अयोध्या मामले और नमाज को लेकर सुनवाई आज

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Ayodhya Matters

नई दिल्ली: राम जन्मभूमि (Ayodhya Matters) को लेकर चल रहा विवाद अभी भी जारी है। यह विवाद राम मंदिर और मस्जीद को लेकर है। हिन्दुओं के अनुसार यहाँ मंदिर बनना चाहिए और मुसलमानों के अनुसार मस्जीद बनना चाहिए। यह विवाद सुप्रीम कोर्ट में आज 23 मार्च 2018 शुकरवार को दोपहर 2 बजे से सुनवाई शुरू होगी। इससे पहले भी 14 मार्च को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए फैसले में तीसरे पक्षों की सभी 32 हस्तक्षेप याचिकाएं खारिज कर दीं गयी थी और 23 मार्च 2018 के लिए रखी गयी थी । आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट द्वरा फैसला किया जयेगा की (Ayodhya Matters) को तीन सदस्य बेंच के पास रखा जाना चाहिए या फिर हायर बेंच (High Authority) के पास रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का इंटिगरल पार्ट नहीं है,  हाई कोर्ट के इस फैसले पर भी निर्णय लेना होगा।

टाइटल सूट से पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह फैसला किया जयगा की अयोध्या केस को तीन जजों के संविधान पीठ (Constitution bench) को भेजा जयगा या नहीं, जिसके कारण विवाद की सुनवाई पर देरी की आशंका लगाई जा सकती है।  साथ ही टाइटल सूट पर विचार करने से पहले संविधान पीठ (constitution bench) के 1994 में किये गये फैसले पर भी विचार किया जयगा की  मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का इंटिगरल पार्ट नहीं है।

1994 में पाच जज की पीठ द्वरा यह कहा गया था, कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का इंटिगरल पार्ट नहीं है और राम जन्मभूमि (Ayodhya Matters) में यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया था ताकि हिंदू पूजा कर सकें।

1994 के संविधान पीठ फैसले पर हिंदुओं के अधिकार को मान्यता दी गयी थी। साथ ही 2010 में ईलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 2.77 एकड़ की विवादित जमीन का एक तिहाई हिस्सा हिंदू, एक तिहाई मुस्लिम और एक तिहाई राम लला को दिया था।

1994 के फैसले पर विचार करने की मांग मुस्लिम पक्षकार की ओर से राजीव धवन द्वारा की गयी है। उनका कहना यह है कि 1994 के फैसले ने मुस्लिमों के बाबरी मस्जिद में नमाज पढ़ने के अधिकार (right) को छीन लिया है| कारणवश चीफ जस्टिस (Chief Justice) द्वरा आज की सुनवाई का मुख्या मुद्दा यही है।

14 मार्च 2018 को सुनवाई में हस्तक्षेप (interference) होने के कारण याचिकाएं ख़ारिज (dismiss) कर दी गयी थी। सुब्रमण्यम स्वामी द्वाराअपनी याचिका की मौलिकता के बारे में कहा तो विरोधी वकीलों ने इसका विरोध किया। मुस्लिम पक्ष की और से राजीव धवन ने स्वामी जी की याचिका को अनसुनी करने के लिए खे दिया था, जिसपर नाराज़ होकर स्वामी जी ने कहा की पहले भी यह लोग कुर्ता-पजामा के खिलाफ बोल चुके हैं।

दीपक मिश्रा चीफ जस्टिस की अगुवाई में 3 जजों की बेंच सुनवाई की दिशा तय की जयगी।

Ayodhya Matters  इस विवाद को कोर्ट में लगभग 68 वर्ष हो गये है। इस मामले में जुड़े 9,000 पन्नों के दस्तावेज और 90,000 पन्नों में दर्ज गवाहियां पाली, फारसी, संस्कृत और अरबी सहित विभिन्न भाषाओं में दर्ज हैं जिसकी सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा अनुवाद (translate)  करने की मांग भी की गयी थी।

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