़रीदार के वंशज हैं जगदीश चौधरी

यह कथा पौराणिक है। भले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी काशी को आधुनिक क्योटो बनाने का सपना संजोए हुए हैं, परंतु वे काशी की ऐतिहासिक धरोहरों ही नहीं, अपितु पौराणिक मान्यताओं को भी उतना ही सम्मान देते आए हैं। यह बात तब सिद्ध हो गई, जब मोदी के नामांकन पत्र के प्रस्तावकों में काशी के डोम राजा परिवार के जगदीश चौधरी को शामिल किया गया। वर्तमान में डोम राजा की उपाधि प्राप्त और मोदी के नामांकन प्रस्तावकों में शामिल जगदीश चौधरी सतयुग के उस कल्लू डोम के वंशज हैं, जिन्होंने राजा हरिश्चंद्र को नीलामी में ख़रीदा था। यहाँ आपको बता दें कि डोम उन्हें कहा जाता है, जो श्मशान घाट में शवों की चिता को अग्नि देते हैं।

क्यों स्वयं को बेचने को विवश हुए राजा हरिश्चंद्र ?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अपने वचन, कर्म, धर्म और सत्य का पालन करने के लिए विख्यात हरिश्चंद्र सतयुग में भारत के प्रतापी चक्रवर्ती सम्राट और सत्यवादी महाराजा थे। जब उन्होंने विश्वामित्र की तपस्या भंग कर दी, तो विश्वामित्र ने कुपित होकर राजा हरिश्चंद्र से उनका राज-पाट सब कुछ दान में मांग लिया। हरिश्चंद्र अब पूरी तरह कंगाल हो चुके थे, परंतु विश्वामित्र इतने से ही नहीं रुके। उन्होंने दान के उपरांत 1000 स्वर्ण मुद्राओं के रूप में दक्षिणा भी मांगी, परंतु हरिश्चंद्र के पास देने के लिए अब कुछ नहीं था। उन्होंने 1000 स्वर्ण मुद्राएँ जुटाने के लिए काशी के घाट पर पहले तो अपनी पत्नी और पुत्र को 600 स्वर्ण मुद्राओं में बेचा। अब भी 400 स्वर्ण मुद्राएँ एकत्र करना शेष थीं। तब विवश होकर राजा हरिश्चंद्र ने अपने धर्म-वचन की रक्षा के लिए अंततः स्वयं की बोली लगाई। कहते हैं कि काशी में गंगा किनारे आज जो हरिश्चंद्र घाट है, वहीं पर सतयुग में कल्लू डोम सरदार ने राजा हरिश्चंद्र को 400 स्वर्ण मुद्राओं में ख़रीदा।

क्या होता है डोम और कैसे बने राजा ?

डोम का अर्थ होता है श्मशान घाट में चिताओं को अग्निदाह देने वाला। राजा हरिश्चंद्र को ख़रीदने वाले कल्लू डोम उस समय डोम सरदार थे। कल्लू डोम ने राजा हरिश्चंद्र को ख़रीदने के बाद अपने श्मशान घाट में नौकरी पर रख लिया। कहा जाता है कि विश्वामित्र ने राजा हरिश्चंद्र के धर्म की परीक्षा ली थी और इस परीक्षा में हरिश्चंद्र उत्तीर्ण हुए थे, क्योंकि उन्होंने अपने पुत्र के अवसान के बाद उसका शव लेकर आई अपनी पत्नी से भी श्मशान कर मांग कर अपने कर्म-धर्म का पालन करने में हिचक नहीं दिखाई। तभी श्मशान में पहुँच कर विश्वामित्र ने प्रसन्न होकर न केवल हरिश्चंद्र के पुत्र को जीवित किया, अपितु उनका राज-पाट सब कुछ लौटा दिया। चूँकि कल्लू डोम ने राजा हरिश्चंद्र को नौकरी पर रखा था। इसीलिए तभी से काशी के कल्लू डोम को डोम राजा की उपाधि दी गई। कल्लू डोम का डोम राजा परिवार आज भी काशी में श्मशान घाट में चिताएँ जलाने की अपने पूर्वजों की परम्परा निभा रहा है।

मोदी-प्रियंका के बारे में क्या कहा डोम राजा ने ?

काशी में मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार करने वालों के प्रमुख डोम राजा यानी जगदीश चौधरी ने मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्हें गरीबों और पिछड़ों का हितैषी बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में देश में बहुत सुधार हुआ है। मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने इस क्षेत्र के निर्धन और पिछड़े लोगों के लिए कार्य किया है। नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह कार्य किया है, उसे देखते हुए उनके आसपास कोई नहीं है। उसका एक बड़ा उदाहरण वाराणसी है, जहाँ घाटों की दिन और रात में सफाई की जा रही है। जगदीश चौधरी ने कहा कि अगर मोदी के खिलाफ प्रियंका गांधी भी चुनाव में उतरतीं, तो उनके जीतने की संभावना नहीं थी। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में डोम राजा ने मोदी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव दोनों की प्रशंसा की थी, परंतु इस बार वह पूरी तरह मोदी के साथ हैं। उन्होंने कहा, ‘जो कार्य कर रहा है, उसी का तो गुणगान करेंगे ना। मोदी के कार्यकाल में देश में बहुत सुधार हुआ है और निर्धन तबके को कई लाभ मिले हैं। वाराणसी में कोई मुकाबला नहीं है और मोदी रिकॉर्ड मार्जिन से जीतेंगे। मोदी का जादू पूरे शहर में है और उनके विरुद्ध किसी प्रत्याशी के लिए संभावना न के बराबर है।’

निम्न VIDEO पर क्लिक करके देखिए राजा हरिश्चंद्र की कहानी :

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