ये ‘नेता’ देख रहे हैं खंडित जनादेश का सपना, क्योंकि कोई KING बनना चाहता है, तो कोई KINGMAKER !

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आज की नई पीढ़ी को 1989 से 2014 तक का दौर याद नहीं होगा। यह वो समय था, जब देश की जनता लगातार खंडित जनादेश दे रही थी। इस दौर में जो भी सरकारें बनी, उनमें बनीं, वे सभी सहयोगी दलों की बैसाखी पर और अस्थिरता के साये में काम करती थीं, परंतु लोकसभा चुनाव 2014 में देश की जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया और नरेन्द्र मोदी ने एक सशक्त प्रधानमंत्री के रूप में पाँच वर्षों तक काम किया।

देश के मतदाताओं में नई पीढ़ी के करोड़ो नए मतदाता जुड़ गए और देश भी एक नए दौर में प्रवेश कर चुका, परंतु कुछ पुराने राजनीतिक दलों, उनकी सोच और उनके नेताओं की महत्वाकांक्षा अब भी पुरानी ही है और ये ऐसे लोग हैं, जो चाहते होंगे कि लोकसभा चुनाव 2019 में देश की जनता खंडित जनादेश दे। ये लोग ऐसा इसलिए चाहते होंगे, क्योंकि ये तमाम नेता ये अच्छी तरह जानते हैं कि मोदी और भाजपा कदाचित हार भी जाएँ, तो भी कांग्रेस सहित किसी भी मोदी विरोधी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिलेगा। मोदी की हार का मतलब है खंडित जनादेश और सत्ता की आस लगाए बैठे ये महत्वाकांक्षी नेता चाहेंगे कि खंडित जनादेश आए, जिससे उन्हें किंग या किंगमेकर बनने का अवसर मिल जाए।

आइए अब आपको बताते हैं कि खंडित जनादेश की इच्छा रखने वाले नेताओं के बारे में ।

राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को तीन राज्यों में मिली चुनावी सफलता के बाद लगता है कि उनके पास देश का प्रधानमंत्री बनने का 2019 में ही सबसे अच्छा अवसर है, परंतु वे भी जानते हैं कि लोकसभा चुनाव 2014 में 44 पर सिमट चुकी कांग्रेस ने 5 वर्षों में ऐसा कोई कारनामा नहीं किया है और न ही सत्तारूढ़ मोदी सरकार ने इतने बुरे कर्म किए हैं कि 2019 में कांग्रेस को बहुमत के लायक 272 सीटें मिल जाएँ। इसलिए वे राज्य-राज्य भटक कर सहयोगी दलों को बेसाखी बना रहे हैं, ताकि कांग्रेस को विपक्षी धड़े में सबसे बड़ी पार्टी बना कर उभार सकें। ऐसे में यदि एनडीए बहुमत से थोड़ा-सा भी दूर रह जाए और कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिले, तो राहुल गांधी स्वयं प्रधानमंत्री बन सकें। इसलिए राहुल जरूर चाहते होंगे कि एनडीए को बहुमत न मिले, जिसका सीधा अर्थ है कि देश खंडित जनादेश की ओर चला जाए।

अब बात करते हैं क्षेत्रीय क्षत्रपों की, जिनमें ज्यादातर प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं और उनको कहीं न कहीं ऐसा लगता है कि भारतीय लोकतंत्र में सब कुछ संभव है। जब आई. के. गुज़राल, एच. डी. देवगौड़ा, नरसिंह राव और मनमोहन सिंह जैसे नेता ‘ACCIDENTAL PRIME MINISTER’ बन सकते हैं, तो वे क्यों नहीं। ऐसे नेताओं की सूची बहुत लम्बी है। कुछ के बारे में आपको जरूर बताते चलते हैं।

ममता बैनर्जी

ममता बैनर्जी कह रही हैं कि यदि 2019 में मोदी फिर से प्रधानमंत्री बने, तो देश में 2024 में चुनाव नहीं होगा। उनका कहने का तात्पर्य यह है कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने से देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा और तानाशाही व्यवस्था लागू हो जाएगी। ममता भी यही चाहती हैं कि मोदी सत्ता से दूर रहें और तृणमूल कांग्रेस (TMC) को पश्चिम बंगाल में अधिक से अधिक वोट मिलें। ममता भले ही पश्चिम बंगाल केन्द्रित राजनीति कर रही हों, परंतु वे केन्द्र की राजनीति में रह चुकी हैं। ऐसे में उनके दिल के भी किसी कोने में यह इच्छा दबी हुई है कि मौका मिले, तो प्रधानमंत्री बन जाएँ। यदि खंडित जनादेश आए, तो भले वे ही पीएम न बन सकें, पर कम से कम केन्द्र की सत्ता में भागीदारी तो मिल ही सकती है। हो सकता है कि टीएमसी किंगमेकर भी बन जाए। बस जरूरत है खंडित जनादेश की।

