हांग कांग में हाहाकार : इस 23 साल के लड़के ने बाहुबली जिनपिंग को हिला दिया…

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* ग़र जोशुआ जैैसा जोश हो, तो उम्र मायने नहीं रखती

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 14 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। पूरी दुनिया से मायूस पाकिस्तान को उम्मीद थी कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के भारत के फ़ैसले के विरुद्ध उसे अपने परम् मित्र चीन का साथ मिलेगा। पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने तो बीजिंग से लौट कर इस्लामाबाद में बड़े-बड़े दावे भी किए, परंतु अगले ही दिन उनकी हवा निकल गई, जब उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का कोई साथ नहीं देगा।

अब क़ुरैशी को कौन समझाए कि जिस चीन से वे समर्थन की आस लगाए बैठे थे, वह खुद संकट में फँसा हुआ है। चीन जानता है कि यदि उसने भारत के आंतरिक मामले जम्मू-कश्मीर को लेकर तनिक भी दखल देने की कोशिश की, तो भारत ही नहीं, ब्रिटेन-अमेरिका सहित संयुक्त राष्ट्र भी हांग कांग में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर उसका गला पकड़ेंगे। राष्ट्रपति शी जिनपिंग हांग कांग (HONG KONG) की स्थिति से पूरी तरह ख़बरदार हैं और जानते हैं कि उनकी विस्तारवादी नीतियों ने हांग कांग की जनता में विद्रोह की ज्वाला भड़का रखी है।

चिरायु राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन को अमेरिका और रूस के समकक्ष दुनिया की महासत्ता बनाना चाहते हैं और उनकी इसी कुटिल नीति का शिकार कई देश बन रहे हैं, जो चीन के कर्ज के बोझ तले दबे होने के कारण कुछ बोल नहीं पा रहे, परंतु हांग कांग के लोग तथाकथित बाहूबली चीन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नीयत को अच्छी तरह जानते हैं और इसीलिए पिछले एक हफ्ते से हांग कांग में हाहाकार मचा हुआ है।

क्या है हांग कांग का इतिहास और क्यों मचा ताजा बवाल ?

150 वर्षों तक ब्रिटिश उपनिवेश रहा हांग कांग 1 जुलाई, 1997 से चीन का आधिकारिक अंग बन गया। ब्रिटेन-चीन के बीच हुई संप्रभुता हस्तांतरण संधि के अनुसार चीन एक जनवादी गणराज्य बना। ‘एक देश-दो प्रणाली’ के सिद्धांत पर चीन का अंग बने हांग कांग में विदेश व रक्षा मामलों पर ही चीनी सरकार का अधिकार है। अन्य सभी मामलों में हांग कांग स्वायत्त देश है, परंतु चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने पिछले 22 वर्षों में कई ऐसे फ़ैसले किए, जो हांग कांग की संप्रभुता को ख़तरे में डालने वाले रहे। इन फ़ैसलों के विरुद्ध हांग कांग के लोगों ने समय-समय पर आंदोलन छेड़े, जिनमें 2003 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून विरोधी आंदोलन, 2014 में अंब्रेला आंदोलन और 2015 में किताब विक्रेताओं पर निशाना आंदोलन शामिल हैं। इस बार हांग कांग का गुस्सा फूटा है चीन के एक अपराधी प्रत्यर्पण विधेयक (NON-SHELVED EXTRADITION BILL) के विरुद्ध। इस विधेयक में हांग कांग में अपराध करने वालों को चीन में लाकर मुकदमा चलाने का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक के विरोध में ही हांग कांग के लोग सड़कों पर उतर आए हैं और चीन सरकार के विरुद्ध जम कर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। यद्यपि चीन सरकार ने अब यह विधेयक वापस ले लिया, परंतु प्रदर्शनकारियों का चीनी विस्तारवादी नीति के विरुद्ध गुस्सा शांत नहीं हो रहा है।

कौन है जोशुआ, जिन्होंने जिनपिंग को हिला डाला ?

आप सोच रहे होंगे कि हांग कांग में जब इतने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, तो उनका कोई नेतृत्वकर्ता भी होगा। बिल्कुल है। इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है एक 23 वर्षीय दुबला-पतला लड़का, जिसने जिनपिंग को नाकों तले चने चबवा दिए। इस लड़के का नाम है जोशुआ वांग ची-फंग (JOSHUA WONG CHI-FUNG)। जैसे ही चीन सरकार ने अपराधी प्रत्यर्पण विधेयक प्रस्तुत किया, जोशुआ समर्थकों के साथ सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों की फौज ने महाशक्तिशाली चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कानों में ऐसी घुसपैठ की कि जिनपिंग तड़प उठे। इन प्रदर्शनकारियों के नेता जोशुआ वांग ची फंग हांग कांग की डोमेसिस्टो (DEMOSISTO) पार्टी से जुड़े हुए हैं। इतना ही नहीं, डोमेसिस्टो पार्टी के अधिकांश नेताओं की आयु 20 से 25 वर्षीय है। पार्टी के अग्रिम पंक्ति के प्रमुख नेताओं में जोशुआ के अतिरिक्त एग्नेश चॉ की आयु 22 वर्ष और नाथन लॉ की आयु 26 वर्ष है। जोशुो डेमोसिस्टो पार्टी के महासचिव हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने एक स्टुडेंट ग्रुप स्कॉलरिज़्म की स्थापना की थी। 2014 में 18 साल के जोशुआ ने पहली बार पूरी दुनिया का ध्यानाकर्षित किया, जब अंब्रेवा मूवमेंट में उन्होंने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। अंतरराष्ट्रीय पत्रिका टाइम ने 2014 में जोशुआ का नाम सबसे प्रभावशाली किशोरों में शामिल किया था। 2015 में फॉर्च्युन मैगज़ीन ने उन्हें ‘दुनिया के महानतम् नेताओं’ में शामिल किया। जोशुआ वर्ष 2018 में मात्र 22 साल की आयु में नोबेल पीस प्राइज़ के लिए भी नॉमिनेटेड हुए थे। जोशुआ को अगस्त-2017 में उनके दो साथी कार्यकर्ताओं के साथ जेल भेजा गया था। उन पर आरोप था कि 2014 में सिविक स्क्वेयर पर कब्जे में उनकी भूमिका थी। फिर 2018 में भी जोशुआ को 2014 के विरोध प्रदर्शन के मामले में गिरफ्तार किया गया।

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