महाराष्ट्र में ‘झटके’ के साथ सत्ता वापसी की ओर फडणवीस

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* भाजपा की सीटें घटने से शिवसेना का कद बढ़ा

* शिवसेना उप मुख्यमंत्री पद मांग सकती है

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 24 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। लोकसभा चुनाव 2019 के लगभग 6 माह बाद हुए महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों में जनता ने फिर एक बार भारतीय जनता पार्टी (BJP-बीजेपी) को सत्ता में लाने का जनादेश दिया है। अब तक प्राप्त रुझानों का स्पष्ट संकेत है कि महाराष्ट्र में जहाँ मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, वहीं हरियाणा में मनोहरलाल खट्टर पुन: मुख्यमंत्री बन जाएँगे। यद्यपि दोनों ही राज्यों के चुनाव परिणाम भाजपा के दावों और अपेक्षाओं के अनुसार नहीं आते दिख रहे।

बात केवल महाराष्ट्र की करें, तो भाजपा को इस राज्य में बड़ा झटका लगता दिखाई दे रहा है। रुझानों के अनुसार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में मतदाताओं ने मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस के नेतृत्व पर पुन: विश्वास तो व्यक्त किया है, परंतु उनकी पार्टी यानी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) की सीटों में कटौती कर बड़ा झटका भी दिया है। एग्ज़िट पोल में जहाँ कई एजेंसियों ने महाराष्ट्र में भाजपा के अकेले दम पर सत्ता हासिल करने के दावे किए थे, वहीं असली रुझानों में भाजपा के 100 से 110 सीटों तक समिट जाने के संकेत ने सहयोगी शिवसेना को पंख लगा दिए हैं। रुझानों में शिवसेना 63 सीटों पर आगे चल रही है। वैसे भाजपा और शिवसेना गठबंधन को मिला कर बहुमत के आँकड़े 145 को पार कर लेंगे। ऐसे में फडणवीस का पुन: मुख्यमंत्री बनना निश्चित माना जा रहा है, परंतु लोकसभा चुनाव 2014 और विधानसभा चुनाव 2014 के बाद से लगातार शिवसेना को ‘बड़ा भाई’ मानने से इनकार करने वाली भाजपा को सीटें घटने के कारण फिर एक बार शिवसेना के आक्रमक तेवरों का सामना करना पड़ सकता है।

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 2014 में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन टूट गया था। दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, जिसमें भाजपा ने गठबंधन टूटने के बावजूद नुकसान न उठाते हुए 122 सीटें हासिल की थीं। 63 सीटें जीतने वाली शिवसेना ने मज़बूरी में ही सही, भाजपा को ही समर्थन दिया और फडणवीस मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद लगातार भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और फडणवीस के ज़रिए महाराष्ट्र में अपना कद बढ़ाने का प्रयास किया, परंतु विधानसभा चुनाव परिणामों-रुझानों ने शिवसेना में नई शक्ति का संचार किया है, जो भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण बन सकती है। शिवसेना फिर एक बार महाराष्ट्र में ‘बड़े भाई’ की भूमिका में आने का प्रयास कर सकती है। यद्यपि अंतिम चुनाव परिणाम के आँकड़े बहुत कुछ परिस्थितियाँ बदलेंगे। संभव है कि शिवसेना के बढ़ते कद के बाद भाजपा को शिवसेना को उप मुख्यमंत्री पद भी देना पड़े।

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