ब्रज नारियों ने संभाले लठ… ब्रज में लठमार होली की धूम मची

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Lathmar Holi Barsana

नई दिल्ली: ब्रज की लाठमार होली विश्वप्रसिद है। पूरे भारत में होली के रंग भले ही 2 मार्च के बाद आये लेकिन ब्रज में होली तो एक हफ्ते पहले से ही मनाई जा रही है। यहां के वातवरण अबीर और गुलाल चारों ओर बिखर रहा है। ब्रज में चोरों ओर होली के रंग और होली के गानों की धूम मच रहीं है। यहां के होली (Lathmar Holi Barsana) को देखने के लिए विश्व के कोने कोने से लोग आते है तथा होली का आनंद लेते हैं।

बरसाने के होली का रंग (Lathmar Holi Barsana)

बरसाने में होली का रंग इतना अधिक बरसता है कि देश के विभिन्न भागों से लोग यहां पर होली देखने और खेलने आते हैं। यहां की लठमर होली बहुत अधिक प्रसिद है। देश में भले ही होली की खुमार अपने चरम सीमा पर न चढ़ा हो पर ब्रज में होली की खुमार तो अपने शबाब पर है। यहां की होली भी ऐसी है कि लाठी खाने में भी मजा आता है। यह लठमार होली में जमकर हुल्लड़बाजी चल रहीं है।

लठमार होली का कार्यक्रम

लठमार होली (Lathmar Holi Barsana) की शुरूआत नवमी के दिन राधारानी के बुलावे पर नंदगांव के हुरियार जहां बरसाने में होली खेलने के लिए जाते हैं वहीं दूसरी ओर दशमी के दिन हुरियार नंदगांव के हुरियारिनों के साथ होली खेलने के लिए नंदगांव आते हैं। यहां के चौक पर होली के गाने के साथ लठमार होली का कार्यक्रम होता है। नंदगांव के टोलियां जब अपनी पिचकारियों को लेकर होली खेलने के लिए बरसाने पहुंचते हैं तो उन पर बरसाने के महिलाएं खूब लाठियां बरसाती हैं। कहते हैं कि परुषों को इन लाठियों से बचना होता है और पुरुषों को महिलाओं को रंग से भिगोना रहता है। बरसाने और नंदगांव के लोगों का विश्वास है कि लठमार होली से लोगों को चोट नहीं लगती और अगर थोड़ा बहुत लग भी जाती है तो लोग घाव पर मिट्टी मलकर दूबारा से होली खेलने लग जाते हैं। इस कार्यक्रम के साथ नाच गाना और ठंडाई तथा भांग पीने का भी खूब इंतेजाम भी होता है।

Lathmar Holi in Barsana

जैसे ही लठमार होली की शुरूआत होती है ब्रज की गलियों में रसिया के स्वर गूंज उठते हैं –

फाग खेलने बरसाने आयो…

होरी खेनल आयो श्याम, आज याहि रंग में बोरी री…

नैनन में पिचकारी दई मोय गारी दई होरी खेली न जाय…

लठमार होली (Lathmar Holi Barsana) में लोग बहुत अधिक आनंदित होते हैं। यहां पर होली का रंग इतना अधिक चढ़ता है कि लोग खुशी में झुम उठते हैं तथा इसके साथ दर्शक भी खुब आनंदित होते हैं। यहां के होली को जो एक बार देखने आता है दूसरी बार वह जरूर यहां होली को देखने और खेलने आता है इसलिए यहां पर दर्शकों में साल दर साल बढोत्तरी होती जा रही हैं।

लठमार होली के लिए निमंत्रण

ब्रज की होली की खास बात यह है कि ग्वाले बरसाने या नंदगांव में होली खेलने यू ही नहीं जाते बल्कि इसके लिए उन्हे बकायदा निमत्रण दिया जाता है। राधारानी की सखियां परम्परागत तरीके से नंदगांव के कान्हा को होली खेलने के लिए हांडी में गुलाल, मठरी, पुआ, इत्र और मिठाई लेकर निमंत्रण देने नंदभवन पहुंचती है। वहां पर होली का निमत्रंण स्वीकार करते हुए लोगों को जानकारी दी जाती है कि नंदभवन पहुंचिएं होली खेलने के लिए।

Lathmar Holi Barsana खेलने से पहले शाम को बरसाने में लड्डुओं की होली होती है। लोग मंदिर के परिसर में नाच गाने के साथ एक-दूसरे को लड्डू से मारते हैं और होली खेलते हैं। लड्डुओं के इस होली को देखने के लिए देश विदेश से लोग यहां पर आते है।

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