सुमित्रा की ‘सुमधुर शांति’, सुषमा के ‘सरपट सुर’ और खडगे की खनकती ‘खड्ग’ से सूनी रहेगी 17वीं लोकसभा

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आडवाणी-जोशी-उमा और पासवान भी नहीं होंगे नई लोकसभा में

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 28 मई, 2019। 17वीं लोकसभा का पूरा परिदृश्य बदला-बदला-सा नज़र आ रहा है। यह परिवर्तन लोकसभा चुनाव के कारण आया है, जिसमें कई पुराने और दिग्गज चेहरों का स्थान नये चेहरों ने ले लिया है। लोकसभा चुनाव में कई दिग्गजों को या तो उनकी पार्टी ने चुनाव मैदान में नहीं उतारा या कुछ दिग्गज चुनाव हार जाने के कारण 17वीं लोकसभा में नज़र नहीं आएँगे, वहीं उनके स्थान पर कुछ नये और युवा चेहरे लोकसभा की शान बढ़ाएँगे।

लोकसभा में हमेशा दिखाई देने वाले भाजपा के लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, सुष्मा स्वराज, सुमित्रा महाजन, उमा भारती, हुकुमदेव नारायण, एनडीए के सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा, फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा जैसे दिग्गज नेता इस नई लोकसभा में नदारद रहेंगे। इनके अलावा कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुष्मिता देव, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी और मुलायम सिंह यादव की बहू डिम्पल यादव जैसे युवा चेहरे भी नहीं दिखेंगे। हालाँकि इनमें से कई नेता दूसरे दरवाजे से संसद पहुँच जाएँगे, परंतु वह लोकसभा में नहीं राज्यसभा में ही नज़र आ सकेंगे।

इसी प्रकार कुछ नये चेहरे लोकसभा की शान बढ़ाएंगे। इनमें भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह, पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर, फिल्म स्टार सनी देओल, भोजपुरी स्टार रवि किशन, बंगाली अभिनेत्री नुसरत जहां आदि शामिल हैं।

लालकृष्ण आडवाणी

1970 में पहली बार राज्यसभा के सदस्य बने लालकृष्ण आडवाणी भाजपा के भीष्म पितामह कहलाते हैं। उन्होंने पहली बार 1991 में गुजरात की गांधीनगर लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा में प्रवेश किया था। 1998 में पहली बार अपनी पार्टी को केन्द्र की सत्ता तक पहुँचाया। इसके बाद 1999 से लेकर 2014 तक लगातार 4 चुनाव जीतकर लोकसभा में वर्षों से लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते रहे हैं, परंतु इस बार पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसलिये उनके स्थान पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर लोकसभा में प्रवेश करेंगे।

डॉ. मुरली मनोहर जोशी

डॉ. जोशी भाजपा के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। इस बार लोकसभा की नज़रें उन्हें भी तलाश करती नज़र आएँगी। वह दो बार भाजपा के अध्यक्ष रहे हैं। उनके भाजपा के अध्यक्ष पद पर रहते हुए ही अयोध्या में बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा तोड़ा गया था। वह 1996 से 2014 तक लोकसभा के सदस्य रहे हैं। 1996 में 13 दिन की वाजपेयी सरकार में उन्होंने गृहमंत्री का पद संभाला था। 1999 में बनी वाजपेयी सरकार में वह मानव संसाधन विकास मंत्री रहे। इस बार पार्टी ने उन्हें भी चुनाव नहीं लड़वाया।

सुषमा स्वराज

निवर्तमान मोदी सरकार में विदेश मंत्री रहीं भाजपा की तेज-तर्रार नेता सुषमा स्वराज भाजपा की शीर्ष नेताओं में सम्मिलित हैं। छात्र संगठन एबीवीपी से राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाली हरियाणा में जन्मी सुषमा स्वराज 1990 में पहली बार सांसद चुनी गई थी। वह वाजपेयी और आडवाणी के करीबी नेताओं में शुमार हो गई थी। लोकसभा में वह विपक्ष की नेता भी रही हैं, परंतु इस बार उन्होंने स्वयं चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया, जिसके चलते वह भी लोकसभा में नज़र नहीं आएँगी।

सुमित्रा महाजन

निवर्तमान मोदी सरकार के कार्यकाल में सुमित्रा महाजन लोकसभा की अध्यक्ष थीं। मध्य प्रदेश की इंदौर लोकसभा सीट से लगातार आठ बार सांसद चुनकर लोकसभा में पहुँचने वाली सुमित्रा महाजन पहली बार 1989 में लोकसभा की सदस्य चुनी गई थी। इसके बाद 2014 तक लगातार लोकसभा में पहुँचती रही हैं। 75 वर्ष की आयु हो जाने पर इस बार पार्टी ने उन्हें चुनाव टिकट नहीं दिया, जिसके चलते वह भी 17वीं लोकसभा में नज़र नहीं आएँगी।

हुकुमदेव नारायण

भाजपा के एक और दिग्गज नेता बिहार के हुकुमदेव नारायण यादव 1977 में पहली बार सांसद चुने गये थे, इसके बाद से वह लगातार लोकसभा में आते रहे हैं। वह लोकसभा में जबरदस्त स्पीच के लिये पहचाने जाते हैं। उनकी स्पीच के वीडियो यूट्यूब पर काफी वायरल होते रहे हैं। विरोधी भी उनकी स्पीच और व्यवहार के कायल हैं, परंतु अब वह भी वयोवृद्ध हो चुके हैं, इसलिये चुनाव नहीं लड़े। इस बार भाजपा के टिकट पर उनके बेटे अशोक यादव चुनकर संसद में पहुँचे हैं।

उमा भारती

राम मंदिर आंदोलन से भारतीय राजनीति में विशेष पहचान बनाने वाली साध्वी उमा भारती ने भी इस बार के लोकसभा चुनाव में भाग नहीं लिया। वह पहली बार 1989 में सांसद बनी। मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं, परंतु उन्हें एक साल के भीतर कुर्सी छोड़नी पड़ी, जिससे उन्होंने भाजपा से बगावत कर दी थी और नई पार्टी भी बनाई थी। हालाँकि नई पार्टी के साथ वह राजनीति में सफल नहीं हो सकीं। इसके बाद भाजपा में वापस लौटी और मोदी सरकार में मंत्री बनी थी।

मल्लिकार्जुन खड़गे

कांग्रेस के दिग्गज नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार लोकसभा का चुनाव हार गये हैं। वह 2009 में पहली बार लोकसभा सदस्य चुने गये थे और दूसरी बार 2014 में चुने गये थे। उन्हें पार्टी ने कांग्रेस संसदीय दल का नेता बनाया था।

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