आखिर Feminism को लेकर इतना कन्फ्यूजन क्यों है ?

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हमारी सोसाइटी में Feminism को लेकर आए दिन बहस होती रहती है। लेकिन अगर किसी से आप पूछे कि Feminism शब्द का मतलब क्या है तो शायद आधे से ज्यादा लोग गलत जवाब देंगे। लोगों को जानकारी नहीं है शायद यही वजह है कि इसके अलग-अलग मायने निकाल लिए गए हैं।

कुछ लोगों की नजर में फेमिनिज्म का मतलब ऐसे खुले विचारों वाली लड़कियों से होता है, जो मॉर्डन दिखाई देती है, सिगरेट पीती है वगैरह वगैरह। वहीं कुछ लोगों का सोचना है कि फेमिनिज्म का मतलब ऐसे युवाओं से है, जिनमें लड़कियों वाले गुण होते हैं। लेकिन हकीकत में कहानी कुछ और ही है। दरअसल फेमिनिज्म का मतलब ऐसे लोगों से है, जो महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार देने के पक्ष में हैं। या कहें कि लिंग समानता (Gender Equality) की बात करते हैं। फिर चाहे वो कोई महिला हो या फिर कोई पुरुष।

Feminism

हमारे समाज में महिलाओं के कंधों पर घर की जिम्मेदारी होती है, लेकिन हमारे पुरुषवादी समाज ने इसे महिलाओं की कमजोरी बनाकर उन्हें घर में कैद कर दिया। जिसके बाद महिलाओं ने भी इसे अपनी नियती मानकर जीना शुरु कर दिया। लेकिन भारत में आर्थिक तरक्की के साथ ही शिक्षा का प्रचार प्रसार हुआ और उसी का नतीजा है कि अब महिलाएं भी घर की चारदीवारी से निकलकर अपनी जगह बनाना चाहती हैं। पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर समान अधिकार देने की बात करती हैं। यही वजह है कि दुनिया में Feminism शब्द का आगमन हुआ।

लेकिन हैरानी की बात ये है कि फेमिनिज्म नामक ट्रेन अपने ट्रैक से उतरकर गलत ट्रैक पर चली गई। जिसका नतीजा ये हुआ कि इस शब्द के गलत मायने निकाल लिए गए। बता दें कि फेमिनिज्म की शुरुआत साल 1920 में अमेरिका से हुई, जहां एक सिगरेट कंपनी ने फेमिनिज्म को स्मोकिंग से जोड़ दिया। कंपनी का कहना था कि जो लड़कियां स्मोकिंग करती हैं, वो फेमिनिस्ट हैं। कंपनी ने यह सब मार्केटिंग स्ट्रैटेजी के तहत किया, लेकिन यहां से फेमिनिज्म का गलत दिशा में जाने की शुरुआत हो गई। अब महिलाएं स्मोकिंग, देर रात तक घूमने- फिरने जैसी बातों को फेमिनिज्म से जोड़ रही हैं।

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इसका उदाहरण भारत के एक कानून से मिल सकता है। बता दें कि भारतीय कानून में दहेज के खिलाफ सेक्शन 498A नामक कानून है। जिसके द्वारा महिलाएं अपने ससुराल वालों पर दहेज की मांग का आरोप लगाकर पूरे परिवार को जेल भिजवा सकती हैं। एक रिसर्च के मुताबिक भारत में शादीशुदा पुरुषों के खुदकुशी करने का सबसे कारण भी ये ही है।

हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री जायरा वसीम ने हवाई यात्रा के दौरान एक पुरुष पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। जिसके बाद सोशल मीडिया हो या फिर प्रिंट या इलेक्ट्ऱनिक मीडिया सभी जगह महिलाओं ने फेमिनिज्म का झंडा बुलंद कर दिया। फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि अभी तक कि जांच में आरोपी पर यह आरोप साबित नहीं हो पाया है। ऐसे में अगर वह व्यक्ति निर्दोष हुआ तो फिर उसे जो इतना तनाव झेलना पड़ा उसकी भरपाई कौन करेगा ?

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बहरहाल यहां फेमिनिज्म पर बात करने का मतलब महिलाओं की बुराई करना या फिर पुरुषों का समर्थन करना नहीं है। दरअसल हमारा मकसद ये है कि लोगों के बीच फेमिनिज्म को लेकर कन्फ्यूजन दूर हो ताकि फेमिनिज्म की ये बहस जो गलत रास्ते पर चली गई है, वो सही रास्ते पर लौटे।

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