EXCLUSIVE : कुछ भी कह लो, मगर 136 करोड़ भारतीयों में ‘भारत’ तो एक ही है…

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आलेख : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 24 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। विश्व की जनसंख्या की क्षण-क्षण गणना करने वाली वेबसाइट WORLDMETERS के अनुसार आज 24 जुलाई, 2019 बुधवार को भारत की अनुमानित जनसंख्या 1,36,95,39,072 यानी 1 अरब 36 करोड़ 95 लाख 39 हजार 72 यानी 136 करोड़ से अधिक है। यह आँकड़ा क्षण-क्षण बढ़ता जा रहा है। कुल मिला कर आज की तारीख़ में भारत के नागरिक यानी भारतीयों की संख्या 136 करोड़ है। वैसे आधुनिक भारत के लोगों में स्वयं को भारतीय की तुलना में INDIANS कहने का प्रचलन अधिक प्रचलित है।

परंतु आपको जान कर आश्चर्य होगा कि भारतीयों यानी इंडियन्स की 136 करोड़ से अधिक जनसंख्या में यदि कोई किसी को ‘भारत’ कह कर पुकारे या ‘भारत’ नाम का उल्लेख करे, तो प्रत्येक भारतीय नागरिक के चित्त से एक ही नाम जिह्वा पर आएगा और वह नाम है मनोज कुमार का। यहाँ तक कि जिस भारतीय नागरिक का अपना स्वयं का नाम भी भारत होगा, तो भी ‘भारत’ की बात आने भारत नाम धारी उस भारतीय के होठों पर उसी मनोज कुमार का नाम आएगा, जो भारत की बात सुनाता है।

जी हाँ। हम मनोज कुमार उर्फ भारत कुमार को इसलिए याद कर रहे हैं, क्योंकि आज इस भारत कुमार का 82वाँ जन्म दिवस है। भारतीय फिल्म इण्डस्ट्री यानी BOLLYWOOD में 1940 में आई बंधन से लेकर 2019 में रिलीज़ हुई भारत तक अनेक देशभक्ति फिल्में बनीं, जिन्होंने प्रत्येक भारतीय के हृदय में शांत पड़ती जा रही देशभक्ति की लौ को बार-बार प्रज्ज्वलित किया, परंतु सैकड़ों देशभक्ति की फिल्मों, उन्हें बनाने वालों, उनके मुख्य अभिनेताओं में किसी को भी ‘भारत कुमार’ नाम की उपाधि नहीं मिली। यह उपाधि केवल और केवल मनोज कुमार को मिली। हिन्दी सिनेमा में एक दौर ऐसा भी आया जब मनोज कुमार और भारत एक-दूसरे का पर्याय बन गए।

हरिकिशन गोस्वामी कैसे बन गया मनोज कुमार ?

भारतीय जनसमुदाय में विशेषकर हिन्दू धर्म के अनुयायियों में लड़के का नाम भरत रखने की परम्परा तो महाभारतकालीन राजा भरत के युग से चली आ रही थी, परंतु मनोज कुमार जब ‘भारत’ के रूप में उभरे, तो कई लोगों ने अपने बच्चों के नाम भारत रखना आरंभ कर दिया। वैसे मनोज कुमार का मूल नाम हरिकिशन गोस्वामी है। 24 जुलाई, 1937 को तत्कालीन अखंड भारत के एबटाबाद (अब पाकिस्तान) में जन्मे हरिकिशन पर फिल्मों का शौक बचपन से सवार था। इसी बीच देश का बँटवारा हुआ। उस समय हरिकिशन गोस्वामी की आयु मात्र 10 वर्ष की थी। उनका परिवार एबटाबाद छोड़ दिल्ली आ गया और विजयनगर किंग्सवे कैम्प में शरणार्थियों के रूप में रहा। बाद में नई दिल्ली के पुराने राजेन्द्र नगर इलाके में उनका परिवार बस गया। अपने स्कूल के दिनों में वे ख़ूब फिल्में देखा करते थे। इसी दौरान 22 अप्रैल, 1949 को भारतीय सिनेमा के तत्कालीन अभिनय सम्राट दिलीप कुमार की फिल्म शबनम रिलीज़ हुई। उस दौर में हरिकिशन दिलीप कुमार के फैन हुआ करते थे। फिल्म में दिलीप कुमार का नाम मनोज कुमार था। हरिकिशन दिलीप कुमार को अपना आदर्श मानते थे। हरिकिशन ने शबनम फिल्म देखी और इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने अपना नाम हरिकिशन गोस्वामी से बदल कर मनोज कुमार रख लिया।

एक ‘भिखारी’ को ‘मालामाल’ बना गई हरियाली और रास्ता !

विभाजन के बाद भारत में आ बसे मनोज कुमार ने हिन्दू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद फिल्में देखने के शौक़ीन मनोज कुमार ने कोई नौकरी-धंधा करने का नहीं, अपितु फिल्म उद्योग में प्रवेश करने का निर्णय किया। उस दौर में फिल्मों में काम आसानी से मिल जाया करता था। मुंबई आए मनोज कुमार को पहली बार 1957 में बनी फिल्म फैशन में अभिनय करने का अवसर मिला। इस फिल्म में उन्होंने एक भिखारी का अत्यंत छोटा-सा रोल किया, परंतु मुख्य अभिनेता के रूप में उनकी पहली फिल्म काँच की गुड़िया (1960) थी, जिसमें उनके अपॉज़िट थीं साइदा ख़ान। इसके बाद मनोज कुमार ने पिया मिलन की आस और रेशमी रूमाल में भी काम किया, परंतु उन्हें पहली बड़ी सफलता मिली निर्माता-निर्देशक विजय भट्ट की क्लासिक फिल्म हरियाली और रास्ता (1962) से, जिसमें उनके अपॉज़िट थीं तत्कालीन दौर की स्टार अभिनेत्री माला सिन्हा। दोनों की जोड़ी को दर्शकों ने बहुत पसंद किया। फिर मनोज कुमार ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और वो कौन थी (1964), गुमनाम (1965) और हिमालय की गोद में (1965) मनोज कुमार को रातों-रात स्टार बना दिया।

