गुजरात में एक गाँव, जहाँ चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध है, परंतु हर मतदाता करता है VOTE : पढ़िए आश्चर्य में डाल देने वाली रिपोर्ट

देश में लोक सभा चुनाव हो रहे हैं, सात चरणों में चुनाव होने वाले हैं, दो चरणों में मतदान सम्पन्न हो चुका है। पहले चरण में 11 अप्रैल को 20 राज्यों की 97 सीटों पर 69.4 प्रतिशत और दूसरे चरण में 18 अप्रैल को 12 राज्यों की 95 सीटों पर 66 प्रतिशत मतदान हुआ। इस प्रकार दोनों ही चरणों में 30 और 34 प्रतिशत लोगों ने वोट नहीं डाले। ऐसे मतदाता जो मतदान नहीं करते और गुजरात के लोग भी ऐसे मतदाताओं में शामिल हैं, उन्हें गुजरात के ही एक गाँव से प्रेरणा लेने की जरूरत है।

लोकसभा चुनाव 2019 में तीसरे चरण में 23 अप्रैल को 16 राज्यों की 117 सीटों के लिये मतदान होने वाला है। इनमें गुजरात की भी सभी 26 सीटों पर मतदान होगा, जिसके लिये रविवार शाम को चुनाव प्रचार शांत हो गया। चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों के नेताओं ने गाँव-गाँव जाकर प्रचार किया, परंतु गुजरात का एक गाँव ऐसा भी है, जहाँ प्रचारकों के प्रवेश पर प्रतिबंध है।

हम गुजरात के एक ऐसे गाँव की बात कर रहे हैं, जिसने मतदान करने के मामले में एक आदर्श प्रस्तुत किया है। इस गाँव में हमेशा मतदान के दिन गाँव में मौजूद सभी मतदाता मतदान करते हैं और यदि कोई मतदान नहीं करता है तो उस पर जुर्माना लगाया जाता है। इस गाँव में चुनाव प्रचार करने पर भी पाबंदी है, क्योंकि ग्रामजनों का मानना है कि इससे गाँव का माहौल बिगड़ता है। प्रचार से लोगों में राजनीतिक दलों की विचारधारा को लेकर मतभेद हो जाते हैं और टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है। इसलिये गाँव में किसी को भी प्रचार करने की अनुमति नहीं दी जाती है।

हम बात कर रहे हैं गुजरात के राजकोट जिले राजसमढियाळा गाँव की। राजसमढियाळा गाँव ने मतदान के मामले में देश भर के मतदाताओं के लिये आदर्श प्रस्तुत किया है। गाँव के लोग मतदान के प्रति न सिर्फ जागरुक हैं, बल्कि पूरी तरह से सजग है। गाँव के सरपंच अशोकभाई वाघेरा के अनुसार गाँव में चुनाव प्रचार करने पर प्रतिबंध है, ताकि गाँव का सौहार्दपूर्ण वातावरण किसी भी तरह से खराब न हो। गाँव के लोगों का भी यही मानना है कि मतदान पर पाबंदी का उद्देश्य यही है कि लोग राजनीतिक मतभेदों के कारण आपसी सौहार्द को न बिगाड़ लें।

राजसमढियाळा गाँव के सरपंच अशोकभाई के अनुसार इस गाँव में जब भी मतदान होता है, तो 100 प्रतिशत लोग मतदान करते हैं। हालाँकि मतदाता सूची में कुछ ऐसे लोगों के नाम भी होते हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी होती है या कुछ ऐसी लड़कियों के नाम होते हैं, जिनकी शादियाँ हो चुकी होती हैं। इसलिये मतदान प्रतिशत 95-96 प्रतिशत दर्ज होता है। गाँव के सभी लोग मतदान करें, इसके लिये गाँव ने एक आदर्श प्रथा शुरू की है, जिसके अनुसार मतदान करने में लापरवाही बरतने वाले से 51 रुपये जुर्माना वसूल किया जाता है। जुर्माने से बचने के लिये प्रत्येक मतदाता मतदान अवश्य करता है।

राजसमढियाळा गाँव एक और विशेषता के लिये भी जाना जाता है। इस गाँव में किसी भी घर या दुकान में ताला नहीं लगाया जाता है। इस प्रकार यह गाँव अन्य गाँवों तथा मतदाताओं के लिये एक आदर्श गाँव है।

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