महात्मा गांधी ही रहेंगे राष्ट्रपिता : ट्रम्प ने जिस संदर्भ में मोदी को ‘FATHER OF INDIA’ कहा, वह सटीक और कटु सत्य है

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* मोदी का ‘सबका साथ-सबका विकास’ का यथार्थ क्रियान्वयन उन्हें ‘फादर ऑफ इंडिया’ बनाता है

* मोदी का धर्म-जाति-पंथ-प्रांत से ऊपर उठ कर वोट पाना उन्हें ‘फादर ऑफ इंडिया’ बनाता है

* मोदी का दलहित से परे राष्ट्रवाद-राष्ट्रहित के प्रति समर्पण उन्हें ‘फादर ऑफ इंडिया’ बनाता है

* मोदी के ‘आह्वान’ में महात्मा गांधी जैसी शक्ति का होना उन्हें ‘फादर ऑफ इंडिया’ बनाता है

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 25 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत सरकार ने किसी भी व्यक्ति को राष्ट्रपिता यानी फादर ऑफ इंडिया घोषित नहीं किया है। यद्यपि महात्मा गांधी भारत के स्वघोषित और अघोषित राष्ट्रपिता हैं और यह निर्विवाद सत्य है, जिसे स्वीकारते हुए हर भारतीय को गर्व होता है, क्योंकि इस फ़कीर ने राष्ट्र के लिए जो किया, वह वे ही कर सकते थे। दावे के साथ यह तो नहीं कहा जा सकता कि महात्मा गांधी से पहले किसी ने राष्ट्र की इतनी बड़ी सेवा नहीं की, परंतु दावे के साथ यह अवश्य कहा जा सकता है कि महात्मा गांधी के बाद किसी भी नेता ने देश की इतनी बड़ी सेवा नहीं की, जितनी महात्मा गांधी ने की थी।

महात्मा गांधी को पहली बार राष्ट्रपिता के रूप में संबोधित किया था सुभाष चंद्र बोस ने। वही सुभाष चंद्र बोस, जो स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गांधी के नरम दल के कठोर विरोधी गरम दल के नेता थे। महात्मा गांधी से वैचारिक मतभेद के बावजूद सुभाष चंद्र बोस ने 4 जून, 1944 को सिंगापुर रेडियो से प्रसारित अपने एक संदेश में महात्मा गांधी को पहली बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कह कर संबोधित किया था। यद्यपि 3 वर्षों के बाद 15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्र हुए भारत ने ऐसा संविधान बनाया, जो किसी व्यक्ति को राष्ट्रपिता घोषित करने की अनुमति नहीं देता। यही कारण है कि महात्मा गांधी भारत के राष्ट्रपिता हैं और रहेंगे, परंतु भारत सरकार की ओर से अधिकृत रूप से उन्हें राष्ट्रपिता की उपाधि नहीं दी गई है।

ट्रम्प ने मोदी को कहा ‘फादर ऑफ इंडिया’ और ‘एल्विस’ !

आज राष्ट्रपिता पर यह चर्चा करने का कारण यह है, क्योंकि देश में महात्मा गांधी के बाद पहली बार किसी नेता को किसी विदेशी नेता ने राष्ट्रपिता कह कर संबोधित किया है। जी हाँ, विश्व के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘फादर ऑफ इंडिया’ कह कर संबोधित किया है। मंगलवार को ट्रम्प और मोदी के बीच न्यूयॉर्क में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन (PRESS CONFERENCE) यानी PC में डोनाल्ड ट्रम्प नरेन्द्र मोदी पर प्रशंसा के एक के बाद एक पुष्पों की वर्षा कर रहे थे और इसी दौरान ट्रम्प ने मोदी को फादर ऑफ इंडिया की उपाधि भी दे डाली। ट्रम्प यहीं नहीं रुके, उन्होंने हाउडी मोदी कार्यक्रम के सवाल पर कहा, ‘मेरी दाईं ओर जो बैठे हैं, उन्हें लोग पसंद करते हैं। लोग पागल हो जाते हैं। ये (मोदी) एल्विस के इंडियन वर्ज़न हैं।’ एल्विस यानी एल्विस प्रेस्ली, जो अमेरिकी सिंगर और एक्टर थे। एल्विस को अमेरिका में किंग ऑफ रॉक एंड रोल कहा जाता है।

हाउडी मोदी के बाद ट्रम्प पर मोदी का ऐसा सुरूर छाया, जो न केवल इमरान खान के साथ हुई कॉमेडी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई दिया, अपितु मोदी के साथ संयुक्त पीसी करने के बाद भी ट्रम्प पर मोदी की मुरीदी छाई रही। यही कारण है कि ट्रम्प ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ट्विटर पर एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें दुनिया के कई देशों के नेताओं से उनकी (ट्रम्प की) मुलाकात में पीएम मोदी संग बैठक को भी प्राथमिकता दी गई है।

उधर न्यूयॉर्क में ट्रम्प ने मोदी को फादर ऑफ इंडिया कहा, इधर भारत में कांग्रेस भड़क उठी। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के पुत्र और कर्नाटक के पूर्व मंत्री प्रियांक खड़गे ने ट्वीट कर ट्रम्प पर हमला बोल दिया। प्रियांक ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘तो क्या अब अमेरिकी तय करेंगे कि राष्ट्रपिता कौन हैं ? यदि देखें, तो इन फासीवादी लोगों ने हमारे लोगों को बौद्धिक रूप से तर्क देकर लूटा है। सोशल मीडिया के प्रोपेगैंडा ने मिल कर आने वाली पीढ़ियों को भी बिगाड़ दिया है।’

क्यों मोदी ‘फादर ऑफ इंडिया’ कहलाने के अधिकारी हैं ?

