गुरदासपुर का गदर : ‘HAND-CONG’ उखाड़ने में सफल होगा ‘ढाई किलो का हाथ’ ?

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रोड शो में उमड़ती भीड़ सनी देओल को दिलाएगी ‘ढाई लाख’ की जीत ?

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

लोकसभा चुनाव 2019 में चार चरणों का मतदान हो चुका है और पाँचवें चरण में 6 मई को मतदान होना है, जिसके लिए चुनाव प्रचार अभियान आज शाम पाँच बजते ही सम्पन्न हो जाएगा, परंतु हम बात करने जा रहे हैं भारत के एकमात्र धर्म आधारित राज्य पंजाब की, जहाँ सातवें और अंतिम चरण में 19 मई को मतदान होना है। पंजाब में लोकसभा की कुल 12 सीटें हैं और मुख्य मुकाबला कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा-BJP)-शिरोमणि अकाली दल (SAD) गठबंधन के बीच है। वैसे तीसरी पार्टी के रूप में आम आदमी पार्टी (आआपा-AAP) भी चुनाव मैदान में है। राज्यव्यापी दृष्टिकोण से देखें, तो पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की प्रतिष्ठा दाव पर लगी है, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की कसौटी होने वाली है, परंतु सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पंजाब की 12 सीटों में से केवल 1 सीट की चर्चा इन दिनों जोरों पर है और वह सीट है गुरदासपुर।

भाजपा-एसएडी गठबंधन के तहत गुरदासपुर लोकसभा सीट भाजपा के खाते में आई है। 22 अप्रैल तक गुरदासपुर भी पंजाब की शेष 11 लोकसभा सीटों की तरह एक सामान्य सीट थी, परंतु 23 अप्रैल को जैसे ही बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल ने भाजपा में प्रवेश किया, गुरदासपुर पंजाब ही नहीं, पूरे देश के लिए हॉट सीट बन गई। सनी जब भाजपा जॉइन कर रहे थे, तभी से ये अटकलें शुरू हो गई थीं कि पार्टी उन्हें गुरदासपुर से टिकट दे सकती है और अंततः ये अटकलें सही साबित हुईं। अब सनी देओल गुरदासपुर से भाजपा के उम्मीदवार हैं।

सनी के रोड शो को देख कर विरोधी दंग

भाजपा उम्मीदवार घोषित होने के साथ ही सनी देओल ने गुरदासपुर में प्रचार अभियान शुरू कर दिया, परंतु कांग्रेस सहित सभी विरोधी सनी देओल के पहले ही रोड शो में उमड़ी भीड़ को देख कर दंग रह गए। यह भीड़ एक रोड शो में उमड़ती, तब तक तो स्वाभाविक मानी जाती कि लोग एक अभिनेता के देखने के लिए उमड़ रहे हैं, परंतु सनी के पहले रोड शो के बाद भी लगातार हो रहे रोड शो में उमड़ रही भारी भीड़ को देखने के बाद यह कहना बेमानी हो जाता है कि लोग केवल अभिनेता को देखने उमड़ रहे हैं। निश्चित रूप से यह भीड़ एक अभिनेता के साथ-साथ अपने नेता यानी उम्मीदवार के समर्थन में उमड़ रही है। सनी के रोड शो की तसवीरें पूरे देश में सुर्खियाँ बँटोर रही है। इस भीड़ से सनी को चुनौती दे रहे निवर्तमान सांसद व कांग्रेस प्रत्याशी सुनील जाखड़ भी दंग हैं और बौखलाहट में उन्होंने यह अनर्गल बयान भी दे दिया, ‘सनी देओल को लाइए या सनी लियोनी को, जीत तो मेरी ही होगी।’ ख़ैर, यह तो 23 मई को ही पता चलेगा कि गुरदासपुर कांग्रेस के विरुद्ध गदर मचाएगा या भाजपा के विरुद्ध ?

आसान नहीं है सनी देओल की राह

फिल्म गदर में पाकिस्तान की सरज़मीं पर जाकर हैण्डपंप उखाड़ लेने वाले सनी देओल के समक्ष चुनावी मैदान में ‘HANDCONG’ उखाड़ने की चुनौती है। हैण्डकांग यानी कांग्रेस और उसका हाथ (चुनावी चिह्न पंजा)। गुरदासपुर का प्रारंभिक चुनावी इतिहास कांग्रेस के साथ है, तो पिछले 31 वर्षों का चुनावी इतिहास भाजपा के पक्ष में है। 1952 से लेकर 2017 तक हुए चुनाव-उप चुनाव के परिणामों का विश्लेषण करने पर स्पष्ट रूप से लगता है कि गुरदासपुर की जड़ों में कांग्रेस बसी हुई है, जिसे 1977 में इंदिरा विरोधी लहर ने पहली बार उखाड़ा फेंका था, परंतु उसके बाद 1998 में भाजपा के पक्ष में इतिहास रचा दिवंगत विनोद खन्ना ने। विनोद ने ही 1998 में पहली बार गुरदासपुर से भाजपा को जीत दिलाई थी। विनोद 1999 और 2004 में भी गुरदासपुर से जीते, परंतु 2009 में उन्हें पहली बार कांग्रेस से हार का सामना करना पड़ा। यद्यपि लोकसभा चुनाव 2014 में मोदी लहर पर सवार विनोद खन्ना फिर एक बार गुरदासपुर पर कब्जा जमाने में कामयाब रहे, परंतु उनके निधन के बाद 2017 में हुए उप चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा से यह सीट छीन ली और सुनील जाखड़ विजयी रहे। गुरदासपुर में 1998 से 2017 तक के चुनावी ट्रेंड का विश्लेषण करने पर स्पष्ट है कि यहाँ की जनता का मन बीच-बीच में भटक कर कांग्रेस के पक्ष में चला जाता है। ऐसे में सनी देओल के समक्ष न केवल दिवंगत विनोद खन्ना की विरासत को बचाने की, अपितु व्यक्तगित देशभक्त नागरिक और अभिनेता की छवि को सिद्ध राजनीति में सफल सफर की शुरुआत करने की भी चुनौती है।

अंतर का रिकॉर्ड टूटे, तभी सम्मानजनक जीत

सनी देओल के समक्ष गुरदासपुर में केवल जीतने की ही नहीं, अपितु जीत के अंतर के रिकॉर्ड को तोड़ने की भी चुनौती है। गुरदासपुर में दिवंगत विनोद खन्ना भी जीत के अंतर के रिकॉर्ड को नहीं तोड़ पाए थे, जो 1980 में कांग्रेस की सुखबंस कौर ने 1,52,739 मतों से जीत कर बनाया था। यद्यपि विनोद खन्ना ने पहली बार जब 1998 में चुनाव लड़ा, तब वे 1,06,833 मतों से जीते, परंतु 1999 में उनकी जीत का अंतर घट कर सिर्फ 1,399 मतों का रह गया। 2014 में विनोद ने फिर छलांग लगाई और जीत का अंतर 1,36,065 मतों का रहा। ऐसे में सनी देओल के समक्ष न केवल विनोद खन्ना के, अपितु 39 वर्ष से बने हुए सुखबंस कौर के रिकॉर्ड को भी तोड़ने की चुनौती है। जिस तरह सनी की सभाओं और उनके रोड शो में भीड़ उमड़ रही है, यदि वह मतों में परिवर्तित होगी, तभी सनी देओल यह रिकॉर्ड तोड़ सकेंगे। सनी को ढाई लाख मतों से जीत कर अपना ढाई किलो का हाथ सिद्ध करना होगा।

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