लो फिर आ गए अय्यर : कश्मीर को कहा फ़लिस्तीन, आज़ाद ‘बिकाऊ’ और अधीर ‘नाज़ी कैंप’ बता चुके

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* जम्मू कश्मीर पर कांग्रेसियों की बदजुबानी कब तक ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 12 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। जम्मू कश्मीर को लेकर एक-एक करके कांग्रेसी नेताओं की बदजुबानी सामने आ रही है, जो कांग्रेस और इन नेताओं की मानसिकता को उजागर करती है। जिस कश्मीर को हम धरती का स्वर्ग कहते हैं, उसी कश्मीर की तुलना कांग्रेसी नेता हिटलर के नाज़ी कैंप और फलीस्तीन से कर रहे हैं। बयानबाजी करते समय यह नेता ये भान भी भूल जाते हैं कि उनके बयान किस पर और क्या असर करेंगे ? राज्य सभा में विपक्ष के नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद तो और एक कदम आगे बढ़ गये और उन्होंने तो कश्मीरियों को ही बिकाऊ कह दिया।

कश्मीर को लेकर कांग्रेसियों की बदजुबानी !

जम्मू कश्मीर से धारा 370 खत्म किये जाने से यह राज्य भारत का सामान्य राज्य बन गया है। अभी तक केन्द्र सरकार जो संवैधानिक मर्यादाओं में जकड़ी हुई थी और इस राज्य के लिये चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रही थी, अब वह अन्य राज्यों की तरह ही कश्मीर के लिये भी कानून और योजनाएँ बनाकर उन्हें लागू कर सकेगी। इस कदम से जम्मू कश्मीर के नेताओं को करारा झटका लगा है, जो कश्मीर को अपनी जागीर समझते थे और वहाँ मनमानी करते थे, उन्होंने जानबूझकर कश्मीरियों का विकास नहीं किया और सिर्फ अपना स्वार्थ सिद्ध किया। धारा 370 का खात्मा होने और जम्मू कश्मीर के भारत का अभिन्न हिस्सा बनने से एक तरफ जहाँ पूरे देश में जश्न मनाया गया, वहीं कांग्रेस के नेताओं के बयानों से उसकी मानसिकता उजागर हो रही है। राज्य सभा में जब गृह मंत्री अमित शाह 5 अगस्त को धारा 370 हटाने का संकल्प लेकर आये तो सबसे पहले राज्य सभा में कांग्रेस के विपक्षी नेता गुलाम नबी आजाद ने इसका विरोध किया और उन्होंने तो इस धारा को हटाने को संविधान का मर्डर तक कह दिया और इसके बाद आगे बढ़कर कश्मीरियों को बिकाऊ बता दिया। इसके बाद जब यह संकल्प लोकसभा में लाया गया तो यहाँ कांग्रेस के संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी की बदजुबानी सामने आई और उन्होंने कश्मीर की तुलना जर्मनी के क्रूर शासक हिटलर के नाजी कैंपों से कर डाली। इसके बाद पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी. चिदंबरम सामने आए उन्होंने तो हद ही कर दी और धारा को हटाए जाने के कदम को सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश करते हुए कहा कि यदि कश्मीर हिंदू बाहुल्य प्रदेश होता तो भाजपा इस प्रदेश का विशेष राज्य का दर्जा नहीं छीनती और धारा 370 को बरकरार रखने का पक्ष लेती। चूँकि यह मुस्लिम बाहुल्य प्रदेश है, इसलिये भाजपा ने इस राज्य का विशेष राज्य का दर्जा छीन लिया।कांग्रेस के इन नेताओं ने बदजुबानी करने में जैसे कोई कमी छोड़ दी थी, इसलिये अब पूर्व केन्द्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर भी मैदान में कूद पड़े और उन्होंने तो कश्मीर की तुलना फलीस्तीन से कर डाली।

कांग्रेस मानसिक रूप से हुई दिवालिया ?

यदि हम इन कांग्रेसी नेताओं की बदजुबानी के मायने निकालें तो कह सकते हैं कि इन नेताओं के बयानों से यह सिद्ध हो रहा है कि कांग्रेस मानसिक रूप से दिवालिया हो गई है। कांग्रेस नेताओं की मानसिकता सिर्फ और सिर्फ भाजपा और पीएम मोदी का पुरजोर विरोध करने तक ही सीमित और कुंठित होकर रह गई है। इसके आगे जैसे उसकी सोच खत्म सी हो गई है। वह सत्तारूढ़ दल और शासक के विरोध से ऊपर उठकर सोचने में असमर्थ हो गई है। यह उसका मानसिक दिवालियापन ही है कि वह सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे कदम खुद तो उठाने का साहस नहीं दिखा पाई और जब मोदी सरकार ने यह साहसी कदम उठाए तो वह उनका समर्थन नहीं कर पाई। ऐसा ही जीएसटी लागू करने के दौरान भी हुआ और मुस्लिम महिलाओं का शोषण रोकने के लिये लाये गये तीन तलाक प्रतिबंधक कानून के दौरान भी देखने को मिला। एक जिम्मेदार विपक्ष का काम जहाँ सत्तारूढ़ दल की कमियों को आम जनता के समक्ष उजागर करना होता है, वहीं उसके साहसी कदमों का मजबूती से समर्थन करना भी विपक्ष का राजधर्म होता है, परंतु इसके लिये उच्च कोटि की और व्यापक सोच होना जरूरी है और कांग्रेसी नेताओं की कश्मीर को लेकर जो बदजुबानी सामने आ रही है, उसे देखते हुए तो यही लगता है कि कांग्रेस उच्च और व्यापक सोच से कोसों दूर है।

तो इसीलिए कांग्रेस ने कभी हाथ नहीं लगाया धारा 370 को ?

वैसे तो देश की जनता ने ही कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया, परंतु जिस तरह से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जम्मू कश्मीर से इस धारा को हटाए जाने का विरोध कर रहे हैं, उससे तो कांग्रेस की ही फजीहत हो रही है और उसकी राष्ट्रविरोधी छवि बन रही है। कांग्रेसी नेता यह भी नहीं समझ पा रहे हैं कि उनके इन बयानों का पड़ोसी देश में क्या अर्थघटन किया जा रहा है और वह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच इन बयानों को भारत के विरुद्ध इस्तेमाल कर सकता है। कांग्रेसी नेता धारा 370 को हटाने के कदम को जिस तरह से कश्मीर विरोधी और कश्मीरी लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन बता रहे हैं, इससे तो यही सिद्ध होता है कि कांग्रेस से देश इस धारा को हटाए जाने की उम्मीद नहीं कर सकता था।

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