लाट साहब नहीं, कूड़ा कलेक्टर : IAS-IPS बन कर ‘जमाई-कमाई’ का सपना देखने वालों को सार्थक राह दिखा रहे हैं कौशलेन्द्र विक्रम सिंह !

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विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 25 जून, 2019 (युवाप्रेस.कॉम)। अक्सर लोगों में सरकारी नौकरी पाने की जबर्दश्त लालसा होती है। सरकारी नौकरी पाने के लिए लोग दिन-रात एक करके पढ़ाई-अभ्यास करते हैं। प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाएँ देते हैं। इसमें भी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल होने को लेकर तो युवा वर्ग में अत्यधिक दीवानगी देखी जाती है। विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार में युवा वर्ग में आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनने की होड़ होती है। कड़ी मेहनत के बाद कइयों को सफलता भी मिलती है।

वैसे आपको बता दें कि आईएएस और आईपीएस दोनों में एस का अर्थ सर्विस यानी सेवा है और तात्पर्य भी यही है कि इन दोनों ही कैडरों से जोड़ने वाले अधिकारियों का लक्ष्य देश की सेवा करना होता है, परंतु आम अवधारणा इसके विपरीत होती है। हर माता-पिता अपने पुत्र-पुत्री को आईएएस-आईपीएस अधिकारी बनाना चाहते हैं, तो इसके पीछे उनका लक्ष्य अपनी संतान को लाट साहब बनाते हुए सुरक्षित भविष्य देना होता है, तो नौकरी पाने के इच्छुक युवक-युवतियों के मन में यह बात होती है कि आईएएस-आईपीएस अधिकारी की समाज में अलग ही प्रतिष्ठा होती है। कई युवा तो आईएएस-आईपीएस बन कर देश सेवा करने को ही लक्ष्य बनाते हैं, परंतु अधिकांश लोगों की चाहत यह होती है कि एक बार सरकारी जॉब लग गई, तो वे सरकार के दामाद बन जाएँगे और साथ ही वेतन के रूप में ऊँची कमाई भी होगी। कुछ लोगों के मन में भ्रष्टाचार का कीड़ा भी सुगबुगाता है, परंतु इस तरह के उल्टे-सीधे सपनों के साथ आईएएस या आईपीएस अधिकारी बनने के इच्छुक तमाम उम्मीदवारों और देश में हाल में कार्यरत् सैकड़ों अधिकारियों के लिए विदिशा जिला कलक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह एक सार्थक पथ प्रदर्शक बन कर उभरे हैं।

कभी देखा है गंदी नाली में उतर कर सफाई करने वाला कलेक्टर ?

उपरोक्त तसवीरों में दिखाई दे रहा गंदी नाली में उतर कर सफाई करने वाला शख्स किसी पालिका-पंचायत का सफाई कर्मचारी नहीं, अपितु एक जिले का कलक्टर है। इनका नाम है कौशलेन्द्र विक्रम सिंह। कौशलेन्द्र मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के कलेक्टर हैं और इन दिनों सोशल मीडिया पर बहुत छाए हुए हैं, क्योंकि उन्होंने विदिशा में जोरदार सफाई अभियान छेड़ रखा है। कलेक्टर होने के नाते कौशलेन्द्र को सूट-बूट में होना चाहिए और कर्मचारियों तथा कामगारों को आदेश देने चाहिए, परंतु तसवीरों में आप देख सकते हैं कि कौशलेन्द्र विक्रम सिंह स्वयं गंदी नाली में उतर कर सफाई कर रहे हैं। विदिशा की सड़कों पर कौशलेन्द्र व उनके साथी अधिकारियों-कर्मचारियों-कामगारों का यह नज़ारा आम हो गया है। कौशलेन्द्र के इस कर्मठता और सेवा भावना की चहुँओर प्रशंसा हो रही है, तो मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी उनके कार्य की सराहना की है।

फावड़ा-तसला धारी कूड़ा कलेक्टर

कौशलेन्द्र विक्रम सिंह को विदिशा की सड़कों पर फावड़े और तसले के साथ देखा जा सकता है। वे स्वयं ही नाली में उतरते हैं, फावड़े से कूड़ा उठा कर तसले में भरते हैं और फिर कचरे की गाड़ी में कचरा डालते हैं। उनकी इस पहल को आम जनता का भी समर्थन मिल रहा है। कौशलेन्द्र स्वयं इस सेवा कार्य के बारे में कहते हैं, ‘जो काम समाज के लिए करना है, उसे समाज को साथ लेकर ही अच्छे से किया जा सकता है।’ कौशलेन्द्र ने जिस तरह विदिशा में स्वच्छता अभियान छेड़ा है, उसे देख कर लगता है कि वे फावड़ा-तसला धारी कूड़ा कलक्टर हैं।

कौन हैं कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ?

मूलत: हरदोई-उत्तर प्रदेश निवासी कौशलेन्द्र विक्रम सिंह 2010 की बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वर्तमान में विदिशा जिला कलक्टर हैं। इससे पहले वे नीमच जिला कलक्टर थे।

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