महाराष्ट्र में मंत्रिमंडल का विस्तार : एक सरकार में कई ‘सरदार’, कितने होंगे असरदार ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 30 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। महाराष्ट्र में 28 नवंबर-2019 को शपथ लेने वाले ठाकरे परिवार के पहले और प्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की 32 दिन पुरानी गठबंधन सरकार का पहला विस्तार हो गया है। इसके लिये सत्तारूढ़ महाराष्ट्र विकास अघाड़ी नामक गठबंधन में शामिल शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और कांग्रेस के बीच पिछले लगभग एक महीने से चल रही माथापच्ची के बाद सोमवार को 36 मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें 26 कैबिनेट और 10 राज्यमंत्रियों ने शपथ ली। इनमें सबसे अधिक 14 एनसीपी के, 10 कांग्रेस और शिवसेना के 9 विधायक शामिल हैं। एक शिवसेना समर्थित निर्दलीय विधायक तथा दो विधायक अन्य समर्थक दलों के भी हैं जिन्हें मंत्री पद की सौगात मिली है। बड़ी बात यह है कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार उप मुख्यमंत्री बने। दूसरी तरफ शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे भी कैबिनेट मंत्री बने। कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण भी कैबिनेट मंत्री बने। इस प्रकार अब उद्धव सरकार में तीनों दलों के मिला कर कई ‘सरदार’ हो गये हैं। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि उद्धव सरकार में ‘परिवार’ की भरमार हो गई है।

एनसीपी-कांग्रेस ने सीनियर नेताओं को उद्धव के कंधों पर लादा

अभी तक महाराष्ट्र में किंग मेकर की भूमिका निभाने वाले ठाकरे परिवार की शिवसेना पहली बार 1995 में महाराष्ट्र की किंग बनी थी और शिवसेना के मनोहर जोशी शिवसेना के पहले मुख्यमंत्री बने थे। उनके बाद नारायण राणे शिवसेना के दूसरे मुख्यमंत्री बने थे, जिनके नेतृत्व में 1999 के चुनाव में शिवसेना हार गई थी और 15 साल तक महाराष्ट्र की सत्ता से बाहर रही। 2014 में उसने चुनाव के बाद भाजपा से गठबंधन करके सरकार बनाई, जिसमें वह भाजपा की जूनियर बन कर रही। हालाँकि 2019 में उसने चुनाव से पहले ही भाजपा से गठबंधन किया था और चुनाव में जीत भी हासिल हुई, परंतु इस बार जूनियर की हैसियत से नहीं बल्कि सीनियर की हैसियत माँगी, जिससे भाजपा ने इनकार कर दिया तो उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और एनसीपी से समर्थन लेकर महाराष्ट्र विकास अघाड़ी नामक गठबंधन रचा और उसके नेता बन कर प्रदेश में ठाकरे परिवार के पहले तथा प्रदेश के 18वें सीएम बन गये। हालाँकि वह भले ही मुख्यमंत्री बन गये हैं, परंतु एनसीपी और कांग्रेस दोनों ही उनकी लगाम अपने हाथों में रख रही हैं। उन पर दबाव बनाये रखने के लिये ही तीनों दलों की बराबर की भागीदारी रखी गई है। इसमें भी शिवसेना और एनसीपी का पलड़ा कांग्रेस से भारी नज़र आता है। 37 दिन पहले एनसीपी से बगावत करके भाजपा के साथ मिल जाने वाले और भाजपा की सरकार गठित कर देने वाले एनसीपी के सीनियर नेता और शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने उद्धव ठाकरे सरकार में भी उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। दूसरी तरफ ठाकरे परिवार से पहली बार चुनाव लड़ कर विधायक बने उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे को पहली बार विधायक बनने पर भी अपने पिता की कैबिनेट में मंत्री पद का तोहफा मिला है। इस प्रकार उद्धव ठाकरे सरकार में परिवारवाद हावी हो गया है।

मंत्रिमंडल में एनसीपी-कांग्रेस का दबदबा

मंत्रीमंडल विस्तार की बात करें तो ठाकरे सरकार में 30 दिसंबर-2019 सोमवार को शपथ लेने वाले 36 मंत्रियों में एनसीपी के सबसे अधिक 14 चेहरे शामिल किये गये हैं। इनमें अजित पवार उप मुख्यमंत्री बने हैं, अन्य सभी 13 एनसीपी विधायकों ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली है, जो दर्शाता है कि उद्धव सरकार में एनसीपी का दबदबा रहेगा। क्योंकि उद्धव की कैबिनेट में एनसीपी के जिन बड़े दिग्गजों को शामिल किया गया है उनमें धनंजय मुंडे, दिलीप पाटिल, अनिल देशमुख और हसन मुश्रीफ शामिल हैं। धनंजय मुंडे भाजपा के सीनियर नेता गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं और धनंजय को उनके चाचा ही राजनीति में लेकर आये थे। बाद में धनंजय मुंडे ने राजनीति में अपना रास्ता बदल लिया था और 2012 में एनसीपी में शामिल हो गये थे। 2014 से 2019 तक वे महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता भी रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा के अक्टूबर महीने में हुए चुनाव में गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे को हरा कर चुनाव जीता है। इतना ही नहीं, जब अजित पवार ने एनसीपी विधायकों के समर्थन से भाजपा के देवेन्द्र फडणवीस को समर्थन देकर सरकार बनवाई थी, उसमें भी धनंजय मुंडे ने बड़ी भूमिका निभाई थी, बाद में पाला बदल कर फिर से एनसीपी में आ गये थे और अजित पवार को भी वापस ले आये थे। अब दोनों फिर से सत्ता में भागीदार बन गये हैं। एनसीपी के नवाब मलिक को भी उद्धव ठाकरे की कैबिनेट में जगह दी गई है।

