‘पुण्यशाली दंड’ : हर अदालत ऐसी सजा सुनाए, तो पर्यावरण संरक्षण अभियान की आवश्यकता ही न रहे !

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

जबलपुर 1 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। यदि देश की हर अदालत मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (HC) की तरह दोषियों को सजा सुनाने लगे, तो देश में पर्यावरण संरक्षण अभियान की आवश्यकता ही नहीं रह जाएगी। एमपी हाई कोर्ट ने अदालती अवमानना के एक दोषी सरकारी इंजीनियर को ऐसी सजा सुनाई है, जिसे काटते हुए अपराधी न केवल अपना दंड भुगत लेगा, अपितु पुण्य भी कमा सकेगा।

दरअसल जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक सरकारी इंजीनियर को अदालती अवमानना को दोषी पाया और उसे दंड के रूप में 200 पौधे लगाने का आदेश दिया। हाई कोर्ट ने साथ ही इन पौधों की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए यह शर्त भी रखी कि 200 में से सभी 200 पौधे जीवित रहने चाहिए, अन्यथा उन्हें तीन साल की जेल हो जाएगी। यदि कम से कम 160 पौधे ही जीवित रखने में अपराधी सफल रहते हैं, तो उन्हें एक माह एक माह का कारावास भुगतना होगा।

न्यायाधीश जे. के. माहेश्वरी और अंजुली पालो की युगल पीठ ने यह अनोखी सजा सुनाई है मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के ग्वालियर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता एस. के अंधवान को। अंधवान को अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित दायर याचिका के दौरान अदालत में उपस्थित न रहने के बाद अदालती अवमानना का दोषी करार दिया गया और 15 दिनों के भीतर 200 पौधे लगाने तथा उनकी 3 वर्षों तक देखभाल करने का आदेश दिया। यदि इन पौधों में से 80 प्रतिशत यानी 160 पौधे जीवित रहते हैं, तो उन्हें एक माह की सजा भुगतनी होगी। अदालती आदेश से तात्पर्य यह निकलता है यदि सभी पौधे जीवित रहते हैं, तो य़अपराधी अंधवान तीन साल के कारावास से बच जाएँगे।

क्या है पूरा मामला ?

टीकमगढ़ जिले के निवाशी आशीष अवस्थी के पिता ओम प्रकाश अवस्थी पीएचई में पदस्थ थे। सेवाकाल के दौरान ओम प्रकाश की 2014 में मृत्यु हो गई। पीएचई विभाग ने 2016 में ओम प्रकाश के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने के आदेश दिए। इसके बाद ओम प्रकाश के पुत्र आशीष अवस्थी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए 2017 में आवेदन किया। आशीष के वकील शैलेष मिश्रा के अनुसार आशीष का आवेदन निरस्त कर दिया गया। पीएचई विभाग के इसी निर्णय को आशीष ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने याचिका निरस्त कर दी, तो आशीष ने युगल पीठ के समक्ष याचिका दायर की। युगल पीठ ने विभागीय अधिकारी को निर्देश दिया कि वे आशीष को आवेदन तिथि के आधार पर नियुक्ति का लाभ दें। इसके बाद भी संबंधित अधिकारियों ने आशीष का आवेदन ठुकरा दिया। इस पर गत 8 जुलाई को हाई कोर्ट की युगल पीठ ने पीएचई विभाग के मुख्य अभियंता (CE) एस. के. अंधवान को अदालती अवमानना का दोषी ठहराया। यद्यपि मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अंधवान ने हाई कोर्ट में उपस्थित होकर बताया कि आशीष को अनुकंपा नियुक्ति दे दी गई, परंतु युगल पीठ ने अंधवान को पूर्व में दिए गए आदेश की अवमानना का दोषी ठहराया और 200 पोधे लगाने ‘पुण्यशाली’ दंड दिया।

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