माया-मुलायम

उत्तर प्रदेश की राजनीति के ये तीन बड़े चेहरे हैं, जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं, परंतु तीनों का ही सपना देश का प्रधानमंत्री बनने का है। बसपा सुप्रीमो मोदी को हराना चाहती हैं। इसके लिए 25 वर्ष तक दुश्मन रही सपा से हाथ भी मिला लिया। माया चाहती हैं कि मोदी सरकार सत्ता से बाहर हो जाए, परंतु माया स्वयं चुनाव नहीं लड़ रहीं। उनकी मानसिकता से कोई अपिरिचत नहीं है कि वे 23 मई के बाद बनने वाली परिस्थिति को देख कर निर्णय करेंगी। माया गठबंधन वाली सरकार बनने पर मौका मिला, तो प्रधानमंत्री पद पर दावा ठोक सकती हैं। सफलता मिलेगी, तो वे उप चुनाव लड़ लेंगी। इसी प्रकार मुलायम सिंह वरिष्ठ सपा नेता हैं। आज भले यूपी में वे पुत्र अखिलेश के आगे पार्टी पर से कमान गँवा चुके हैं, परंतु मौका आया, तो वे प्रधानमंत्री बनना चाहेंगे। इसमें कदाचित अखिलेश आड़े नहीं आएँगे, क्योंकि वे इस समय यूपी का मुख्यमंत्री बनने की ही कवायद में जुटे हुए हैं। माया-मुलायम का सपना तभी साकार होगा, जब देश की जनता खंडित जनादेश देगी।

नायडू-केसीआर

दक्षिण के तीन राजनेता तेलुगू देशम् पार्टी (TDP) के चंद्रबाबू नायडू और तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) के के. चंद्रशेखर राव को भी लगता है कि गुज़राल और देवेगौड़ा की तरह उन्हें भी देश की कमान संभालने का मौका मिल सकता है। यदि खंडित जनादेश आया और कांग्रेस की स्थिति लचर रही, तो नई सरकार क्षेत्रीय दलों के भरोसे ही बनेगी, जिसे कांग्रेस का समर्थन होगा। ऐसी सरकार में नायडू और राव को कहीं न कहीं प्रधानमंत्री पद की कुर्सी नज़र आना स्वाभाविक है। यदि ऐसा न हो सका, तो कम से कम ये दोनों पार्टियाँ किंगमेकर की भूमिका निभाने का तो अवश्य सपना देख रही हैं।

नवीन पटनायक

ओडिशा की राजनीति में पिता बीजू पटनायक की विरासत को संभाल रहे बीजू जनता दल (BJD) के नेता नवी पटनायक भले ही इस समय एनडीए या यूपीए किसी के साथ नहीं हैं, लेकिन 23 मई के परिणामों पर उनकी भी पैनी नजर रहेगी। ओडिशा में यदि बीजेडी को अधिक से अधिक सीटें मिलीं और केन्द्र में यूपीए या एनडीए में से किसी को भी उनकी जरूरत पड़ी, तो नवीन पटनायक भी किंगमेकर अवश्य बनना चाहेंगे।

एच. डी. देवेगौड़ा

कांग्रेस की बैसाखी पर एक बार प्रधानमंत्री चुके एच. डी देवेगौड़ा अच्छी तरह जानते हैं कि उन्हें उस कुर्सी पर से हटाने वाली भी कांग्रेस ही थी, परंतु देवेगौड़ा की पार्टी जनता दल सेकुलर (JDS) का आज कांग्रेस से गठबंधन है। कर्नाटक में कांग्रेस की बैसाखी पर देवेगौड़ा के पुत्र एच. डी. कुमारस्वामी मुख्यमंत्री का सुख भोग रहे हैं। देवेगौड़ा लोकसभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं, परंतु उनका अभी भी यह सपना है कि उन्हें फिर एक बार प्रधानमंत्री पद की कुर्सी मिल जाए। इसीलिए वे कांग्रेस के सहारे कर्नाटक में अधिक से अधिक सीटें लाने की कोशिश में हैं। खंडित जनादेश की स्थिति में यदि केंद्र में कोई विशेष परिस्थिति बनी, तो देवेगौड़ा फिर से प्रधानमंत्री बन सकें। यदि ऐसा न हो सका, तो देवेगौड़ा केन्द्र में किंगमेकर की भूमिका निभाने की तो अवश्य ही महत्वाकांक्षा रखते हैं। शर्त इतनी है कि खंडित जनादेश मिले।

अब यह मतदाताओं को तय करना है कि यदि देश में 23 मई, 2019 को खंडित जनादेश लाना है या एक स्थिर सरकार। पाँच वर्ष की मोदी सरकार, उसके कामकाज, मोदी सरकार को लेकर देश की जनता के मूड, विभिन्न सर्वेक्षणों के आँकड़ों को देख कर यह आसानी से तय किया जा सकता है कि यदि मोदी सरकार को बहुमत नहीं मिला, तो फिर किसी को नहीं मिलेगा और देश फिर खंडित जनादेश वाले दौर में चला जाएगा, जिससे देश का भला नहीं होगा। इसीलिए हर मतदाता अपना मतदान उसी पार्टी को देने की कोशिश करे, जिसकी सरकार बनने की अधिक संभावना हो, ताकि देश को एक स्थिर सरकार मिले।

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