सबसे बड़ा अज़ूबा : दुनिया का पहला ‘नरेन्द्र दामोदरदास मोदी’, जिसने मुस्लिम माँ की कोख से जन्म लिया !

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मोदी की दीवानगी में मेनाज़ ने घर-परिवार के विरोध और समाज की भी परवाह नहीं

हलफ़नामा दाखिल कर सरकारी रिकॉर्ड में भी ‘नरेन्द्र दामोदरदास मोदी’ नाम दर्ज कराया

ट्रिपल तलाक पर मोदी सरकार के रुख से अभिभूत है मेनाज़

अहमदाबाद, 26 मई, 2019। भारत सहित पूरी दुनिया में हिन्दू धर्मावलंबियों की संख्या लगभग 110 करोड़ है और स्वाभाविक रूप से हर परिवार में बच्चों के नाम रखने में कहीं न कहीं धर्म से संबंधित, संस्कृति से संबंधित वस्तु, व्यक्ति और पदार्थ का ही उपयोग होता है। उदाहरण के लिए नरेन्द्र नाम ले लीजिए। इसका अर्थ होता है नरों में इंद्र। हिन्दू धर्म में विश्वास रखने वाले करोड़ों परिवारों में करोड़ों लोगों के नाम नरेन्द्र होंगे। अब बात मोदी की भी कर ही लेते हैं, क्योंकि इस समय भारत सहित पूरी दुनिया में इसी नाम का डंका बज रहा है, तो मोदी एक जाति या उपनाम है। इस जाति के जिन-जिन लोगों का नाम नरेन्द्र है, स्वाभाविक रूप से वे सभी नरेन्द्र मोदी हैं। संभव है कि कुछ व्यक्तियों के पिता का नाम दामदोरदास होगा, तो वे स्वाभाविक रूप से नरेन्द्र दामोदरदास मोदी होंगे। अभी हाल में चुनाव आयोग (EC) की ओर से भी अधिकृत रूप से बताया भी गया कि भारत में कुल 211 नरेन्द्र मोदी हैं, परंतु आप कभी सपने में भी कल्पना कर सकते हैं कि किसी NON-HINDU परिवार में भी किसी का नाम नरेन्द्र दामोदरदास मोदी हो सकता है ?

अगर आपने ऐसी कल्पना नहीं की है, तो कोई बात नहीं। अब ऐसी कल्पना करने की आवश्यकता भी नहीं है, क्योंकि भारत में एक नॉन-हिन्दू परिवार में भी नरेन्द्र दामोदारदास मोदी है। इससे भी बड़े आश्चर्य की बात यह है कि इस नरेन्द्र दामोदारदास मोदी का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ है। इस्लाम धर्म के अनुयायी परिवार में गत 23 मई, 2019 को लोकसभा चुनाव परिणाम के दिन जब बच्चे ने जन्म लिया, तो बच्चे की माँ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चौतरफा हो रही विजय की खुशी में अपने बच्चे का नाम नरेन्द्र दामोदरदास मोदी रखने का निर्णय घोषित किया।

जैसा कि आपने शीर्षक में पढ़ा है, यही वह मैजिक है। जी हाँ, एक मुस्लिम परिवार में नरेन्द्र दामोदरदास मोदी का जन्म हुआ है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की ग्राम पंचायत परसापुर महरोर के वज़ीरगंज गाँव में रहने वाली मेनाज़ मुश्ताक अहमद ने चुनाव परिणाम के दिन ही एक बच्चे को जन्म दिया। मेनाज़ ने यह खुशख़बर दुबई में नौकरी करने वाले अपने शौहर मुश्ताक अहमद को सुनाई तो मुश्ताक़ अहमद के मुँह से अचानक शब्द निकले कि घर में ‘नरेन्द्र मोदी आया है क्या ?’ बस, फिर क्या था, मेनाज़ ने तय कर लिया कि उसके बच्चे का नाम नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ही होगा। पहले तो परिवार ने इसका विरोध किया, परंतु मेनाज़ ने सबसे पहले अपने शौहर मुश्ताक़ को भरोसे में लिया और इसके बाद ससुर मोहम्मद इदरिस आदि को भी मना लिया।

पूरा परिवार सहमत होने के बाद बच्चे के जन्म दाखिले में नाम लिखवाने की बारी आई तो मेनाज़ ने बाकायदा स्टेम्प पेपर पर बच्चे का नाम नरेन्द्र दामोदरदास मोदी रखा होने का हलफनामा तैयार किया और ग्राम पंचायत में दिया। इसी के साथ मेनाज़ के बच्चे का नाम आधिकारिक रूप से नरेन्द्र दामोदरदास मोदी हो गया। इस बारे में मेनाज़ के ससुर मोहम्मद इदरिस से मीडिया ने पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि यह उनका पारिवारिक फैसला है, इसमें उनका समाज कोई दखल नहीं दे सकता। उल्लेखनीय है कि मेनाज़ बेगम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुस्लिम महिलाओं के लिये लाये गये तीन तलाक प्रतिबंधक विधेयक से अभिभूत है, मेनाज़ का कहना है कि उसके समाज में व्याप्त इस नियम से समुदाय की महिलाओं के साथ अन्याय होता है, पीएम मोदी ने ऐसी दुःखी महिलाओं के हक में यह विधेयक लाकर बहुत अच्छा काम किया है।

उल्लेखनीय है कि पीएम मोदी की सभी योजनाएँ किसी जाति-समुदाय विशेष के लिये नहीं, अपितु सभी भारतीयों और देशवासियों के लिये हैं। उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुद्रा योजना आदि का कोई भी देशवासी लाभ ले सकता है। पीएम मोदी ने हमेशा से ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा दिया है और सबके समान रूप से विकास के लिये काम किया है। अब केन्द्र में दोबारा जीतने के बाद उन्होंने मुस्लिम समुदाय का विश्वास जीतने के लिये काम करने का भी संकल्प व्यक्त किया है और नया नारा दिया है ‘सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास।’

आपको बता दें कि इन लोकसभा चुनाव में कुल लगभग 67.11 प्रतिशत वोटिंग हुई, जिसमें भाजपा सहित एनडीए को 54.2 प्रतिशत वोट मिले हैं, इसमें मुस्लिम मतों का औसत 10 प्रतिशत है। इसमें भी अकेले उत्तर प्रदेश से भाजपा-एनडीए को 8 प्रतिशत वोट मिले हैं। इसके अलावा वर्तमान लोकसभा में 25 मुस्लिम सांसद चुनकर आए हैं, जिनकी संख्या 2014 में 23 थी। इस प्रकार लोकसभा में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी 5 प्रतिशत हो गई है।

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