‘आपने मुसलमानों के लिए क्या किया ?’ मोदी का उत्तर सुन सन्न रह गई थी सच्चर समिति !

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विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े और देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुँचे नरेन्द्र मोदी की विचारधारा ही उन्हें देश के अन्य मतलोलुप राजनेताओं से अलग बनाती है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूरब से लेकर पश्चिम तक कांग्रेस सहित सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दल लोगों का वोट पाने के लिए तरह-तरह की युक्तियाँ आज़माते हैं, जिनमें एक सबसे पुरानी परम्परागत नीति है अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण की नीति। मुसलमानों के वोट पाने के लिए कांग्रेस स्वतंत्रता के बाद से ही तरह-तरह के हथकंडे अपनाती रही है और आज के दौर में भी यह क्रम जारी है।

कहीं मुसलमानों को आरक्षण की रेवड़ियाँ बाँटी जा रही हैं, तो कहीं विशेष रूप से मुसलमानों के लिए सरकार में विभाग हैं, विशेष रूप से मुसलमानों के लिए योजनाएँ चलाई जा रही हैं, परंतु नरेन्द्र मोदी की सोच भारत और भारतीयों पर आधारित है। भारतीय जनता पार्टी की स्थापना 1980 में हुई और मोदी ने 1985 में संघ से भाजपा में प्रवेश किया। 1985 से लेकर 6 अक्टूबर, 2001 तक मोदी ने संगठन में ही काम किया। इसलिए अब तक उन्हें विधायक बनने, विधानसभा में विपक्ष का नेता बनने, सरकार में मंत्री बनने जैसे कोई अवसर नहीं मिले थे और न ही भारत और भारतीयों के लिए एक जनप्रतिनिधि के रूप में कुछ करने का अवसर मिला था।

परंतु गुजरात में भाजपा की मजबूत नींव डालने वाले नरेन्द्र मोदी को अटल बिहारी वाजपेयी ने अचानक गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय किया और मोदी ने 7 अक्टूबर, 2001 को पहली बार बिना जनप्रतिनिधि बने सीधे मुख्यमंत्री का पद हासिल किया। मोदी एक सीधी सोच के साथ गुजरात का कुशल शासन चला रहे थे कि तभी गोधरा कांड और उसके बाद भड़के दंगों ने उन्हें सवालों के घेरे में ला खड़ा किया। गुजरात और पूरे देश में यह संदेश गया कि मोदी हिन्दूवादी नेता हैं और उनके नेतृत्व में गुजरात में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं, परंतु गोधरा कांड के आलोक में हुए दंगों के बाद गुजरात मोदी के शासन में 2014 तक एक शांतिपूर्ण और विकासपरस्त राज्य बन कर उभरा, जिस दौरान गुजरात में कोई भी बड़ा साम्प्रदायिक दंगा नहीं हुआ और यह सिद्ध हुआ कि मोदी के शासन में गुजरात में सभी धर्मों-जातियों के लोग सुरक्षित थे।

‘मैं मुसलमानों के लिए कुछ नहीं करता, हर नागरिक के लिए करता हूँ’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में अपनी भारत और भारतीयता वाली सोच को पुराने अनुभव के आधार पर साझा किया। इस साक्षात्कार में सवाल किया गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का हिन्दुस्तान के मुसलमानों से क्या रिश्ता है ? मोदी ने उत्तर दिया, ‘मैं एक अनुभव बताता हूँ। मनमोहन सिंह की सरकार ने अल्पसंख्यकों के हितों पर अध्ययन के लिए एक सच्चर समिति बनाई थी। वो सच्चर समिति जब गुजरात आई थी, तब मैं मुख्यमंत्री था। सच्चर समिति के सारे सदस्य और मेरी सरकार के अधिकारी बैठे थे ओर समिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही थी। उन्होंने (समिति सदस्यों ने) मुझसे प्रश्न पूछा कि मोदी जी आपकी सरकार ने मुसलमानों के लिए क्या किया ? मैंने उन्हें जवाब दिया कि मेरी सरकार ने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया है और कुछ भी नहीं करेगी। मेरी सरकार ने हिन्दुओं के लिए भी कुछ नहीं किया है और न ही कुछ करेगी भी। मेरी सरकार गुजरात के सभी नागरिकों के लिए काम करती है और काम करेगी। मेरा मंत्र है सबका साथ, सबका विकास।’

‘किसी गाँव-शहर में कोई सुविधा पहुँचती है, तो हर व्यक्ति को लाभ होता है, फिर वह हिन्दू हो या मुसलमान’

पीएम मोदी ने इस इंटरव्यू में अपनी इस सोच पर तर्क देते हुए कहा, जब मैं कहता हूँ कि 2022 तक देश का एक भी परिवार पक्के घर से वंचित नहीं रहेगा, तो क्या मुझे यह कहने की ज़रूरत है कि मैं मुसलमानों के लिए भी पक्का घर बनवाऊँगा ? यादव मिले, तो उसे भी कहूँ कि तुम्हारा पक्का घर बनवाऊँगा ? दलित मिले, तो उसे भी कहूँ ? जब मैं कहता हूँ कि मैं देश के हर परिवार को बिजली दूँगा। मैं कहता हूँ कि देश के बिजली से वंचित 18 जार गाँवों में बिजली पहुँचाऊँगा और मैंने पहुँचा भी दी। फिर मुझे यह कहने की आवश्यकता है कि मैंने इतने मुसलमानों को बिजली दी। जब बिजली से वंचित गाँव में बिजली पहुँचेगी, तो वहाँ रहने वाले हर धर्म और जाति के लोगों को बिजली पहुँचेगी। शासक का यह काम है कि इस तरह के अलगाववादी विचारों से मुक्त होना चाहिए। देश को एक इकाई (यूनिट) के रूप में देखना चाहिए। मेरी सभी योजनाएँ सबका साथ सबका विकास मंत्र को लेकर चल रही हैं।’

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