भरी अदालत में ‘NYAY’ की कसौटी : पति बोला, ‘6 हजार ही कमाता हूँ, राहुल की सरकार बाकी के 6 हजार देगी, तभी भरण-पोषण भत्ता दे सकूँगा’ !

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राजनीतिक दल चुनाव जीतने के लिए गरीबों को तरह-तरह के लुभाने वाले वचन देते हैं। ऐसा ही एक चुनावी वादा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश की जनता से किया है। राहुल गांधी ने कांग्रेस की सरकार आने पर न्यूनतम् आय योजना (NYAY) लागू करने का वादा करते हुए दावा किया है कि इस योजना के तहत देश के प्रत्येक नागरिक की आय मासिक 12,000 रुपए सुनिश्चित की जाएगी और जिसकी भी आय इस राशि से कम होगी, उसकी शेष राशि की भरपाई न्याय योजना के तहत सरकार करेगी।

राहुल ने वादा तो कर दिया, लेकिन तलाक मांग रही एक महिला के पति ने राहुल के वादे को ही ढाल बना लिया। इस पति ने भरी अदालत में कह दिया कि उसकी मासिक आय 6 हजार रुपए है। राहुल गांधी की सरकार बनेगी और (न्याय योजना के तहत) शेष 6 हजार रुपए मिलेंगे, तभी वह अपनी पत्नी को 4500 रुपए भरण-पोषण भत्ते के रूप में दे सकेगा।

मामला मध्य प्रदेश के इंदौर का है। इंदौर की फैमिली कोर्ट में आनंद शर्मा नामक एक व्यक्ति के विरुद्ध उसकी पत्नी ने भरण-पोषण भत्ता देने का केस लगा रखा है। गत 12 मार्च को कुटुम्ब न्यायालय ने आदेश दिया कि आनंद शर्मा अपनी पत्नी को 3,000 रुपए और नाबालिक पुत्री के भरण-पोषण के लिए 1,500 यानी कुल 4,500 रुपए प्रतिमाह दे।

कोर्ट के आदेश के बाद लिखित जवाब पेश करते हुए आनंद शर्मा ने कोर्ट को बताया, ‘मैं टीवी धारावाहिकों में छोटा-बड़ा काम करके हर माह 5-6 हार रुपए ही कमा पाता हूँ। इसलिए भत्ता देने में असमर्थ हूँ, क्योंकि वर्तमान आय से मेरा और मेरे माता-पिता का गुजारा करना ही मुश्किल है।’

इसके बाद आनंद शर्मा ने कोर्ट के समक्ष एक लिखित आवेदन में जो बात रखी, वह सभी को आश्चर्य में डाल देने वाली बात थी। लिखित आवेदन में आनंद शर्मा ने कहा, ‘कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया है कि उनकी सरकार आने पर बेरोजगार व्यक्ति को 6,000 रुपए महीना सरकार की ओर से दिया जाएगा। मैं यह अंडरटेकिंग देता हूँ कि जैसे ही मुझे यह 6,000 रुपए की राशि सरकार से मिलने लगेगी, मैं उसमें से 4,500 रुपए भरण-पोषण की राशि अपनी पत्नी और बच्चों को देना शुरू कर दूँगा।’ आनंद शर्मा ने आग्रह किया कि तब तक भरण-पोषण भत्ता अदा करने का आदेश स्थगित रखा जाए। आनंद शर्मा के इस जवाब पर अब आगामी 29 अप्रैल को बहस होगी।

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