और इस तरह मनोज कुमार बन गए ‘भारत’

अब तक मनोज कुमार बॉलीवुड में केवल मनोज कुमार के नाम से ही प्रसिद्ध थे, परंतु 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म शहीद ने उनके फिल्मी कैरियर को नया मोड़ दे दिया। मनोज कुमार की देशभक्ति से लबरेज यह पहली फिल्म थी, जिसमें उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की भूमिका निभाई थी। वर्ष 1965 भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। इसी काल में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इस युद्ध के बाद जय जवान जय किसान का नारा दिया था। शास्त्री ने ही मनोज कुमार को इस नारे पर आधारित फिल्म बनाने को कहा। प्रधानमंत्री के सुझाव पर 1967 में मनोज कुमार ने अपने निर्देशन वाली पहली फिल्म उपकार बनाई, जिसमें उन्होंने एक सैनिक और एक किसान का रोल अदा किया। फिल्म उपकार में ही मनोज कुमार ने पहली बार अपने किरदार का नाम भारत रखा। किसान और जवान दोनों के ही रोल में मनोज कुमार ने फिल्म में देशभक्ति की लौ जलाई कि बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म सुपर हिट सिद्ध हुई। फिल्म के सभी गाने हिट रहे, परंतु ‘मेरे देश की धरती सोना उगले…’ गीत ने भारत के किसानों का सीना गौरव से चौड़ा कर दिया। फिल्म उपकार के लिए मनोज कुमार को बेस्ट डायरेक्टर के फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित भी किया गया। उपकार के साथ ही मनोज कुमार फिल्म इण्डस्ट्री ही नहीं, अपितु पूरे देश में भारत कुमार के नाम से प्रसिद्ध हो गए। इसके बाद भी मनोज कुमार ने पूरब और पश्चिम (1970) में भी वे भारत के रोल में नज़र आए। फिल्म में मनोज कुमार सचमुच पश्चिमी दुनिया के समक्ष भारत देश का प्रतिनिधित्व करते नज़र आए। फिल्म का गीत ‘भारत का रहने वाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ…’ आज भी लोगों के जेहन देशभक्ति की आग प्रज्ज्वलित कर देता है। फिल्म क्रांति में भी मनोज कुमार का नाम भारत ही था।

जब अमिताभ बच्चन का सहारा बना ‘भारत’ !

बॉलीवुड में जब मनोज कुमार सफलता की बुलंदियों पर थे, उस दौर में आज सदी के महानायक के रूप में विख्यात बिग बी अमिताभ बच्चन संघर्ष कर रहे थे। पहली फिल्म सात हिन्दुस्तानी को बड़ी विफलता मिलने के बाद अमिताभ ने दिल्ली में अपने माता-पिता के पास लौट जाने का निश्चय कर लिया था, तभी अभिनेता के साथ-साथ निर्माता-निर्देशक बन चुके मनोज कुमार ने अमिताभ को दिल्ली जाने से रोक लिया। मनोज कुमार ने अमिताभ बच्चन को ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ फिल्म में काम करने का अवसर दिया। इस फिल्म में भी भारत के रूप में नज़र आए मनोज कुमार ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, ‘जब लोग अमिताभ को विफलता की वजह से ताने दे रहे थे, तब भी मुझे उन पर पूरा भरोसा था कि वे एक दिन बहुत बड़े स्टार बनेंगे।’ आगे चल कर मनोज कुमार की यह बात सही सिद्ध हुई, जब अमिताभ ने जंज़ीर फिल्म के जरिए फिल्म इण्डस्ट्री में धूम मचा दी और तत्कालीन सुपरस्टार राजेश खन्ना को पछाड़ कर नए एंग्रीमैन और नए सुपरस्टार के रूप में उभरे।

जब भगत सिंह की माँ की गोद में सिर रखने का सौभाग्य मिला

मनोज कुमार को देशभक्ति फिल्मों का सरताज बनाने वाली फिल्म शहीद थी, जिसमें उन्होंने शहीद भगत सिंह का रोल अदा किया था। इस रोल में शहीद भगत सिंह की आत्मा को भरने के लिए मनोज कुमार ने फिल्म बनाने से पहले भगत सिंह की माँ विद्यावती से भेंट की थी। वर्ष 2002 में मनोज कुमार ने अपने एक लेख में कहा था, ‘‘हमने फिल्म की मेकिंग के दौरान चंडीगढ़ में भगत सिंह की माँ और उनके भाइयों से मुलाकात की। तब उनकी माँ को अस्पताल में भर्ती किया गया था। वहीं पर हमारी मुलाकात बटुकेश्वर दत्त (भगत सिंह के साथी क्रांतिकारी) से भी हुई। भगत सिंह के भाई कुलतार सिंह मुझे भगत सिंह की माँ के पास ले गए थे और मुझे माँ से मिलवाते हुए पूछा था, ‘माँ, ये हमारे भाई (भगत सिंह) की तरह नहीं दिखते ?’ इस पर भगत सिंह की माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘काफी हद तक।’ इसी दौरान मुझे भगत सिंह की माँ की गोद में सिर रखने का सौभाग्य मिला था।’

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