जम्मू कश्मीर : ‘धारा’ नहीं, ‘धरा’ है लक्ष्य, अब मिटेगा PoK-CoK का भी कलंक !

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* देशवासियों की भावनाओं से कई कदम आगे चल रही सरकार

* वह दिन दूर नहीं, जब ‘हरी सिंह वाला कश्मीर’ भारत का होगा

विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 6 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। जम्मू-कश्मीर में ‘कुछ बड़ा’ को लेकर पिछले एक सप्ताह से चल रही सरगर्मियों के दौरान चंद ‘निराशावादी’ लोगों को लग रहा था कि ‘कुछ नहीं होगा’, वहीं देश का बहुसंख्य ‘आशावादी’ वर्ग भाँप चुका था कि जम्मू-कश्मीर में ‘कुछ बड़ा’ होने वाला है, परंतु 5 अगस्त, 2019 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के गृह मंत्री अमित शाह ने जो घोषणा की, उसने निराशावादियों को घोर निराशा में डाल दिया और आशावादियों को उम्मीद से कहीं अधिक मिलने की अनुभूति कराई।

जब जम्मू-कश्मीर को लेकर दिल्ली से लेकर श्रीनगर तक हलचलें चल रही थीं, उसी दौरान गत 3 अगस्त को ही मैंने इस समाचार का शीर्षक गढ़ लिया था, क्योंकि पिछले 25 वर्षों के अपने पत्रकारिता के करियर में मैंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) तथा उसके नेताओं विशेषकर अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बारे में जितना कुछ जाना, सुना, पढ़ा, उनके क्रियाकलापों को देखा, उससे मैं यह अनुमान लगाने में 72 घण्टे पहले यानी 3 अगस्त, 2019 को ही सफल हो गया, जो बात आज 6 अगस्त 2019 को गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कही। अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में आज जो कहा, ‘मैं जब जम्मू-कश्मीर की बात करता हूँ, तो उसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिनआ जाते हैं।’ अक्साई चिन को यहाँ हम पीओके की तरह चीन अधिकृत कश्मीर यानी CoK कहना चाहेंगे। सीओके अब जम्मू-कश्मीर नहीं, अपितु केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा बन गया है।

इसीलिए जब पूरे देश में ये अटकलें लगाई जा रही थीं कि मोदी सरकार धारा 35ए के साथ छेड़छाड़ करने वाली है, तब मैंने अमित शाह के मन में छिपी यह बात 72 घण्टे पहले ही पढ़ ली थी और मेरा यह अनुमान बिल्कुल सटीक निकला कि वर्तमान शासन धुरा संभालने वाले मोदी-शाह की जोड़ी का जम्मू-कश्मीर को लेकर अंतिम लक्ष्य धारा 370 तक सीमित नहीं है, अपितु पूरे जम्मू-कश्मीर की धरा विस्तृत है।

सावधान हो जाएँ इमरान और ज़िनपिंग !

वैसे, अमित शाह ने जो आज कहा, वह कुछ नया नहीं है। इसके बावजूद शाह के वक्तव्य में एक नवीनता यह है कि उन्होंने संसद में सीना चौड़ा करके कहा कि वे जम्मू-कश्मीर की बात करते हैं, तो उस जम्मू-कश्मीर की बात करते हैं, जो भारत के मानचित्र में दिखाई देता है। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक के साथ भले ही भारतीय मानचित्र में जम्मू-कश्मीर के मानचित्र से लद्दाख निकल गया हो, परंतु शेष जम्मू-कश्मीर के मानचित्र में आज भी पीओके और अक्साई चिन यानी सीओके शामिल है। पीओके पर पाकिस्तान ने, जबकि अक्साई चिन पर चीन ने कब्जा कर रखा है। अमित शाह की इस उद्घोषणा से मोदी सरकार और अमित शाह के इरादे बिल्कुल साफ हो गए हैं कि मोदी सरकार का मिशन कश्मीर धारा 370 पर नहीं थमने वाला। मोदी सरकार भविष्य में जम्मू-कश्मीर को लेकर इससे भी बहुत कुछ बड़ा करने वाली है, जो पाकिस्तान और चीन के लिए चेतावनी समान होगा। जम्मू-कश्मीर को लेकर मोदी सरकार ने एक बड़ी घरेलू लड़ाई तो जीत ली है, परंतु अब उसका अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय लड़ाई होगा। इस अंतिम लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ-साथ गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है, क्योंकि मोदी सरकार अब उस पूरे जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाने के प्रयासों में जुटने जा रही है, जिस पूरे जम्मू-कश्मीर का महाराजा हरी सिंह ने 26 अक्टूबर, 1947 भारत में विलय किया था। 26 अक्टूबर, 1947 को महाराजा हरि सिंह के भारत में विलीन कराए गए कश्मीर में पीओके और सीओके भी भारत का अभिन्न अंग थे।

