और विदा हो गया 34 वर्षों तक दुश्मनों के दाँत खट्टे करने वाला ‘बहादुर’ मिग 27

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 27 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत और भारतीय वायुसेना (INDIAN AIR FORCE) अर्थात् IAF के लिए आज शुक्रवार यानी 27 दिसंबर, 2019 का दिन अविस्मरणीय बन गया, क्योंकि पिछले 34 वर्षों से राष्ट्र की सुरक्षा में डटे रहे पराक्रमी मिग 27 विमान को आज अलविदा कह दिया गया। यह वही विमान है, जिसने कारगिल युद्ध से लेकर जब-जब देश पर संकट आया, दुश्मनों के दाँत खट्टे करने में तनिक भी कोताही नहीं बरती।

भारतीय वायुसेना ने अपने लड़ाकू विमान मिग 27 को आज अपनी सेवा से अंतिम विदाई दे दी। यह लड़ाकू विमान वर्ष 1985 से आईएएफ में कार्यरत् था। मिग 27 ने भारत की हवाई सुरक्षा में 34 वर्षों तक योगदान किया, परंतु उसे सर्वाधिक स्मरण किया जाएगा कारगिल युद्ध 1999 में किए गए उसके महान योगदान के लिए। कारगिल युद्ध में मिग 27 विमान ने चुन-चुन कर पाकिस्तानी सैनिकों पर बम गिराए थे। मिग 27 का यह कारनामा भारत के ऑपरेशन विजय में कारगर सिद्ध हुआ था। आज जब मिग 27 विमान को भारतीय वायुसेना की सेवा से निवृत्त किया गया, तब इस मौके पर रक्षा मंत्रालय ने कहा, ‘इन एयरक्राफ्ट्स ने युद्ध काल हो या फिर शांति का दौर भारत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। करगिल के ऐतिहासिक युद्ध में इनका महत्वपूर्ण योगदान था। तब इन फाइटर जेट्स ने दुश्मन के ठिकानों पर चुन-चुन कर रॉकेट और बम बरसाए थे। इसके अलावा ऑपरेशन पराक्रम में भी मि-27 की महत्वपूर्ण भूमिका थी।’ भारतीय वायुसेना ने भी ट्वीट कर मिग 27 के पराक्रम को गौरवशाली ढंग से याद किया।

रूसी लड़ाकू विमान से ‘बहादुर’ बना मिग 27

मिकोयान मिग 27 मूलत: रूसी लड़ाकू विमान है। सोवियत संघ ने इसे मिकोयान-गुरेविच ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन एवं निर्मित किया था। बाद में भारत में हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने मिग 27 को निर्मित किया। मिग 27 के भारतीय संस्करण को ‘बहादुर’ नाम दिया गया। एचएएल ने 167 मिग 27 विमान बनाए थे, जिनमें से 86 का अपग्रेडेशन किया गया था। 1980 के दशक में मिग 27 को भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाना आरंभ किया गया और 1985 से यह पूर्णत: आईएएफ में शामिल हो गया। मिग-27 के SWING WING लड़ाकू विमान है। स्विंग विंग लड़ाकू विमान के विंग को आगे या पीछे सेट किया जा सकता है। इससे फायदा यह होता था कि विंग को आगे या पीछे करके इसकी स्पीड कम या ज्यादा की जा सकती थी। स्पीड कम करने से जमीनी लक्ष्य को निशाना बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता था। इसी विशेषता के कारण भारत ने इसे रूस से ख़रीदा था। मिग 27 में उड़ान से संबंधित विशिष्ट इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और वेपन कंप्यूटर लगे हुए हैं, जिसके चलते इससे अलग-अलग तरह के हथियारों को दागा जा सकता है। यह विमान एक साथ चार हज़ार किलोग्राम के हथियार ले जाने की क्षमता रखता है। यह कम ऊँचाई पर हमला कर सकता है और सटीक निशाना लगा सकता है। यह ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट है यानी यह विमान हवा से ज़मीन पर हमला करने वाला सबसे अच्छा विमान रहा है। इसमें ज़मीनी लक्ष्यों का पता लगाने और उस पर सटीकता के साथ हमला करने के लिए विशेष प्रकार के सेंसर और नेविगेशन के उपकरण लगे हुए हैं। यह करीब 1800 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम है। मिग-27 में तो मिग-23 वाले ही एयरफ्रेम का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इसकी नोज़ में बदलाव किया गया था। नोज़ में इस तरह से बदलाव किया गया था कि इससे पायलट को कॉकपिट से सामने का ज्यादा एरिया नज़र आता था।

गौरवशाली रिकॉर्ड, इसलिए हुआ सेवामुक्त

2002 में मिग-27 लड़ाकू विमान के अपग्रेडेशन का काम शुरू हुआ जो साल 2009 में जाकर पूरा हुआ। अपग्रेडेड मिग-27 में नेविगेशन के जबर्दस्त उपकरण लगाए गए। इसमें अत्याधुनिक सेंसर, डिजिटल मैप जेनरेटर और डिजिटल विडियो रेकॉर्डिंग सिस्टम भी लगाया गया। अपग्रेडेड विमान के कॉकपिट को पायलट फ्रेंडली बनाया गया। सटीक निशाना लगाने के लिए इसमें लेजर डेजिनेटर पॉड और लेजर रेंजर एवं मार्क्ड टारगेट सीकर लगाए गए। भारतीय वायुसेना की सेवा में तीन दशकों का मिग-27 का गौरवशाली रेकॉर्ड रहा है। करगिल समेत कई अभियानों में इसने अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों में भारत की ओर से इस विमान ने हिस्सा लिया। इसको सेवामुक्त करने का सबसे बड़ा कारण इसकी इंजन में तकनीकी खामी का होना और दूसरा इसके कलपुर्जे का नहीं मिलना है। इंजन की तकनीकी खामी की वजह से इस विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की कई घटनाएं सामने आईं। इंजन की तकनीकी खामी को दूर करने की कोशिश की गई लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली। इसी वजह से भारतीय वायुसेना तीन साल पहले ही इन विमानों को सेवामुक्त करना चाहती थी लेकिन नए लड़ाकू विमान मिलने में देरी के कारण मजबूरी में इसे उड़ाना पड़ रहा था।

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