मिल गया डीज़ल का विकल्प : करंज से बनेगा प्रदूषण मुक्त BIO FUEL

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 20 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। ईंधन (Fuel) ऐसा पदार्थ है, जो ऑक्सीजन के साथ संयोग करके काफी ऊष्मा उत्पन्न करता है। ‘ईंधन’ संस्कृत की इन्ध्‌ धातु से निकला है, जिसका अर्थ है, ‘जलना’। ठोस ईंधनों में काष्ठ (लकड़ी), पीट, लिग्नाइट एवं कोयला प्रमुख हैं। पेट्रोलियम, मिट्टी का तेल तथा गैसोलीन द्रव्य ईंधन हैं। कोल गैस, भाप-अंगार-गैस, द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस और प्राकृतिक गैस आदि प्रमुख गैसीय ईंधनों में शामिल हैं। इन सब में डीज़ल एक प्रकार का उदप्रांगार ईंधन है, जो पेट्रोलियम को कई चरणों के बाद प्राप्त होता है, इसका उपयोग वाहनों, मशीनों और संयंत्रों आदि को चलाने के लिये ईंधन के रूप में किया जाता है। इसका प्रयोग भारी वाहनों तथा तापज्वलित दहन इंजनों में होता है, परंतु बढ़ती जनसंख्या और डीज़ल की बढ़ती माँग के कारण भारत में डीज़ल आपूर्ति की समस्या बढ़ती जा रही है। इस समस्या से निपटने के लिये महाराष्ट्र में 6 जिलों को अगले पाँच वर्षों में पूरी तरह डीजल मुक्त करने की तैयारी की जा रही है। केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर, गढ़चिरौली और वर्धा जिलों को डीजलमुक्त करने की घोषणा की है। इस योजना के पूर्ण होने के बाद महाराष्ट्र के इन सभी 6 जिलों में चलने वाले वाहनों में डीज़ल की जगह करंज नामक वनस्पति से तैयार किया गया BIOFUEL प्रयोग किया जायेगा। इस बायो डीज़ल की कीमत केवल 15 से 20 रुपये होगी। नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में ग्रीन क्रूड बायो फ्यूल फाउंडेशन (Green Crude Biofuel Foundation) इस योजना को पूरा करने का काम कर रहा है, जिसके तहत करंज के करीब 3-4 करोड़ पौधे लगाए जाएँगे और इन पौधों से तैयार बीज से 4 बायो फ्यूल प्लांट लगाए जाएँगे।

क्या होता है करंज और इससे कैसे बनेगा Bio fuel ?

करंज (Pongame oiltree) नाम के इस वृक्ष को संस्कृत भाषा में नक्तमाल, करंजिका तथा वृक्षकरंज और लोक भाषाओं में डिढोरी, डहरकरंज अथवा कणझी आदि नाम से जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम पोंगैमिया ग्लैब्रा (Pongamia glabra) है। पोंगामिया तेल को बायो डीज़ल में बदलने के लिये कई अध्ययन किये गये हैं। शोध से पता चला है कि शुद्ध जटरोफा या करंज तेल की तुलना में उच्च तापमान वाली चिपचिपाहट प्राप्त करने के लिये जटरोफा या करंज तेल को मिलाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त करंज के तेल में मिथाइल एस्टर होता है, जो 19 डिग्री सेल्सियस को आसानी से ले सकता है, इसी गुण के कारण करंज तेल गर्म स्थानों पर उपयोग करने में सुविधाजनक होता है। प्रोजेक्ट के लिये वन विभाग करंज के बीज तथा पौधे मुहैया करवाएगा। बायो डीज़ल का प्रयोग सामान्य डीजल वाहनों में किया जा सकता है, इसके लिए आपको इंजन बदलने की आवश्यकता नहीं है।

BIO FUEL देगा रोजगार भी

आज डीज़ल की कीमत 70 रुपये प्रति लीटर है, वहीं डीज़ल की तुलना में बायो फ्यूल लगभग 20 रुपये प्रति लीटर तक सस्ता होगा। बायो फ्यूल सस्ता होने के साथ-साथ प्रदूषण रहित भी है। पूर्वी विदर्भ के ये जिले विकास की दृष्टि से अविकसित और पिछड़े माने जाते हैं, परंतु करंज वनस्पति के लिये यहाँ जमीन की उपलब्धता भरपूर है। गढ़चिरौली, चंद्रपुर और गोंदिया जिले आदिवासी बहुल हैं, परंतु रोजगार न होने की वजह से यहाँ नक्सलवाद को बढ़ावा मिला है। ऐसे में स्थानीय आदिवासियों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ कर उन्हें रोजगार देने की भी योजना है। करंज के पेड़ को मामूली देख-भाल की जरूरत होती है और इसे पशु भी नहीं खाते। करंज के पौधे 3 वर्ष के होते ही उनसे बीज मिलने लगते हैं। केंद्र सरकार ने 2009 में लागू नीति में संशोधन करते हुए जून 2018 के बजट में नेशनल बायो फ्यूल पॉलिसी 2018 को लेकर एक अधिसूचना जारी की थी। इस नीति का उद्देश्य आने वाले समय में देश के ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र में बायो फ्यूल के उपयोग को बढ़ावा देना है। इसके अनुसार वर्तमान में डीज़ल में बायो डीज़ल की मात्रा को 0.1 प्रतिशत से 2030 तक 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है।

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