अब ये सिगरेट पीना पड़ेगा महंगा : पकड़े जाने पर होगी जेल और लगेगा जुर्माना

Written by

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 18 सितंबर 2019 (युवाPRESS)। मोदी सरकार ने अब E CIGARETTE और E HUKKA पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया है। यानी कि अब अगर आप ई सिगरेट या ई हुक्का पीते हुए पकड़े गये तो आपको भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल भी हो सकती है। इस प्रकार अब आपको सिगरेट का कश लगाना महंगा पड़ सकता है।

मोदी सरकार के मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई बैठक में ई सिगरेट और ई हुक्का पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया है। बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पत्रकार परिषद में सरकार की ओर से लिये गये फैसले की घोषणा की। सरकार के इस फैसले के बाद अब पूरे देश में ई सिगरेट का उत्पादन करने, बेचने, आयात-निर्यात करने, प्रचार करने, संग्रह करने और उपयोग करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इसी प्रकार ई हुक्का पर भी बैन लगा दिया गया है। सीतारमण के अनुसार बच्चों और युवाओं में ई सिगरेट का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा था, जो चिंताजनक था। उन्होंने कहा कि अभी ई सिगरेट की लत नई-नई है, इसलिये सरकार ने इसे शुरुआत में ही रोकने का फैसला किया है। इसके बाद अब पहली बार ई सिगरेट का इस्तेमाल करने पर आरोपी को एक लाख रुपये का जुर्माना या एक साल की सजा अथवा दोनों हो सकते हैं। जबकि दूसरी बार पकड़े जाने पर 5 लाख रुपये का जुर्माना और 3 साल की सजा अथवा दोनों हो सकते हैं। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने सही समय पर सही कदम उठाया है, ताकि ई सिगरेट के चलन को बढ़ने से रोका जा सके। उन्होंने कहा कि भारतीय रिसर्च संस्थानों ने ई सिगरेट को लेकर अनुसंधान किये हैं। इसके बाद एम्स, टाटा और बाकी प्रमुख संस्थानों तथा डॉक्टरों ने इससे होने वाले नुकसानों के चलते इस पर बैन लगाने की सिफारिश की थी। सरकार की टेकनीकल कमेटी ने इससे होने वाले नुकसानों की पूरी जाँच की है, इसके बाद ही यह प्रतिबंध लगाया गया है।

क्या होती है ई सिगरेट ?

ई-सिगरेट बैटरी से संचालित होने वाली एक ऐसी डिवाइस है, जिसमें लिक्विड के रूप में निकोटीन व अन्य हानिकारक कैमिकल्स का घोल होता है। जब इसका कश लगाया जाता है तो इसमें मौजूद हीटिंग डिवाइस घोल को गर्म करके भाप (VAPOUR) में तब्दील करती है। इसीलिये इसे स्मोकिंग नहीं बल्कि वेपिंग (VAPING) कहा जाता है। आज कल कुछ लोग ई सिगरेट का इस्तेमाल करने लगे हैं और इसके बारे में भ्रमित हो रहे हैं। उनका मानना है कि धुँआ देने वाली सिगरेट से यह इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट कम नुकसानदायी है और सेहत को कम नुकसान पहुँचाती है, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है। ई- सिगरेट भी सेहत पर उतना ही बुरा असर डालती है।

दुनिया के 30 देशों में प्रतिबंधित है ई-सिगरेट

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इसको लेकर कह चुका है कि इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट से भी पारंपरिक सिगरेट जितना ही नुकसान होता है। 2017 में डब्ल्यूएचओ की इस रिपोर्ट के बाद ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस, सिंगापोर, कोरिया (डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक), श्रीलंका, थाईलैंड, ब्राज़ील, मेक्सिको, उरुग्वे, बहरीन, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे दुनिया के 30 देशों की सरकारें ईएनडीएस पर प्रतिबंध लगा चुकी हैं। अब भारत भी इन देशों की सूची में शामिल हो गया है।

भारत में ऑनलाइन खरीदी जाती है ई-सिगरेट

भारत में ई-सिगरेट के लगभग 400 ब्राण्ड्स मौजूद होने की बात कही जा रही है। हालाँकि इनमें से भारत में ई-सिगरेट का कोई ब्राण्ड अभी तक नहीं बनता है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में ई सिगरेट को आयात किया जाता है और बाजार में इसके लगभग 150 फ्लेवर मिलते हैं। हालांकि दूसरी ओर दिल्ली स्थित एक एनजीओ (NGO) कंज्यूमर वॉयस के अनुसार भारत में 36 से अधिक अवैध ई-सिगरेट कंपनियाँ काम कर रही हैं, जिनके पास कोई आधिकारिक अनुमति नहीं है। भारत में 30 से 50 प्रतिशत ई-सिगरेट्स ऑनलाइन बिकती हैं और चीन इसका सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश है।

पहली बार 2004 में चीन में बिकी थी ई-सिगरेट

यह डिवाइस पहली बार 2004 में चीन के बाजारों में तंबाकू के स्वस्थ विकल्प के रूप में बेची गई थी। डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2005 से ही ई-सिगरेट उद्योग एक वैश्विक व्यवसाय बन गया था और अभी दुनिया में इसका लगभग 3 अरब डॉलर का बाजार है।

सरकार ने क्यों लगाया ई-सिगरेट, ई-हुक्का पर प्रतिबंध ?

विशेषज्ञों ने मोदी सरकार के इस प्रतिबंध के फैसले को सही ठहराया है और उसका स्वागत किया है। उल्लेखनीय है कि इसी साल ई-सिगरेट से अमेरिका में दो लोगों की मृत्यु के बाद दुनिया भर में इस तरह की वस्तुओं के इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ी थी। एक व्यक्ति की मृत्यु जून और दूसरे की अगस्त में हुई थी।

वाणिज्य मंत्रालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय से देश में ई-सिगरेट के विनिर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिये कानून बनाने की माँग की थी, जिसमें कहा था कि देश में ऐसा कानून नहीं होने से इसके आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना संभव नहीं होगा।

इसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने वाणिज्य मंत्रालय को इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) के आयात पर प्रतिबंध लगाने के लिये एक अधिसूचना जारी करने के लिये कहा था। इसमें ई सिगरेट के साथ ही फ्लेवर्ड हुक्का पर प्रतिबंध लगाने की भी बात कही गई थी।

अगस्त 2018 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों (UT) को इलेक्ट्रोनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम के विनिर्माण, बिक्री और आयात को रोकने के लिये एक एडवाइज़री जारी की थी, क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट ने देश में ई-सिगरेट के उभरते नये खतरे से निपटने में देरी करने पर कड़ी आपत्ति जताई थी।

इसके बाद इसी साल अप्रैल में 24 राज्यों व तीन केन्द्र शासित प्रदेशों के लगभग 1,000 से अधिक डॉक्टरों ने भारत में ई सिगरेट व ई हुक्का के युवाओं में महामारी बनने से पहले प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया था।

पंजाब राज्य में इस ई-सिगरेट को पहले से ही अवैध घोषित किया जा चुका है। पंजाब में इसके चलते ई-सिगरेट के विक्रेताओं के खिलाफ मामले भी दर्ज हुए हैं। अप्रैल-2016 में पंजाब की सत्र अदालत ने मोहाली के एक विक्रेता को अवैध रूप से ड्रग बेचने के जुर्म में 3 साल की सजा सुनाई थी, वह ई-सिगरेट ही बेचता था। यह भारत में इस तरह का पहला मामला था।

Article Categories:
Health · News

Comments are closed.

Shares