कौन हैं बाजवा और क्यों भयभीत इमरान ने बढ़ाया उनका कार्यकाल ?

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विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 19 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। भारत ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 खत्म की है तब से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। इसमें भी भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह के पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) पर दिये गये बयान के बाद पाकिस्तान की नींद ही उड़ गई है। इसका परिणाम यह सामने आया है कि पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने अपने सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा का कार्यकाल खत्म होने के बाद नये सेना प्रमुख की नियुक्ति करने के बजाय बाजवा का ही कार्यकाल और 3 साल के लिये बढ़ा दिया है। पाकिस्तान ने बाजवा को ही रिपीट क्यों किया ? इसको लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, जिनमें से एक वजह यह भी मानी जा रही है कि अभी भारत और पाकिस्तान के बीच जिस तरह का तनाव का वातावरण है, ऐसे में पाकिस्तान किसी नये सेना प्रमुख को नियुक्त करने का रिस्क नहीं उठाना चाहता है और चूँकि बाजवा कश्मीर मामलों के गहन जानकार हैं, इसलिये वर्तमान में पाकिस्तान को बाजवा पर ही भरोसा करने में समझदारी दिखाई दे रही है।

कौन हैं पाक सेना के प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ?

दरअसल पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने नवंबर-2016 में क़मर जावेद बाजवा को पाकिस्तान का आर्मी चीफ बनाया था। पाक सेना प्रमुख के पद की अवधि 3 साल होती है। इसलिये बाजवा का कार्यकाल नवंबर-2019 में पूरा हो रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के कार्यालय ने सोमवार को एक परिपत्र जारी किया गया, जिसमें कहा गया है कि, ‘आर्मी चीफ जनरल क़मर जावेद बाजवा का कार्यकाल खत्म होने के दिन से उन्हें और 3 साल के लिये इस पद पर नियुक्त किया जाता है।’ जब बाजवा की आर्मी चीफ के पद पर नियुक्ति हुई, उससे पहले वह पाकिस्तानी सेना मुख्यालय (GHQ) में ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट विभाग के महानिरीक्षक (इंस्पेक्टर जनरल) थे। जनरल क़मर जावेद बाजवा पाकिस्तान के 16वें सेनाध्यक्ष हैं। बाजवा 1982 में पाकिस्तानी सेना की सिंध रेजिमेंट में कमीशन होकर पहुँचे थे। बाजवा को 2011 में हिलाल-ए-इम्तियाज़ से नवाजा जा चुका है। बाजवा ने पाकिस्तान की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण कॉर्प-10 का भी नेतृत्व किया है। यह कॉर्प पीओके में तैनात है। बाजवा को कश्मीर मामलों का लंबा अनुभव है और उनके दोबारा सेनाध्यक्ष चुने जाने का आधार भी यही माना जा रहा है। बाजवा ने कश्मीर तथा उत्तरी इलाकों में लंबे समय तक सेनाधिकारी के तौर पर सेवाएँ दी हैं, इसलिये उन्हें इन इलाकों की अच्छी जानकारी है। कांगो शांति मिशन के दौरान भी ब्रिगेडियर रहते हुए बाजवा ने सेवाएँ दी थी। पाकिस्तान कश्मीर और पीओके मामले में बाजवा की मदद लेने के लिये विवश है। क्योंकि बाजवा को उत्तरी इलाकों की अच्छी खासी समझ है, वह गिलगित और बालस्टिस्तान में फोर्स कमांडर की पोस्ट पर रह चुके हैं। पाकिस्तान बलूचिस्तान में विद्रोहियों से संघर्ष कर रहा है। ऐसे में बाजवा के सहारे वहाँ भी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। बाजवा बलोच रेजिमेंट में भी सेना अधिकारी रह चुके हैं। बाजवा को डार्क हॉर्स माना जाता है, क्योंकि उनका सम्बंध क्वेटा के इंफेन्ट्री स्कूल और बलोच रेजिमेंट से है। इसी रेजिमेंट से पूर्व सेना प्रमुख याह्या खान, जनरल असलम बेग और जनरल कियानी भी आगे बढ़े थे।

भारत से भयभीत हैं इमरान खान

इस परिपत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा के वर्तमान वातावरण को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक दिन पहले रविवार को हरियाणा में एक चुनावी सभा में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर जो बयान दिया था, उसने पाक पीएम इमरान खान की चिंता बढ़ा दी है। राजनाथ सिंह ने कहा था कि जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाना भारत का आंतरिक मामला है और पाकिस्तान से जब भी कोई बात होगी तो वह केवल पीओके को लेकर होगी। इस बयान ने पाकिस्तान में खलबली मचा दी है। इससे पहले पाकिस्तान भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के अगले कदम को लेकर चिंतित था और इमरान खान अपनी आशंका व्यक्त भी कर चुके थे कि भारत पीओके में बालाकोट की एयर स्ट्राइक से भी कुछ बड़ा करने की साजिश रच रहा है। राजनाथ सिंह के पीओके को लेकर दिये गये बयान ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ाने ‘आग में घी’ डालने वाला काम किया है। राजनाथ सिंह इससे पहले भारत के परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की नीति को लेकर भी ऐसा बयान दे चुके हैं, जिसने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। इस पर भी इमरान खान ट्वीट करके अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के समक्ष अपनी आशंका व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि भारत में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा आरएसएस की विचारधारा वाली पार्टी है, जिसकी विचारधारा जर्मनी के अत्याचारी नाज़ियों जैसी है। ऐसे में मोदी सरकार के हाथ में भारत के परमाणु शस्त्रागार का होना पाकिस्तान के लिये ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिये चिंता की बड़ी वजह है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मोदी को रोकने की अपील भी की थी।

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