भारत में पहली बार इन्होंने लगाया ‘लगान’, जो आज बेईमानों के लिए बन चुका है ‘आतंक’ !

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आयकर की 159 वर्षीय यात्रा पर विशेष

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 24 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। आज भारतीय आयकर विभाग का 159वाँ जन्मदिन है। पहली बार 1860 में ‘लगान’ के रूप में आयकर वसूलने की शुरुआत हुई थी। 2010 में जब इसके 150 वर्ष पूरे हुए तो आयकर विभाग ने हर साल 24 जुलाई को आयकर दिवस मनाने का निर्णय किया। इस प्रकार प्रति वर्ष इस दिन आयकर दिवस मनाने की शुरुआत हुई। 24 जुलाई -2019 को 9वाँ आयकर दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर आयकर विभाग की ओर से आज एक गोष्ठि का भी आयोजन किया गया है, जिसमें देश के विकास में आयकर की भूमिका पर समाज के जिम्मेदार लोगों, करदाताओं, व्यापारी संगठनों के पदाधिकारियों आदि को चर्चा के लिये बुलाया गया है। इन सभी के सुझावों और सहयोग से आयकर व्यवस्था को और बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।

1860 में सर जेम्स विल्सन ने पहली बार लागू किया था आयकर कानून

जब देश के पहले बजट की बात होती है तो कहा जाता है कि भारत का पहला बजट 1947 में पेश हुआ, जबकि यह पूरा सच नहीं है, क्योंकि भारत का पहला बजट देश की आज़ादी से भी 87 साल पहले यानी 1860 में पेश हुआ था और इसी बजट के दौरान पहली बार देश की जनता पर आयकर यानी इनकम टैक्स (INCOM TAX) थोपा गया था। उस समय देश अंग्रेजों की ग़ुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था और ब्रिटिश हुकूमत ने पहले स्वतंत्रता संग्राम को पूरी तरह से कुचलने में सफलता अर्जित की थी। हालाँकि इस संग्राम को दबाने में उसका खजाना पूरी तरह से खाली हो गया था, तब ब्रिटिश शासन ने बजट लाने का विचार किया और इस प्रकार 1860 में पहला बजट पेश हुआ जिसमें तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर जनरल परिषद के स्कॉटिश वित्त सदस्य सर जेम्स विल्सन ने 7 अप्रैल की शाम 5 बजे बजट पेश किया, जिसमें पहली बार ब्रिटिश खजाने को भरने के लिये आयकर कानून लागू किया गया। यह कर उस समय के धनवानों, रजवाड़ों और भारत में रहने वाले ब्रिटिश नागरिकों से वसूलने का प्रावधान किया गया था। पहले साल आयकर की वसूली से ब्रिटिश शासन को उस समय 30 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई थी। जबकि 159 सालों बाद भारत की सरकार को मार्च-2019 के अंत तक लगभग 10.25 लाख करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है। इस प्रकार भारत सरकार अपने बजट की लगभग 50 प्रतिशत आय प्रत्यक्ष कर यानी आयकर के रूप में हासिल कर रही है।

कौन है सर जेम्स विल्सन ?

सर जेम्स विल्सन व्यवसाय से बिज़नेसमैन और ब्रिटिश सरकार में फाइनांस सेक्रेटरी के पद पर थे। भारत में ब्रिटिश सरकार का बजट पेश करने के लिये उन्हें एक साल पहले यानी 28 नवंबर-1859 को भारत बुलाया गया था। सर जेम्स विल्सन का इतिहास भी काफी दिलचस्प है। अपने स्ट्रगल के दिनों जेम्स टोपियाँ बेचने का काम करते थे। इसके बाद उन्होंने नील का बिज़नेस शुरू किया था। खास बात तो यह है कि उन्हें अर्थशास्त्र का बहुत शौक था, परंतु अर्थशास्त्र की उन्होंने कोई पढ़ाई नहीं की थी। हालाँकि उन्हें अर्थशास्त्र का काफी ज्ञान था, जिसकी बदौलत उन्होंने 1837 में खुद को दिवालिया होने से बचा लिया था।

जब उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी तो उन्होंने 1843 में दी इकोनॉमिस्ट की शुरुआत की, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश इकोनॉमी को लेकर कई आर्टिकल लिखे। 1853 में उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति बेचकर चार्टेड बैंक ऑफ इंडिया, ऑस्ट्रेलिया और चाइना की शुरुआत की। 116 साल बाद यही बैंक 1969 में स्टैंडर्ड चार्टेड बैंक बन गया। 1860 में भारत का पहला बजट और पहला आयकर कानून लागू करने के 5 महीने बाद ही जेम्स विल्सन की मृत्यु हो गई, जिन्हें ब्रिटिश शासन की उस समय की राजधानी कोलकाता में दफनाया गया था।