ख़ैर, कांग्रेस को छोड़िए। पुन: चलते हैं न्यूयॉर्क, जहाँ डोनाल्ड ट्रम्प ने मोदी को फादर ऑफ इंडिया की उपाधि दी। ऐसा नहीं है कि ट्रम्प के मोदी को फादर ऑफ इंडिया की उपाधि देने से महात्मा गांधी भारत के राष्ट्रपति नहीं रहेंगे। महात्मा गांधी युगावतार थे और उनका स्थान कोई नहीं ले सकता। फिर चाहे वे नरेन्द्र मोदी ही क्यों न हों ? वास्तव में ट्रम्प ने जिस संदर्भ में नरेन्द्र मोदी को फादर ऑफ इंडिया कहा, उसे समझने की आवश्यकता है। ट्रम्प के संदर्भ पर ध्यान देंगे, तो स्वत: ही समझ में आ जाएगा कि मोदी आधुनिक भारत के ऐसे फादर ऑफ इंडिया हैं, जिन्होंने देश की जनता को एक पिता के साथ मिल-जुल कर रहने वाली कई संतानों को मिलने वाली छत्रछाया के रूप में काम किया है। पहले ट्रम्प का संदर्भ समझ लीजिए। वास्तव में ट्रम्प ने यह कहा, ‘मुझे वह भारत याद है, जो काफी बँटा हुआ था। वहाँ काफी मतभेद, लड़ाई थे, लेकिन वह (पीएम मोदी) सबको साथ लेकर आए। जैसे कि एक पिता सबको साथ लाता है। शायद वह भारत के पिता हैं। हम उन्हें फादर ऑफ इंडिया बुलाएंगे।’ ट्रम्प के इस वक्तव्य के संदर्भ को समझें, तो वे यह कहना चाह रहे थे कि जो भारत कभी धर्म, जाति, पंथ, प्रांत की लड़ाइयों में उलझ कर राष्ट्रीय हित से परे नहीं सोच पाता था, वह भारत आज इन सभी विषयों से ऊपर उठ कर एकजुट राष्ट्र के रूप में काम करता है। ट्रम्प उस भारत के बारे में अधिक जानते थे, जहाँ साम्प्रदायिक हिंसाएँ आम बात थीं, जाति के नाम पर विभाजन राजनीति के केन्द्र में था। आज का भारत बदल चुका है। ट्रम्प के संदर्भ का मूल आधार है मोदी का ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा। यही वह नारा है, जिसके आधार पर मोदी गुजरात में 13 वर्ष सफल शासन करने के बाद देश में पिछले 5 वर्षों से शासन कर रहे हैं, जिनकी हर योजना, जिनका हर काम, जिनका हर लक्ष्य, जिनका हर संकल्प देश के हर नागरिक के लिए होते हैं, किसी धर्म-जाति-पंथ-प्रांत विशेष के लिए नहीं। मोदी की यह नीति जनता की कसौटी पर एक बार नहीं, अपितु दो-दो बार ख़री उतरी, जिसके चलते वे दोबारा प्रधानमंत्री बने हैं। लोकसभा चुनाव 2014 में तो लोगों ने मोदी को परखने के लिए सभी बाड़ों से ऊपर उठ कर वोट किया था, परंतु लोकसभा चुनाव 2019 में भी लोगों ने मोदी के नाम पर हर तरह के वाद-विवाद से ऊपर उठ कर वोट दिया, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि विविधताओं से भरा भारत के लोकतंत्र में अभूतपूर्व एकता है। मोदी का हर कार्य राष्ट्रवाद-राष्ट्रहित में होता है। लोगों ने कई बार यह अनुभव भी किया कि मोदी के लिए दलहित से ऊपर देशहित है। मोदी वर्तमान भारतीय राजनीति के ऐसे सबसे शक्तिशाली नेता हैं, जिनके एक आह्वान पर पूरा राष्ट्र सुराज्य के लिए चल पड़ता है, दौड़ पड़ता है, योग करने लगता है, फिटनेस मूवमेंट चलाने लगता है, स्वच्छ भारत मिशन में जुट जाता है, जैसा कि महात्मा गांधी के आह्वान पर भारत का हर नागरिक धर्म-जाति को भुला कर देश की स्वराज्य के लिए चल पड़ता था। यहाँ मोदी की तुलना महात्मा गांधी से करने का न तो कोई इरादा है और न ही ऐसा साहस करने का दुस्साहस किया जा रहा है, परंतु इतना अवश्य है कि मोदी महात्मा गांधी की उन्हीं भावी पौधों में से एक हैं, जिन्होंने देश को कभी इंदिरा गांधी जैसी शक्तिशाली नेत्री दी, तो आज नरेन्द्र मोदी जैसा महारथी नेतृत्व दिया।

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