हरियाणा : ‘9 प्रतिशत’ ने बीच भँवर में फँसाई मनोहरलाल खट्टर की नैया ?

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 24 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 के लिए हुए मतदान की मतगणना से मिल रहे रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) को बहुत बड़ा झटका दिखाई दे रहा है। भाजपा ने इस बार के चुनाव में ‘अबकी बार-75 पार’ का नारा दिया था, परंतु चुनाव परिणामों में भाजपा इस लक्ष्य से कोसों दूर दिखाई दे रही है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि भाजपा के पास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, धारा 370 सहित राष्ट्रवाद के मुद्दे, मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के अच्छे कार्य जैसे अनेक मुद्दे थे, इसके बावजूद पार्टी को अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं मिला ?

इस प्रश्न का उत्तर छिपा है ‘9 प्रतिशत’ में। जी हाँ, इस 9 प्रतिशत से तात्पर्य है, वो मतदाता, जिन्होंने 21 अक्टूबर को मतदान करने में आलस्य दिखाया, जबकि पाँच वर्ष पूर्व 2014 के चुनाव में बढ़-चढ़ कर मतदान में भाग लिया था। दरअसल हरियाणा विधानसभा चुनाव 2014 में 76.6 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार मतदान में लगभग 9 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। राजनीतिक विश्लेषकों और आम धारणा के अनुसार मतदान में कमी सामान्यत: भाजपा के लिए हानिकारक साबित होती है। जब भी मतदान प्रतिशत में गिरावट आती है, तो यह माना जाता है कि भाजपा के परम्परागत मतदाता वोट डालने घरों से नहीं निकले। हरियाणा में भी कुछ यही हुआ है, जिसके चलते मनोहरलाल खट्टर की नैया बीच भँवर में फँस गई। मतदान प्रतिशत किसी भी चुनाव परिणाम पर सीधा प्रभाव डालता है। यही कारण है कि लोकसभा चुनाव 2019 में जहाँ हरियाणा में 74.3 प्रतिशत मतदान हुआ था और भाजपा को राज्य की सभी 10 सीटों पर जीत मिली थी, परंतु विधानसभा चुनाव 2019 में हरियाणा की जनता ने 2014 के विधानसभा ही नहीं, अपितु 2019 के लोकसभा चुनाव के मुक़ाबले भी कम वोट डाले, जिससे भाजपा को बड़ा झटका लगा और उसे बहुमत के लाले पड़ गए।0

कांग्रेस के उभार का कोई कारण नहीं

हरियाणा में कांग्रेस अचानक उभार पर दिखाई दे रही है। रुझानों में जहाँ भाजपा 41 सीटों पर आगे चल रही है, वहीं कांग्रेस लगभग 30 सीटों पर आगे चल रही है, परंतु सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भाजपा को लगे झटके के पीछे तो कम मतदान कारण हो सकता है, परंतु कांग्रेस के उभार के पीछे कोई बड़ा कारण दिखाई नहीं देता। राजनीतिक विश्लेषक चुनावों की घोषणा से लेकर 21 अक्टूबर को मतदान व एग्ज़िट पोल आने तक यह कह रहे थे कि हरियाणा कांग्रेस चुनावी समर जीतने के लिए कोई बड़ी रणनीति के साथ मैदान में नहीं उतरी थी। कांग्रेस के पास न तो केन्द्र की मोदी सरकार और न ही राज्य की खट्टर सरकार के विरुद्ध कोई बड़ा मुद्दा था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी या पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी अपनी रैलियों में कोई विशेष प्रभाव नहीं छोड़ पाए थे। हाँ, कांग्रेस ने अंतिम समय में पूर्व मुख्यमंत्री भूपिन्दर सिंह हुड्डा को मैदान में उतार कर जरूर बड़ा दाव खेला था। कदाचित इसी के चलते कांग्रेस बड़ी ताकत बन कर उभरने में सफल रही है।

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