माजुलीः अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ती एक जगह

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Majuli Island

कहते हैं कि नदियां जीवनदायनी होती हैं, लेकिन कई बार ये जीवनदायनी नदियां विनाश का कारण भी बन जाती हैं। ब्रह्मपुत्र नदी भी असम के माजुली इलाके के लिए इसी तरह विनाश का कारण बन गई है। बता दें कि माजुली इलाका दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप (River Island)है। जो साल 1950 में करीब 1250 किलोमीटर इलाके में फैला हुआ था, लेकिन अब यह सिर्फ 500 किलोमीटर के करीब शेष बचा है। दरअसल ब्रह्मपुत्र नदी में हर साल आने वाली बाढ़ में माजुली का काफी इलाका बाढ़ के पानी में डूब जाता है। यही वजह है कि अब माजुली के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा हो गया है।

Majuli Island

कल्चरल हेरीटेज

माजुली दुनिया में सिर्फ सबसे बड़े River Island के रुप में ही नहीं जाना जाता है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत और विविधताओं के कारण भी यह आइलैंड दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यही वजह है कि पूरी दुनिया के पर्यटक माजुली घूमने आते हैं। लेकिन आज सांस्कृतिक धरोहरों की ये धरती धीरे धीरे सिमट रही है। सरकार के स्तर पर भी इस धरती को बचाने की कोई खास पहल होती दिखाई नहीं दे रही है।

बता दें कि माजुली भौगोलिक विविधताओं, परंपराओं, और पर्यावरणीय खासियतों के लिए पूरी दुनिया में पहचानी जाती है। यहां हर साल दुनिया के अलग-अलग भागों से पक्षी आते हैं और इस इलाके को एक प्राकृतिक सुंदरता देते हैं। इसके अलावा माजुली की परंपराएं असम की धरोहर हैं। माजुली में साल 1449 में वैष्णव धर्म की शुरुआत हुई। जिसके बाद यहां संगीत, नृत्य और मुखौटा कला की शुरुआत हुई। आज ये कलाएं माजुली की पहचान हैं। आज भी ये कलाएं माजुली के ‘सत्र’ में सिखाई जाती हैं। बता दें कि सत्र एक तरह की मोनेस्टी हैं, जहां अलग-अलग हिस्सों के बच्चे एक साथ रहकर इन सारी कलाओं को सीखते हैं।

Majuli Island

माजुली में हर साल आने वाली बाढ़ माजुली का काफी बड़ा हिस्सा अपने साथ बहाकर ले जाती है। यहां रहने वाले लोगों की मनोस्थिति का सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है जो अपनी आंखों के सामने अपनी जन्मभूमि को खत्म होते देख रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले 20 सालों में माजुली इलाका पूरी तरह से ब्रह्मपुत्र नदी में समा जाएगा। ऐसे में यहां के लोगों की चिंता है कि माजुली के बाद उनकी परंपराओं का क्या होगा ? शायद वो भी वक्त के साथ खत्म हो जाएं !

Majuli Island

माजुली के लोगों की मांग है कि इस इलाके को UNESCO World Heritage साइट घोषित करे। मगर भारत सरकार के स्तर पर इस ओर कोई खास प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। लोगों का मानना है कि यदि UNESCO माजुली को World Heritage घोषित करे देती है तो शायद इसे बचाने के लिए सरकार के स्तर पर गंभीर प्रयास किए जाएं। आजादी के बाद भी माजुली सिर्फ फेरी सेवा से ही बाकी दुनिया से जुड़ा हुआ है, लेकिन यदि इसे बचाने के प्रयास नहीं हुए तो जल्द ही यह इलाका दुनिया के नक्शे से गायब होगा !

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