जानिए कैसे पीएम मोदी ने 5 हजार कि.मी. दूर बैठे ज़ाकिर नाइक के मरोड़े कान ?

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रूस दौरे में मलेशिया के पीएम महातिर मोहम्मद से मिले मोदी

ज़ाकिर नाइक के प्रत्यर्पण पर की बातचीत

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 5 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का पूरी दुनिया में यूँ ही डंका नहीं बज रहा है। दुनिया के बड़े-बड़े देशों ने भी पीएम मोदी की बौद्धिक कुशलता का लोहा माना है और कई देशों ने उन्हें अपने देश के सर्वोच्च सम्मानों से नवाज़ा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे, इज़राइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू आदि ऐसे वैश्विक नेता हैं, जो पीएम मोदी से अत्यंत प्रभावित हैं। क्यों न हों, पीएम मोदी ने इन सभी पर ऐसा प्रभाव छोड़ा है कि वे पीएम मोदी की मित्रता के कायल हो गये हैं। मोदी कितनी दूर की सोचते हैं, इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि वे ‘कहीं पर निगाहें और कहीं पर निशाना’ लगाने में भी माहिर हैं। ऐसा ही देखने को मिला उनके दो दिन के रूस दौरे में, जब रूस के ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (ईईएफ) में भाग लेने पहुँचे पीएम मोदी ने मलेशिया में शरणागत भारत के भगोड़े ज़ाकिर नाइक को निशाना बनाया और रूस के व्लादिवोस्तोक शहर से 5,349 कि. मी. दूर मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में बैठे ज़ाकिर नाइक के कान मरोड़ दिये। पीएम मोदी ने इस फोरम में भाग लेने आए मलेशिया के पीएम महातिर मोहम्मद से मुलाकात की और उनसे भारत के भगोड़े इस्लामी उपदेशक ज़ाकिर नाइक को भारत के सुपुर्द किये जाने के मुद्दे पर बातचीत की।

कौन है ज़ाकिर नाइक ?

भारत का रहने वाला 53 वर्षीय इस्लामिक उपदेशक ज़ाकिर नाइक टेलीविज़न के माध्यम से मुसलमानों को उपदेश देता था, हालाँकि वह मुस्लिमों को धार्मिक उपदेश देने की बजाय कट्टरपंथी उपदेश देता था। पेशे से डॉक्टर ज़ाकिर नाइक ने लंबे समय तक चिकित्सा क्षेत्र में काम किया। 1987 में वह दक्षिण अफ्रीका के प्रसिद्ध उपदेशक मुनाज़िर अहमद दीदात से मिला और उनसे प्रभावित होकर उसने भी उपदेशक का मार्ग अपनाया। 4 साल बाद 1991 में उसने मुंबई में इस्लामिक रिसर्च फाउण्डेशन नामक संस्था स्थापित की। 2005 तक उसने जो उपदेश दिये वह देश और दुनिया में फैले। इसी बीच बांग्लादेश के ढाका में एक आतंकी हमला हुआ, जिसमें एक आतंकी के ज़ाकिर नाइक के भाषणों से प्रेरित होने का मामला सामने आया, तब ज़ाकिर नाइक की सच्चाई दुनिया के सामने आई कि वह इस्लामिक कट्टरपंथी उपदेशक है। इसलिये उसके विरुद्ध जाँच शुरू हुई, जिसमें उसकी संपत्ति आदि की भी पड़ताल की गई और उसकी इस्लामिक रिसर्च फाउण्डेशन पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। कार्यवाही से बचने के लिये ज़ाकिर नाइक मुस्लिम बहुल देश मलेशिया भाग गया, जहाँ उसे स्थाई रूप से रहने की अनुमति मिल गई। मलेशिया में भी वह अपनी हरकत से बाज़ नहीं आया और उसने मलेशिया के हिंदुओं तथा चीनी लोगों के विरुद्ध ऐसी टिप्पणियाँ की, जिससे वहाँ भी हर सार्वजनिक गतिविधि से उसे प्रतिबंधित कर दिया गया।

मोदी ने कैसे मरोड़े कान ?

भारत अक्सर मलेशिया से ज़ाकिर नाइक को भारत के हवाले करने की माँग करता आया है, परंतु मलेशिया की सरकार इस मामले में टाल-मटोल करती रही। अब जब रूस के व्लादिवोस्तोक में आयोजित हो रही ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में भारत और मलेशिया के पीएम शामिल हुए तो पीएम मोदी ने मलेशिया के 94 वर्षीय वयोवृद्ध पीएम महातिर मोहम्मद से मुलाकात की। विदेश सचिव विजय गोखले के अनुसार पीएम मोदी ने महातिर के साथ बैठक में ज़ाकिर नाइक के प्रत्यर्पण का मामला उठाया। बैठक में दोनों पक्षों ने फैसला किया है कि इस मामले पर अधिकारी एक-दूसरे के संपर्क में रहेंगे और इस मुद्दे पर चर्चा करके बातचीत को आगे बढ़ाएँगे। बैठक में पीएम मोदी ने जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन, वैश्विक आतंकवाद, भारत मलेशिया व्यापारिक संबंध बढ़ाने पर भी चर्चा की। गोखले के अनुसार महातिर ने स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ रहा है, जिसमें मलेशिया का हिस्सा अधिक है। उन्होंने पीएम मोदी को भरोसा दिलाया कि मलेशिया भी भारत से आयात बढ़ाने पर विचार करेगा, ताकि मलेशिया में भारत का निर्यात बढ़े। गोखले ने बैठक सफल रहने का दावा करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने भी महातिर को भरोसा दिलाया कि भारत मलेशिया के साथ मिलकर काम करने के लिये उत्साहित है।

पाकिस्तान ने फिर कराई किरकिरी

उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी के महातिर से मिलने के कुछ घण्टे बाद पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने भी महातिर से फोन पर बात की और कश्मीर मामले में उनका सहयोग माँगा। इस पर महातिर ने सिर्फ इतना कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत और पाकिस्तान तनाव को कम करने के लिये संयम से काम लेंगे। उधर पाकिस्तान को इसी मुद्दे पर संयुक्त अरब अमीरात यूएई से करारा झटका लगा। यूएई ने साफ-साफ शब्दों में पाकिस्तान से कह दिया है कि वह कश्मीर मामले में इस्लामिक देशों को न घसीटे। दरअसल सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री अदेल बिन अहमद अल ज़ुबैर और यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बुधवार को एक दिन के पाकिस्तान दौरे पर इस्लामाबाद आए तो पाकिस्तान ने कश्मीर मामले में उनसे समर्थन की उम्मीदें बाँध ली थी, हालाँकि कुछ घण्टों के दौरे में ही पाकिस्तान को जवाब मिल गया और उसकी उम्मीदों को झटका लगा। यूएई ने कश्मीर पर अपना रुख साफ कर दिया।

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