पूर्वोत्तर के इस हवाई अड्डे को मिलेगा क्रांतिकारी का नाम : यहाँ जानिए कौन हैं वो ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 28 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। पूर्वोत्तर के एक और हवाई अड्डे का नाम बदलने की तैयारी हो चुकी है। अब मणिपुर की राजधानी इंफाल के हवाई अड्डे का नाम राज्य के एक क्रांतिकारी के नाम पर रखा जाएगा। मणिपुर विधानसभा ने हवाई अड्डे का नाम बदलने के लिये एक रेजोलुशन भी पास कर दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इंफाल एयरपोर्ट जिसका वर्तमान नाम तुलिहल इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, उसे बदलकर बीर तिकेन्द्रजीत सिंह अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा रखने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में विपक्ष के नेता इबोबी सिंह ने भी अपना समर्थन दिया है। इससे पहले त्रिपुरा के अगरतला हवाई अड्डे का नाम बदलकर महाराजा बीर बिक्रम हवाई अड्डा रखा गया है। पिछले 10 साल में 6 हवाई अड्डों का नाम बदला गया है, इनमें से 5 का नाम राज्य की जानी-मानी शख्सियत के नाम पर रखे गये हैं। केन्द्र सरकार के पास अभी भी 12 हवाई अड्डों के नाम बदलने का प्रस्ताव विचाराधीन है।

कौन हैं बीर तिकेन्द्रजीत सिंह ?

बीर तिकेन्द्रजीत सिंह पूर्वोत्तर के स्वतंत्र मणिपुर रियासत के राजकुमार थे। उन्हें कोइरेंग के नाम से भी जाना जाता है। वह मणिपुर के राजा चंद्रप्रकाश के चौथे बेटे थे। 29 दिसंबर-1856 को जन्मे टिकेन्द्रजीत सिंह राष्ट्रवादी राजकुमार थे। 20 मई-1886 को महाराजा चंद्रप्रकाश की मृत्यु के बाद सबसे बड़े पुत्र सुरचंद्र मणिपुर के सिंहासन पर आसीन हुए। अन्य राजकुमारों को उत्तराधिकारी, सेना का जनरल और पुलिस प्रमुख नियुक्त किया गया था। सेनापति झलकारी की मृत्यु के बाद तिकेन्द्रजीत सिंह को सेना का जनरल बनाया गया था। उन्होंने अपने राज्य की भूमि को अंग्रेजों के प्रभुत्व से बचाने का प्रयास किया था। राज्य के शासन में अंग्रेजों के बढ़ते दखल से तिकेन्द्रजीत सिंह ने गोरों के इरादों को भांप लिया था कि वह मणिपुर को ब्रिटिश औपनिवेश बनाना चाहते हैं, राजा सुरचंद्र अंग्रेजों से निपटने में सक्षम नहीं थे, इसलिये तिकेन्द्रजीत सिंह ने अन्य समान विचारधारा वाले राजकुमारों एंगुसन, जिलगंबा तथा अन्य के साथ मिलकर 22 सितंबर 1890 को अपने सम्राट के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। इस घटना को मणिपुर के इतिहास में महल-क्रांति और पैलेस विद्रोह के रूप में जाना जाता है। विद्रोह के चलते राजा महल से भाग गये थे और उन्होंने ब्रिटिश निवास में जाकर शरण ले ली थी। इसके बाद जनरल तिकेन्द्रजीत सिंह क्रमशः राजा एवं कुलाचंद्र उत्तराधिकारी बन गये थे। इस विद्रोह के परिणाम स्वरूप 1891 में अंग्रेजों और मणिपुरी सेना के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध में उन्होंने क्रांतिकारी भूमिका निभाई थी। तत्कालीन ब्रिटिश शासन ने तिकेन्द्रजीत सिंह को सिंहासन से हटाकर कुलाचंद्र को मणिपुर का महाराजा बनाने की मान्यता दी और अमल के लिये मणिपुर में अपना आयुक्त नियुक्त किया, इसके बाद कई घटनाक्रमों में कुछ मणिपुरी महिलाओं-बच्चों सहित लगभग 500 लोगों की हत्या कर दी गई, जिससे मणिपुरी लोगों ने अंग्रेजों के विरुद्ध जंग छेड़ दी और उनके लगभग 5 अंग्रेज अधिकारियों की हत्या कर दी।

इसके बाद तिकेन्द्रजीत सिंह को अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिये 13 अगस्त-1891 को इंफाल के एक मैदान में फांसी की सजा सुनाई, जिस मैदान में उन्हें फांसी दी गई थी, उसे बाद में बीर तिकेन्द्रजीत पार्क नाम दे दिया गया। अंग्रेज जानते थे कि तिकेन्द्रजीत के होते हुए वह मणिपुर को अपना औपनिवेशिक नहीं बना सकेंगे, इसलिये उन्होंने रानी विक्टोरिया की ओर से भी तिकेन्द्रजीत सिंह को बचाने के काफी प्रयास किये गये, परंतु ब्रिटिश शासकों ने उन्हें भी गुमराह किया और तिकेन्द्रजीत सिंह नाम का काँटा अपने रास्ते से हटा दिया। इस प्रकार अंग्रेजों से लड़ने वाले क्रांतिकारियों में उनका भी नाम शामिल है। संक्षेप में, वह निडर होकर उपनिवेशवादियों के विरुद्ध लड़े थे, इसलिये उन्हें ‘मणिपुर का शेर’ कहा गया है। यहाँ तक कि भारत के तत्कालीन ब्रिटिश शासन ने भी उनकी तुलना एक भयंकर बाघ से की थी। मणिपुर में 13 अगस्त को बीर तिकेन्द्रजीत सिंह की याद में पैट्रियट दिवस (देशभक्ति दिवस) मनाया जाता है। नवंबर-2007 में तत्कालीन कांग्रेसी सरकार ने राज्य के पहले फ्लाईओवर ब्रिज का उद्घाटन किया था, इसे भी बीर तिकेन्द्रजीत सिंह का नाम दिया गया है।

पूर्वोत्तर का दूसरा सबसे बड़ा हवाई अड्डा है इंफाल

इंफाल से 7 कि.मी. दूर दक्षिण में स्थित यह तिलुहल इंटरनेशनल हवाई अड्डा असम की राजधानी गुवाहाटी के लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के बाद पूर्वोत्तर का दूसरा सबसे बड़ा और व्यस्ततम हवाई अड्डा है। इस हवाई अड्डे से प्रति दिन 10 से अधिक फ्लाइट्स उड़ान भरती हैं। यह एयरपोर्ट देश के बड़े एयरपोर्ट बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, गुवाहाटी, अहमदाबाद, पुणे और हैदराबाद आदि से भी जुड़ा हुआ है। हाल ही में केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने उत्तरी म्यांमार में इंफाल और मांडले टाउनशिप के बीच अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की मंजूरी दी थी।

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