जानिए कौन हैं ये अधीर रंजन चौधरी, जो टैगोर के ‘हिमाचल’ का हर रहे चीर ?

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विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 8 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। उपरोक्त चित्र में दिखाई दे रहे व्यक्ति को 18 जून, 2019 से पहले देश के लोग इतना क़रीब से नहीं जानते थे, जितना कि आज जानने लगे हैं। वैसे यह व्यक्ति इस समय कोई ‘अच्छा’ काम करने के कारण नहीं चर्चा में नहीं आए हैं। इनके विवादास्पद वक्तव्यों ने इन्हें ही नहीं, अपितु 138 साल पुरानी, ऐतिहासिक और राष्ट्रवाद का भव्य भूतकाल रखने वाली कांग्रेस पार्टी को भी संकट में डाल दिया है।

जी हाँ। हम बात कर रहे हैं अधीर रंजन चौधरी की। यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद प्राप्त करने के लिए आवश्यक 54 सीटें भी नहीं जीत पाने वाली कांग्रेस ने अधीर रंजन चौधरी को लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल (CPP) का नेता बनाया है। 18 जून, 2019 को सीपीपी नेता बनने से पहले अधीर रंजन चौधरी केन्द्र में मंत्री रह चुके हैं। उनके पास 28 वर्षों का लम्बा राजनीतिक अनुभव है। कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे चुके राहुल गांधी ने जब लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल का नेता बनने से भी इनकार कर दिया, तो कांग्रेस पार्टी ने अधीर रंजन चौधरी को उनके अनुभव के आधार पर सीपीपी नेता बनाने का निर्णय किया, परंतु कांग्रेस कदाचित नहीं जानती थी कि अधीर के कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अधीरतापूर्ण वक्तव्यों से वे पार्टी को बड़े संकट में डाल देंगे।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक और धारा 370 समाप्ति के संकल्प को लेकर कांग्रेस पार्टी में मचे घमासान के बीच अधीर रंजन चौधरी ने आज उस समय सभी संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन कर डाला, जब उन्होंने कश्मीर की तुलना हिटलर के नाज़ी कैम्प से की। इसके साथ ही अधीर रंजन चौधरी के वक्तव्य से यह भी स्पष्ट संकेत निकल गया कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तुलना अधिनायक (तानाशाह) हिटलर से कर रहे हैं। अधीर कदाचित कश्मीर की तुलना हिटलर के नाज़ी कैम्प से करते हुए यह भूल गए कि वे जिस मिट्टी में पैदा हुए हैं, वहाँ कभी रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया था। अधीर न तो हिटलर के नाज़ी कैम्प में यहूदियों को दी गई यातना से अवगत हैं और न ही उन्हें इस बात का एहसास है कि कश्मीर भारत सरकार के अधीन एक केन्द्र शासित प्रदेश है। यदि कश्मीर की तुलना हिटलर के नाज़ी कैम्प से की जाए, तो मतलब साफ है कि अधीर रंजन भारत के प्रधानमंत्री को हिटलर बता रहे हैं।

‘जन गण मन’ के अधिनायक का अपमान कर गए अधीर ?

अधीर रंजन चौधरी बंगाल की उस धरती से आते हैं, जहाँ रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे महापुरुष जन्मे थे। टैगोर का बनाया गीत ‘जन गण मन…’ ही आज भारत का राष्ट्रगान है। इस राष्ट्रगान की तीसरी पंक्ति ‘विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा उच्छल जलधि तरंग’ है। इस पंक्ति में टैगोर ने जिस हिमाचल की बात की है, वह भारत के हिमालय से जुड़े राज्यों का प्रतिनिधित्व करती है और इन राज्यों में कश्मीर भी शामिल है, परंतु टैगोर की ही भूमि पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद के बेरहामपुर में जन्मे अधीर रंजन चौधरी ने क्या कश्मीर की तुलना हिटलर के नाज़ी कैम्प से करके अपनी ही मिट्टी के महापुरुष का अपमान नहीं कर दिया ? टैगोर का राष्ट्रगान जम्मू-कश्मीर सहित अखंड भारत को प्रणाम करता है। ऐसे में कश्मीर की तुलना अमानवीय यातनाओं के इतिहास से जुड़े नाज़ी कैम्प के साथ करके अधीर रंजन ने कांग्रेस के राष्ट्रवाद पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया।

कौन हैं और कैसे उभरे अधीर रंजन चौधरी ?

2 अप्रैल, 1956 को बेरहामपुर में निरंजन और सरोजा बाला चौधरी के यहाँ जन्मे अधीर रंजन चौधरी ने आई. सी. इंस्टीट्यूट-बेहरामपुर में पढ़ाई की। 90 के दशक में वे राजनीति में आए, जब राजीव गांधी कांग्रेस अध्यक्ष हुआ करते थे। अधीर ने कांग्रेस के साथ अपनी राजनीति शुरू की और 1991 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में नबाग्राम सीट से चुनाव लड़ा। मतदान के दौरान मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम-CPM) समर्थकों ने उन्हें निशाना बनाया। अधीर पहला चुनाव 1,401 वोटों से हार गए, परंतु अगले विधानसभा चुनाव 1996 में वे नबाग्राम सीट से जीतने में सफल रहे। कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 1999 में अधीर को बेरहामपुर संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया और अधीर यह सीट जीत कर पहली बार संसद पहुँचे। सफलताओं की सीढ़ियाँ चढ़ रहे अधीर को कांग्रेस ने मुर्शिदाबाद जिला अध्यक्ष बनाया। 1999 से 2003 के दौरान अधीर कई संसदीय समितियों में रहे। पश्चिम बंगाल में भी वामपंथियों के गढ़ के बीच अधीर का कद बढ़ रहा था और 2003 में अधीर के नेतृत्व में कांग्रेस ने 33 में से 23 जिला परिषद सीटें, 26 में से 13 पंचायत समितियों और मुर्शिदाबाद जिले की 254 में से 104 ग्राम परिषदों में जीत हासिल की।

मनमोहन सरकार में बने मंत्री

अधीर रंजन के बढ़ते कद को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने उन्हें 28 अक्टूबर, 2012 को प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के मंत्रिमंडल में रेल राज्य मंत्री बनाया। 10 फरवरी, 2014 को अधीर रंजन पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए गए। लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस ने अधीर रंजन चौधरी को बेरहामपुर सीट से टिकट दिया और टीएमसी और भाजपा की लहर के बावजूद वे यह सीट निकालने में सफल रहे। इसीलिए कांग्रेस ने अधीर रंजन चौधरी को लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता जैसी बड़ी जिम्मेदारी प्रदान की।

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