कैसे बने पीओके और सीओके ?

अब आपको थोड़ा-सा पीछे लिए चलते हैं। आपके मन में प्रश्न उठ रहा होगा कि जब पूरे जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ था, तो आज उसके दो बड़े हिस्से पाकिस्तान और चीन के कब्जे में कैसे हैं ? दरअसल पाकिस्तान ने 1947 में जब कश्मीर को हड़पने के लिए कबाइलियों के भेष में सेना भेज कर हमला किया, तब महाराज हरी सिंह भारत के साथ संधि करने पर विवश हो गए। बदले में भारत ने सैन्य सहायता दी। इस संधि के अनुसार महाराजा हरी सिंह ने पूरे जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय कराया था। इस संधि के अनुसार कश्मीर के रक्षा, विदेश और संचार मामले भारत के अधीन रहेंगे, जबकि अन्य विषयों पर जम्मू-कश्मीर राज्य अपना अधिकार रहेगा। इस अधिकृत विलय से तिलमिलाए पाकिस्तान ने 1947 में हमला कर कश्मीर का बड़ा हिस्सा कब्जा लिया। पाकिस्तान ने इसे दो भागों में बाँट दिया। एक भाग आज़ाद कश्मीर, जबकि दूसरा भाग गिलगिट-बाल्टिस्तान। पीओके को आज़ाद कश्मीर कहा जाता है। आज़ाद कश्मीर के शासकों ने गिलगिट-बाल्टिस्तान का एक हिस्सा पाकिस्तान को दे दिया। यह सब कुछ पाकिस्तान ने ही किया। आज़ाद कश्मीर केवल दिखावे के लिए है। वहाँ हुकूमत पाकिस्तान की ही चलती है। इसी तरह अकसाई चिन भी भारत के ही जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है। चीन ने 1950 में अक्साई चिन पर कब्जा कर लिया था। उसने अक्साई चिन को प्रशासनिक रूप से शिनजियांगग प्रांत के काश्गर विभाग के कार्गिलिक जिले का हिस्सा बनाया है। चीन हक़ीकत में इस क्षेत्र के नाम को लेकर एक गुमराह ज़िद पर अड़ा है। अक्साई चिन का नाम तुर्की भाषा उईगुर से आया है। उईगुर भाषा में अक़ का अर्थ सफेद और साई का अर्थ घाटी या नदी की वादी होता है। उईगुर भाषा में चोअल शब्द है, जिसका अर्थ वीराना या रेगिस्तान होता है। चोअल शब्द का उल्लेख पुरानी ख़ितानी भाषा में चिन था। अक्साई चिन के नाम का अर्थ सफेद पथरीली घाटी का रेगिस्तान निकलता है। चीन की सरकार इस क्षेत्र पर अधिकार जतलाने के लिए चिन का अर्थ चीन का सफेद रेगिस्तान निकालती है, परंतु भारत इस दावे को नहीं मानता। भारत अक्साई चिन को जम्मू-कश्मीर का ही हिस्सा मानता है।

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