अबकी बार-धर्मांतरण पर वार : 7 राज्यों तक सीमित प्रतिबंध पूरे देश में लागू करने की तैयारी में मोदी सरकार

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* राज्यसभा का ‘भय’ दूर, उत्साह है भरपूर

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 10 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने पहले कार्यकाल यानी 26 मई, 2014 से 10 मार्च, 2019 (लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा) के दौरान कई विधेयकों को संसद से पारित कराने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, क्योंकि मोदी सरकार के पास लोकसभा में तो बहुमत था, परंतु राज्यसभा में नहीं था। यही कारण है कि ट्रिपल तलाक विरोधी बिल सहित अनेक विधेयक कानून नहीं बन पाए।

परंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 30 मई, 2019 से आरंभ हुआ दूसरा कार्यकाल अब तक अनेक ऐतिहासिक निर्णयों का साक्षी बन चुका है और मोदी सरकार की इन सफलताओं में राज्यसभा का बहुत बड़ा योगदान है। वैसे अधिकृत रूप से आज भी राज्यसभा में मोदी सरकार के पास बहुमत नहीं है, परंतु इसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष व गृह मंत्री अमित शाह के ऐसे रणनीतिक व राजनीतिक दाव चले कि ट्रिपल तलाक विरोधी विधेयक से लेकर जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक और धारा 370 की समाप्ति का संकल्प राज्यसभा से निर्विघ्न पारित हो गए। राज्यसभा में मोदी सरकार को आश्चर्यजनक रूप से कई विरोधी और धुर-विरोधी दलों का साथ मिला। सामाजिक सुधार से लेकर राष्ट्रवाद की अलख जगाने वाले विधेयकों पर राज्यसभा में विपक्ष पूरी तरह बिखर गया और मोदी सरकार के अनेक विरोधी और धुर-विरोधी राजनीतिक दलों ने मोदी सरकार का साथ दिया।

मोदी सरकार के हौसले बुलंद

राज्यसभा में बहुमत के अभाव के बावजूद अनेक विधेयक पारित कराने में मिली सफलता से मोदी सरकार के हौसले बुलंद हैं और इसीलिए अब मोदी सरकार धर्मांतरण विरोधी विधेयक लाने की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने धर्मांतरण विरोधी विधेयक पर काम करना आरंभ कर दिया है। यह विधेयक संसद के अगले सत्र में लाए जाने की संभावना है। कहा जाता है कि मोदी सरकार धर्मांतरण विरोधी विधेयक को भी देश में एक धार्मिक और सामाजिक सुधार के रूप में पेश करेगी, जिसके चलते कई विरोधियों को भी सरकार का साथ देने के लिए विवश हो जाना पड़ेगा। देश के 7 राज्यों गुजरात, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू है, परंतु राष्ट्रीय स्तर पर कोई कानून नहीं है। इसी कारण मोदी सरकार ने अबकी बार-धर्मांतरण पर वार करने का निर्णय किया है।

भारत में धर्मांतरण बड़ी समस्या

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी से लेकर कई राजनीतिक दल और धार्मिक-सामाजिक संगठन धर्मांतरण के विरुद्ध कड़े कानून की वक़ालत करते रहे हैं। भारत में धर्मांतरण एक बहुत बड़ी समस्या है। अक्सर देश में धर्मांतरण की ख़बरें आती रहती हैं, जिनमें अधिकांश धर्मांतरण धन-वैभव-मान-सम्मान का प्रलोभन देकर कराए जाते हैं। यह भी सही है कि कई लोग अपने धर्म की कुछ मान्यताओं से रुष्ट होकर दूसरा धर्म अंगीकार कर लेते हैं, परंतु अधिकांशत: पाया यह गया है कि धर्मांतरण के लिए कुछ धार्मिक-सामाजिक संगठन मिशन चलाते हैं और इनका उद्देश्य अपने धर्म के अनुयायियों की संख्या बढ़ाने से अधिक कुछ नहीं होता। कई बार तो जबरन धर्मांतरण भी करा दिया जाता है। मोदी सरकार यदि धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने में सफल रहती है, तो देश में प्रलोभन देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाई जा सकेगी। आशा यह भी की जानी चाहिए कि मोदी सरकार के धर्मांतरण विरोधी कानून में किसी के स्वैच्छिक धर्मांतरण पर रोक नहीं होगी।

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