आयकर का पूरा इतिहास

ब्रिटिश शासन की ओर से लगाया गया आयकर कानून शक्तिशाली लोगों को पसंद नहीं आ रहा था, इसलिये 1865 में इस कानून को रद्द कर दिया गया था। इसके 2 साल बाद 1867 में इसे कुछ बदलावों के साथ फिर से लागू किया गया। उस समय कर की दरें उस समय के हालातों को देखते हुए तय की जाती थी। ब्रिटेन और रूस के युद्ध के समय जब अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता उत्पन्न हुई तो तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड डुफ्रिन ने नया आयकर कानून 1886 पेश किया। यह आधुनिक भारत का पहला व्यापक आयकर कानून था। इससे 1886-87 में 1.36 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली हुई थी। इसके बाद 1914-15 में 3.32 लाख आयकर दाता हो गये थे और कर वसूली 3.05 करोड़ रुपये तक पहुँच गई थी। प्रथम विश्व युद्ध के बाद धन की कमी को देखते हुए 1916 में पहली बार कर की अलग-अलग दरें तय की गईं और वर्ष 1917 में युद्ध प्रयासों के दौरान ‘सुपर टैक्स’ लगाया गया। इससे वर्ष 1918-19 में आयकर की वसूली 11 करोड़ रुपये तक पहुँच गई थी।

गांधीजी के असहयोग आंदोलन के वर्ष में 1922 में पहली बार व्यापक आधार वाला आयकर कानून-1922 बनाया गया, इसी समय आयकर विभाग के विकास की कहानी शुरू हुई। 1924 में केन्द्रीय राजस्व बोर्ड के हाथों में कर प्रशासन सौंप दिया गया। 25 अप्रैल-1941 को आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण अस्तित्व में आया।

इससे पहले 1939-40 में कुल आयकर वसूली 19.82 करोड़ रुपये हुई थी। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार दूसरे विश्व युद्ध और बढ़ते कर बोझ से कर की चोरी बढ़ने लगी, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 1943 में विशेष जाँच शाखाएँ स्थापित हुईं। वर्ष 1945 में पहली बार आयकर अधिकारियों की सीधी भर्ती हुई, इसके लिये भारतीय लेखा और लेखापरीक्षा रखी गई। बाद में इसी को भारतीय राजस्व सेवा (IRS) का नाम दिया गया। दूसरे विश्व युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और सामाजिक कल्याण के लिये राजस्व बढ़ाने की आवश्यकता महूसस की गई और 1922 के आयकर कानून को ही सभी राज्यों में लागू कर दिया गया। वर्ष 1945-46 में आयकर वसूली बढ़कर 57.12 करोड़ रुपये तक पहुँच गई थी। आज़ादी के बाद वर्ष 1953 में भू-शुल्क अधिनियम अस्तित्व में आया। कैंब्रिज (ब्रिटेन) के अर्थशास्त्री प्रो. निकोलस काल्डोर की सिफारिशों के आधार पर भारत सरकार ने संपत्ति कर अधिनियम-1957, व्यय कर अधिनियम-1957 तथा उपहार कर अधिनियम-1958 पारित कराये। वर्ष 1958 में ही नये आयकर अधिनियम पर कानून आयोग की रिपोर्ट सौंपी गई और इसी दौरान 1958 में प्रत्यक्ष कर प्रशासन जाँच समिति भी स्थापित हुई।

मौजूदा आयकर कानून 1962 का है

“Income Tax Department,BKC ,Bandra, Mumbai.” *** Local Caption *** “Income Tax Department,BKC ,Bandra, Mumbai. Express photo by Vasant Prabhu. 1182012.”

विधि आयोग तथा जाँच समिति की सिफारिशों के आधार पर आयकर अधिनियम 1961 पारित किया गया, जो पहली अप्रैल-1962 से प्रभावी होकर अभी तक लागू है। सरकार ने नई आवश्यकताओं को देखते हुए एक नया कर बनाने का निर्णय किया है और इसके लिये प्रत्यक्ष कर संहिता (DTC) विधेयक संसद में पेश कर दिया है, इस पर संसद की स्थाई समिति विचार कर रही है। वर्ष 1960-61 में प्रत्यक्ष कर वसूली 287.47 करोड़ रुपये हुई थी। वर्ष 1963 में केन्द्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम के माध्यम से केन्द्रीय राजस्व बोर्ड के स्थान पर दो अलग-अलग केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) और केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBEC) बनाये गये। वित्त वर्ष 2010-11 में प्रत्यक्ष कर वसूली 4,46,070 करोड़ रुपये हुई थी। कुल कर वसूली में अब प्रत्यक्ष करों का हिस्सा लगभग 50 प्रतिशत तक पहुँच चुका है। 2010 में आयकर व्यवस्था की शुरुआत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयकर विभाग ने हर साल 24 जुलाई को आयकर दिवस मनाने का फैसला किया है, तब से हर साल 24 जुलाई को आयकर दिवस मनाया जाता है। 2019 में 9वाँ आयकर दिवस मनाया जा रहा है।

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