आयकर छूट सीमा 5 लाख रुपए कर मध्मम वर्ग के मतदाताओं का आभार व्यक्त करेगी मोदी सरकार ?

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अहमदाबाद, 1 जून, 2019। केन्द्र में मोदी सरकार की शानदार वापसी हुई है। 30 मई को नई सरकार के गठन के बाद से ही सरकार पहले पूर्ण बजट की तैयारियों में जुट गई है और इस बार नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन बजट पेश करने वाली हैं। देश के मतदाताओं ने जिस तरह से पीएम मोदी और उनकी भाजपा समेत एनडीए को झोली भर-भरके वोट दिये हैं, उससे पूरी मोदी सरकार और एनडीए मतदाताओं का आभारी है। ऐसे में मोदी सरकार से उम्मीद की जा रही है कि जिस मध्यम और उच्च मध्यम वर्ग ने सबसे ज्यादा वोटिंग की है, उसके लिये मोदी सरकार के बजट में कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की जा सकती हैं, इसमें सबसे महत्वपूर्ण है 5 लाख रुपये तक की आय को आयकर से मुक्त करना। यदि ऐसा होता है तो देश के 3 करोड़ करदाताओं को 5 लाख करोड़ रुपये का फायदा होगा।

लोकसभा चुनाव-2019 से पहले 1 फरवरी-2019 को पिछली मोदी सरकार में वित्त मंत्री अरुण जेटली की जगह कार्यभार संभाल रहे पीयूष गोयल ने 2019 की प्रथम तिमाही तक सरकार का खर्च चलाने के लिये अंतरिम बजट पेश किया था। उसमें उन्होंने ढाई लाख रुपये तक का रिबेट देने की घोषणा की थी। नई मोदी सरकार के पूर्ण बजट में इस रिबेट को आयकर छूट में बदला जा सकता है। इसके लिये सरकार को अंतरिम बजट के प्रस्ताव में संशोधन करना होगा।

आयकर विभाग के सूत्रों ने बताया कि वित्त वर्ष 2018-19 का बजट 31 मार्च-2019 को पूरा हो गया। इसके बाद अगले वित्त वर्ष अप्रैल से मार्च के लिये सरकार नया बजट संसद में पेश करती है, परंतु इस वर्ष लोकसभा के चुनाव के कारण सरकार ने पहली तिमाही का अंतरिम बजट पेश किया था, जिसमें आयकर छूट से सम्बंधित प्रस्ताव लाया गया था, वास्तव में वह छूट नहीं, अपितु रिबेट था। रिबेट का अर्थ है कि यह सिर्फ उन आयकर दाताओं पर लागू होगा, जिनकी वार्षिक आय 5 लाख रुपये तक है। यदि आयकर दाता की आय 5 लाख रुपये से 10 रुपये भी अधिक हुई तो उसे आयकर मुक्त प्रारंभिक सीमा ढाई लाख से अधिक जितनी भी आय होगी, उस पूरी रकम पर आयकर देना होगा और वह सेस व सरचार्ज के साथ। हालाँकि 5 लाख से अधिक आय वाले लोगों को कई तरह के निवेश के माध्यम से अपनी आय को रिबेट के दायरे में लाने की सहूलियत दी गई है।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अंतरिम बजट में घोषित रिबेट को आयकर छूट में बदलने के बारे में आधिकारिक स्तर पर चर्चा शुरू हो चुकी है। अभी नये वित्तमंत्री के नाम की घोषणा का इंतज़ार किया जा रहा है, जिसके बाद इस दिशा में तेजी से काम होगा। एक अधिकारी ने कहा कि फैसला चाहे रिबेट का हो या आयकर छूट का, परंतु पूर्ण बजट में इस प्रस्ताव को शामिल तो करना ही होगा, क्योंकि देश की जनता भी सरकार के बजट का बेसब्री से इंतज़ार कर रही है।

उल्लेखनीय है कि पियूष गोयल ने आयकर रिबेट की घोषणा तो की थी, परंतु टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया था। अर्थात् 5 लाख से अधिक आय वाले करदाताओं को पुराने टैक्स स्लैब के अंतर्गत ही टैक्स भरपाई करना होता है। अब नई मोदी सरकार इस टैक्स स्लैब में भी कई तरह के बदलाव कर सकती है। जनता आशा कर रही है कि पूर्ण बजट में अंतरिम बजट के दौरान की गई घोषणा पर अमल किया जाएगा और लोगों को 5 लाख तक की आय पर आयकर से मुक्ति दी जाएगी। इससे पहले ढाई लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले आयकर से मुक्त थे। ढाई लाख से अधिक और 5 लाख तक की आय वालों को 5 प्रतिशत की दर से आयकर भरपाई करना होता था।

5 लाख रुपये तक की आय को आयकर से मुक्त करने की सरकार की घोषणा से देश के 3 करोड़ आयकर दाताओं को लगभग 5 लाख करोड़ रुपये का फायदा होगा। अभी देश में लगभग 6.3 करोड़ आयकर दाता हैं। जबकि देश का कुल कर संग्रह लगभग 11 लाख करोड़ रुपये है। इसमें वह कर भी शामिल है, जो कंपनियाँ चुकाती हैं। 10 लाख पंजीकृत कंपनियों में से 80 प्रतिशत से भी अधिक कंपनियाँ नुकसान में चल रही हैं अथवा बहुत कम आय दर्शाती हैं, परंतु कुल कर संग्रह में आधे से ज्यादा कर कंपनियों से ही आता है। इस प्रकार 3 करोड़ करदाताओं से लगभग आधा यानी 5 लाख करोड़ रुपये का कर संग्रह आता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि हमारे देश में मतदाताओं की तुलना में करदाताओं का अनुपात बेहद खराब है। एक इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार हर 100 मतदाताओं के बीच मात्र 7 कर दाता हैं। जबकि स्वीडन और नोर्वे में यह संख्या 100 और अमेरिका में 60 से अधिक है। सम्पन्न अर्थ व्यवस्था बनने के लिये यह अनुपात कम से कम 50 प्रतिशत होना चाहिये।

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