आर्थिक मंदी : आधी हक़ीकत – आधा फ़साना, भारत को लेकर क्या कहती है दुनिया ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 13 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। आज कल आर्थिक मंदी को लेकर अलग-अलग अभिप्राय मिल रहे हैं। एक तरफ वैश्विक मंदी के बावजूद भारतीय अर्थ व्यवस्था मजबूती के साथ अपने स्तंभों पर खड़ी है। इसके बावजूद वैश्विक मंदी को ध्यान में रखते हुए केन्द्र सरकार अपनी अर्थ व्यवस्था की विकास दर बढ़ाने के लिये लगातार प्रयासों में जुटी है तो दूसरी ओर कांग्रेस है जो अर्थ व्यवस्था के मुद्दे को जोर-शोर से उछाल रही है। इसको लेकर भाजपा ने कांग्रेस को खूब खरी-खरी भी सुनाई हैं। उधर दुनिया के लोग मंदी के बावजूद भारत को लेकर आशान्वित हैं। दुनिया की जो प्रमुख वित्तीय संस्थाएँ मंदी से पहले भारत की जीडीपी विकास दर 7 से 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद लगा रही थी, उनका आज भी दावा है कि 2019-20 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर 6.5 से 6.9 प्रतिशत तक रह सकती है। दुनिया का यह विश्वास दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी में भी मजबूती से आगे बढ़ रही है।

मंदी को लेकर क्या कहती है कांग्रेस ?

दरअसल कांग्रेस को साँस लेने के लिये ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती रहती है। यही कारण है कि कांग्रेस ने पहले कश्मीर से धारा 370 खत्म किये जाने को लेकर सरकार को घेरने के प्रयास में मुँह की खाई और जब पाकिस्तान ने उसके बयानों को इस्तेमाल करना शुरू किया तो कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को ट्वीट करके सफाई देनी पड़ी। इसके बाद कांग्रेस को ऑक्सीजन की दूसरी बोटल चाहिये थी, जिसके दम पर वह सांस ले सके। ऐसे में उसे आर्थिक मंदी का मुद्दा मिल गया और वह इसी मुद्दे को लेकर मोदी सरकार को घेरने के लिये निकल पड़ी। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि सरकार 100 दिन पूरे होने पर जश्न मनाने जा रही है, जबकि उसे आर्थिक मंदी को हल करने के लिये कदम उठाने चाहिये। ऐसा लगता है कि कांग्रेस को सरकार की ओर से उठाए गये कदमों की या तो जानकारी नहीं है या फिर वह जान बूझकर देखना नहीं चाहती।

आर्थिक मंदी को लेकर भाजपा का कांग्रेस पर निशाना

कांग्रेस की बोलती बंद करने के लिये भाजपा ने उस पर पलट वार किया और कहा कि वास्तव में कांग्रेस आर्थिक मंदी का सामना कर रही है, क्योंकि उसके लिये फंड जुटाने वाले सलाखों के पीछे चले गये हैं। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि पूरे विश्व में मंदी का वातावरण है। इसके बावजूद भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था की मजबूती को बनाए रखा है। सरकार समय-समय पर आवश्यकतानुसार कदम उठाकर अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के लिये ऊर्जा देने का भी काम कर रही है।

आर्थिक मंदी से निपटने के लिये उठाए गये कदम

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार बाजार में आई सुस्ती को दूर करने के लिये और अर्थ व्यवस्था को गति देने के लिये सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर मंदी होने के बावजूद अन्य देशों की तुलना में भारत की स्थिति मजबूत है, इसलिये चिंतित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी बैंकों के होम लोन और ऑटो लोन को भारतीय रिज़र्व बैंक के रेपो रेट से जोड़ दिया है, जिससे इन लोन की ईएमआई कम हो जाएगी। ऑटो सेक्टर की मंदी दूर करने के लिये नॉन बैंकिंग फाइनांसिंग कंपनियाँ (NBFC) अब आधार KYC के आधार पर लोन दे सकेंगी। सरकार ने सरकारी विभागों की ओर से वाहनों की खरीद पर लगी रोक भी हटा ली है। सरकार ने नये वाहनों की रजिस्ट्रेशन फीस में इजाफा भी जून-2020 तक टाल दिया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने मंदी से निपटने के लिये सरकारी बैंकों में 70,000 करोड़ रुपये की पूँजी डालने की घोषणा की है, इससे बैंक ज्यादा से ज्यादा लोन दे सकेंगे। नकदी की कमी को दूर करने के लिये हाउसिंग प्रोजेक्ट को पूँजी मुहैया कराने के लिये नई संस्था बनाई जाएगी। हाउसिंग फाइनांस कंपनियों की कैश लिक्विडिटी बढ़ाकर 20 हजार करोड़ से 30 हजार करोड़ की जाएगी।

जीएसटी (GST) रिफंड में देरी के कारण पैसों की कमी का सामना करने वाले कारोबारियों के लिये सरकार ने ऐलान किया है कि जीएसटी रिफंड का भुगतान 30 दिनों के भीतर किया जाएगा। सरकार ने बजट के दौरान सुपर रिच सेक्शन पर बढ़ाए गये सरचार्ज को भी वापस लेने का फैसला किया है। सरकार ने लोंग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन पर बजट में बढ़ाया गया सरचार्ज भी वापस ले लिया है।

निर्मला सीतारमण के अनुसार ढाँचागत सेक्टर के लिये 100 लाख करोड़ रुपये का पैकेज देने की सरकार ने घोषणा की है। इस सेक्टर के कामकाज पर नज़र रखने के लिये विशेष कार्य बल बनाया जाएगा।

क्या कह रही हैं दुनिया की प्रमुख वित्तीय संस्थाएँ

सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट रिसर्च (CGDR) के निदेशक डॉ. कन्हैया सिंह के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से आपूर्ति प्रेरित है। देश में मानसून अच्छा रहता है तो बाजार में भी गर्मी रहती है। इस तरह उद्योग धंधे मानसून की चाल पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने कहा कि अप्रैल-जून-2019 की पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि जरूर कम रही है, परंतु इसी दौरान बिजली क्षेत्र की वृद्धि 8.62 प्रतिशत रही, जो अच्छी है। विनिर्माण क्षेत्र ही एक मात्र अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहा है, परंतु अन्य क्षेत्र अपेक्षाकृत ठीक-ठाक प्रदर्शन कर रहे हैं, इसे भी समझने की आवश्यकता है। कई देशी और विदेशी वित्तीय संस्थाओं ने मंदी से पूर्व वर्ष 2019-20 में भारत की जीडीपी (GDP) आर्थिक विकास दर 7 से 7.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई थी, जो अब भी यह कह रही हैं कि भारत की जीडीपी की विकास दर 6.5 से 6.9 प्रतिशत तक रह सकती है। यह दर्शाता है कि भारत की अर्थ व्यवस्था मजबूत नींव पर खड़ी है और चिंता की कोई बात नहीं है।

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