VIDEO : महाराष्ट्र के ‘चाणक्य’ पवार ही, फँसे फडणवीस ने युद्ध से पहले छोड़ा मैदान

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 26 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। महाराष्ट्र (MAHARASHTRA) में शनिवार से शुरू हुए पॉलिटिकल पावर गेम (POLITICAL POWER GAME) का मंगलवार को पटाक्षेप हो गया। शनिवार सुबह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस (DEVENDRA FADNAVIS) ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा (RESIGNATION) देने की घोषणा करके इस गेम को ओवर कर दिया। फडनवीस से पहले उप मुख्यमंत्री अजित पवार (AJIT PAWAR) ने पद से इस्तीफा देकर साफ कर दिया था कि अब वे फडनवीस के साथ नहीं हैं और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में घर वापसी कर रहे हैं। इसी के साथ फडनवीस सरकार जो अजित पवार के नेतृत्व में एनसीपी विधायकों के समर्थन से गठित हुई थी, वह समर्थन हटते ही अल्पमत में आ गई और फडनवीस को भी फ्लोर टेस्ट (FLOOR TEST) से पहले ही कुर्सी छोड़ देनी पड़ी। परिणामतः फडनवीस की सरकार 80 घण्टे के भीतर ही धराशायी हो गई। एक बार फिर फडनवीस धोखे का शिकार हुए। पहले शिवसेना ने उनका साथ छोड़ा और इसके बाद अजित पवार ने भी पलटी मार ली। इन सबके बीच एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में ‘चाणक्य’ सिद्ध हुए और पवार के पावर ने ही फडनवीस की गेम पलट दी।

शनिवार सुबह फडनवीस ने ली थी शपथ

इससे पहले प्रदेश में सियासी ड्रामे की शुरुआत 22 नवंबर शुक्रवार की रात को तब शुरु हुई थी, जब शुक्रवार देर शाम शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस नेताओं की संयुक्त बैठक में शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे को तीनों पार्टियों की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार चुन लिया गया था। इसकी घोषणा के बाद उसी रात एनसीपी के विधायक दल के नेता अजित पवार ने देवेन्द्र फडनवीस का संपर्क किया और सरकार गठन के लिये एनसीपी के सभी 54 विधायकों के समर्थन का आश्वासन दिया। अजित पवार की ओर से दिये गये समर्थन पत्र में एनसीपी के सभी विधायकों के हस्ताक्षर मौजूद थे। इस लिये फडनवीस ने देर रात को ही एनसीपी के समर्थन से प्रदेश में भाजपा सरकार गठित करने का राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी के समक्ष दावा पेश कर दिया। दावा पेश किये जाने के बाद देर रात को ही राज्यपाल ने केन्द्र सरकार के समक्ष राष्ट्रपति शासन वापस लेने की सिफारिश कर दी। सुबह तड़के केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने राज्यपाल की सिफारिश को मंजूरी देकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अंतिम मंजूरी के लिये उनके पास प्रस्ताव भेज दिया। कोविंद ने भी प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी दे दी और इसी के साथ सुबह 5 बजे के बाद राष्ट्रपति शासन हटा लिया गया। इसके तुरंत बाद राज्यपाल ने फडनवीस को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिये आमंत्रित किया, जिससे सुबह 8 बजे फडनवीस ने मुख्यमंत्री और एनसीपी विधायक दल के नेता अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। इधर रात को शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस तीनों दलों की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिये चुने जाने वाले उद्धव ठाकरे सुबह उठे तो सरकार गठन की खबर सुनते ही उनके पैरों के नीचे की ज़मीन खिसक गई। उनके साथी दलों एनसीपी और कांग्रेस में भी खलबली मच गई। रातों रात बाज़ी पलट जाने से शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन में से एनसीपी के विधायक टूट कर भाजपा के साथ चले जाने की खबर ने तीनों दलों के लिये मुश्किलें पैदा कर दी।

पवार का पॉलिटिकल पावर बरकरार

एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, उनकी सुपुत्री सुप्रिया सुले, अन्य वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल आदि डैमेज कंट्रोल में जुट गये। काफी प्रयासों के बाद उन्होंने मुंबई के अलावा दिल्ली और गुरुग्राम सहित विभिन्न स्थानों पर छुपे बैठे अपने विधायकों को खोज निकाला और मुंबई में इकट्ठा करके एक होटल में सभी को रखा, जहाँ उन्हें घर वापसी करने के लिये मनाया और यह आश्वासन भी दिया कि उनके विरुद्ध पार्टी कोई कानूनी कार्यवाही नहीं करेगी। विधायकों ने शरद पवार खेमे के साथ रहने की शपथ लेने के अलावा स्टेम्प पेपर पर हस्ताक्षर करके हलफनामा भी दिया। इसके बाद एक मात्र बचे अजित पवार को भी मना कर खेमे में वापसी कराने के प्रयास किये गये। दूसरी ओर राज्यपाल, केन्द्र सरकार और यहाँ तक कि राष्ट्रपति की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए तीनों दलों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमें फडनवीस सरकार के गठन के तरीके पर सवाल उठाते हुए तत्काल बहुमत सिद्ध करने के निर्देश देने की माँग की गई। सुप्रीम कोर्ट ने रविवार और सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मंगलवार को फैसला सुनाया और बुधवार को प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति के साथ नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाने के तुरंत बाद शाम 5 बजे से पहले फडनवीस सरकार को बहुमत साबित करने का आदेश दिया। इस आदेश के बाद चूँकि अजित पवार के हाथ से सभी विधायक निकल चुके थे और शरद पवार के खेमे में जा चुके थे, इसलिये उनके पास भी उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के सिवाय कोई उपाय नहीं बचा था, लिहाजा उन्होंने भी एनसीपी नेताओं के साथ बैठक के बाद उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर घर वापसी कर ली और बुधवार शाम को विधानसभा में बहुमत सिद्ध करने से पहले ही मुख्यमंत्री फडनवीस को भी त्यागपत्र देने के लिये मजबूर हो जाना पड़ा।

इस पूरे सियासी ड्रामे में जो दो बातें मुख्य रूप से उभर कर सामने आईं, वह ये कि शिवसेना के बाद फडनवीस को एनसीपी से भी धोखा मिला और दूसरी यह कि महाराष्ट्र की राजनीति में लगभग 50 वर्ष से सक्रिय वयोवृद्ध नेता शरद पवार ने अपनी पार्टी में हुए डैमेज को जिस सफलता के साथ कंट्रोल किया और बिना किसी कार्यवाही के सभी विधायकों की वापसी करवाई, वह न सिर्फ काबिले तारीफ है, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि महाराष्ट्र की राजनीति में पवार का पावर कायम है।

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