कांग्रेस की ओर से शिवसैनिकों पर दबाव बनाये रखने के लिये 2008 से 2010 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे अशोक चव्हाण को उद्धव कैबिनेट में शामिल किया गया है। इसके अलावा कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे अमित देशमुख को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा कांग्रेस विधायक दल के पूर्व नेता विजय वडेट्टीवार और वर्षा गायकवाड़ को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।

एनसीपी के 14 नेता बने कैबिनेट

अजित पवार (उप मुख्यमंत्री)

दिलीप वल्से पाटिल (कैबिनेट मंत्री)

धनंजय मुंडे (कैबिनेट मंत्री)

अनिल देशमुख (कैबिनेट मंत्री)

हसन मश्रीफ (कैबिनेट मंत्री)

डॉ. राजेन्द्र शिंगणे (कैबिनेट मंत्री)

नवाब मलिक (कैबिनेट मंत्री)

राजेश टोपे (कैबिनेट मंत्री)

बालासाहब पाटिल (कैबिनेट मंत्री)

जितेन्द्र आव्हाड़ (कैबिनेट मंत्री)

दत्ता भरणे (कैबिनेट मंत्री)

प्राजक्त तनपुरे (कैबिनेट मंत्री)

अदिति टटकरे (कैबिनेट मंत्री)

संजय बनसोड़े (कैबिनेट मंत्री)

कांग्रेस के 10 नेता जो उद्धव मंत्रीमंडल में हुए शामिल

अशोक चव्हाण (कैबिनेट मंत्री)

सुनील छत्रपाल (कैबिनेट मंत्री)

यशोमति ठाकुर (कैबिनेट मंत्री)

विजय वडेट्टीवार (कैबिनेट मंत्री)

अमित देशमुख (कैबिनेट मंत्री)

केसी पाड़वी (कैबिनेट मंत्री)

असलम शेख (कैबिनेट मंत्री)

वर्षा गायकवाड़ (कैबिनेट मंत्री)

विश्वजीत कदम (राज्यमंत्री)

सतेज पाटिल (राज्यमंत्री)

शिवसेना के ये नेता बने मंत्री

आदित्य ठाकरे (कैबिनेट मंत्री)

संजय राठौड़ (कैबिनेट मंत्री)

गुलाबराव पाटिल (कैबिनेट मंत्री)

दादा भूसे (कैबिनेट मंत्री)

संदीपन भूमरे (कैबिनेट मंत्री)

अनिल परब (कैबिनेट मंत्री)

उदय सामंत (कैबिनेट मंत्री)

शंकर राव गडाख (कैबिनेट मंत्री) (शिवसेना समर्थित निर्दलीय)

शंभूराजे देसाई (राज्यमंत्री)

अब्दुल सत्तार (राज्यमंत्री)

बच्चू कड़ू (राज्यमंत्री) (अन्य)

राजेन्द्र पाटिल यड्रावकर (राज्यमंत्री) (अन्य)

एक सरकार में कितने ‘सरदार’, कितने होंगे असरदार ?

इस प्रकार 36 मंत्रियों में 4 मुस्लिम और 3 महिलाओं को भी मंत्री पद प्राप्त हुए हैं। इससे पहले उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर को शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस के 2-2 सहित कुल 6 मंत्रियों के साथ शपथ ली थी। इस प्रकार महाराष्ट्र में अब उद्धव ठाकरे के मंत्रीमंडल की सदस्य संख्या बढ़ कर 43 हो गई है। साथ ही मंत्रिमंडल में सर्वाधिक संख्या भी एनसीपी की हो गई है। एनसीपी के 56 में से 16 विधायक मंत्री बन गये हैं। जबकि दूसरे नंबर पर कांग्रेस और शिवसेना हैं। कांग्रेस के 44 में से 12 विधायक मंत्री बने हैं और शिवसेना के 11 विधायक मंत्री बने हैं, जबकि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चुनाव जीतकर विधायक बनना जरूरी है, वे अभी निर्वाचित विधायक नहीं हैं। इस प्रकार उनके साथ शिवसेना के सदस्यों की संख्या भी मंत्रिमंडल में 12 है। चूँकि अब सरकार में तीनों दलों के कई ‘सरदार’ अर्थात् सीनियर नेता शामिल हो गये हैं। इसलिये आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि गठबंधन की यह राजनीति प्रदेश में क्या रंग लाती है और ये ‘सरदार’ कितने ‘असरदार’ सिद्ध होते हैं ? क्योंकि सरकार गठन से पहले राज्य में जमकर राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला था।

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