चालान नहीं, जान की सोचिए : ये आँकड़े देखने के बाद आप स्वयं कहेंगे ये दंड ‘भारी’ नहीं है…

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 13 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। आज कल पूरे देश में मोदी सरकार का नया ‘मोटर वेहिकल एक्ट-2019’ चर्चा के केन्द्र में है। क्योंकि इसके लागू होते ही ट्रैफिक के नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों से वसूल किया जाने वाला दंड 5 से 10 गुना तक बढ़ गया है। कुछ लोग बढ़े हुए दंड को भारी बताते हैं और इसका विरोध करते हैं, परंतु दूसरी तस्वीर देखें तो सड़क दुर्घटनाओं और ट्रैफिक के नियमों का सख्ती से पालन कराने का प्रयास सफल होता दिख रहा है। बैड मैनर्स वाले वाहन चालक जो ट्रैफिक के नियमों को हलके में लेते थे और आये दिन नियमों को तोड़ते थे, ऐसे वाहन चालकों पर भारी चालान का भय दिख रहा है और नियमों को तोड़ने तथा सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने लगी है।

आँकड़ों के माध्यम से देखें सड़क दुर्घटनाओं की भयावह तस्वीर

जब केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी से भारी जुर्माने के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि भारी जुर्माना वसूलने के पीछे सरकार का उद्देश्य कमाई करना नहीं है, अपितु ट्रैफिक के नियमों को हलके में लेने वाले और आए दिन ट्रैफिक के नियमों को तोड़ने वाले वाहन चालकों को नियमों का महत्व समझाना है तथा सड़कों को सुरक्षित बना कर लोगों की जान बचाना सरकार की प्राथमिकता है। ऐसे में यदि भारी जुर्माने के पीछे छिपी सड़क दुर्घटनाओं की भयंकर तस्वीर आप देखेंगे, तो आपका मत भी बदल जाएगा और आप स्वयं कहेंगे कि वास्तव में दंड ‘भारी’ नहीं है। क्योंकि आँकड़ों के अनुसार हर साल देश में लगभग 5 लाख सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं और इनमें लगभग डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है और लगभग 3 लाख लोग विकलांग जीवन जीने को मजबूर हो जाते हैं।

आँख खोल देने वाली है WHO की चेतावनी

यह बहुत ही लज्जित करने वाली बात है कि दुनिया में सड़क हादसों के मामले में भारत पहले नंबर पर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की यह चेतावनी आँखें खोल देने वाली है कि 2020 तक भारत में अकाल मृत्यु की बड़ी वजह कोई बीमारी नहीं, बल्कि सड़क हादसे होंगे। क्योंकि अभी जो वार्षिक आँकड़ा डेढ़ से दो लाख का है, वह बढ़कर 5.46 लाख तक पहुँच सकता है। हालाँकि गड़करी का दावा है कि सरकार ऐसे प्रयास कर रही है कि सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ घटाकर आधा कर दिया जाए। डब्ल्यूएचओ की चेतावनी इसलिये भी वास्तविक लगती है, क्योंकि ऐसा पूर्व में भी हो चुका है। 2014 में सड़क दुर्घटनाओं का आँकड़ा 1,41,526 था, जो 2015 में बढ़कर 4,64,674 तक पहुँच गया था।

भारत में हर मिनट होते हैं कम से कम 3 सड़क हादसे

2017 के सड़क हादसों पर नज़र डालें तो देश में हर एक मिनट में कम से कम 3 सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं। हर एक घण्टे में लगभग 53 सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं और इनमें कम से कम 17 लोगों की मृत्यु होती है, जबकि एक दिन में 400 से 410 लोगों की जानें जाती हैं। 2017 में यह आँकड़ा बढ़कर 5 लाख को पार कर गया है। यह आँकड़े भी चौंका देने वाले हैं कि 2017 में भारत में 70 प्रतिशत हादसे स्पीडिंग के कारण हुए और इनमें 8,000 लोगों की जानें इसलिये चली गईं क्योंकि वाहनों के चालक या तो नशे में गाड़ी चला रहे थे, अथवा मोबाइल पर बात कर रहे थे। यही कारण है कि सरकार ने इस तरह से नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर फाइन कई गुना बढ़ा दिया है। इतना ही नहीं, स्पीडिंग, नशे में वाहन चलाना और मोबाइल पर बात करने जैसे अपराधों के लिये तत्काल फाइन किया जाता है। कई राज्यों ने इसे संशोधित भी किया है।

हजारों के चालान पर क्यों, हादसों पर चर्चा क्यों नहीं ?

आजकल जो बहस हो रही है, वह फाइन बहुत ज्यादा होने पर हो रही है, परंतु वाहन चालकों के नियमों को तोड़ने या हलके में लेने के मुद्दे पर कोई बहस क्यों नहीं हो रही ? यह भी एक बड़ा सवाल है। मृत्यु के आँकड़ों पर नज़र क्यों नहीं डाली जाती, जिसमें घर से निकलने के बाद परिवार अपने सदस्य को लेकर इस चिंता में पूरा दिन बिताता है कि उसका प्रियजन शाम को सुरक्षित घर लौटेगा या नहीं ? क्यों कोई यह सवाल नहीं उठाता कि वाहन चालकों ने सड़कों को जान लेवा क्यों बना दिया ? क्यों सवाल यह नहीं पूछा जा रहा है कि बीमारियों से ज्यादा बच्चे और युवा सड़क पर चलते-फिरते जान गँवा रहे हैं ? सरकार का भी यही कहना है कि यदि मौत के आँकड़ों को देखेंगे तो हजारों रुपये का दंड महंगा नहीं लगेगा, क्योंकि जान है तो जहान है।

सरकार के प्रयास होने लगे सफल

सरकार का यह भी कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं में जान गँवाने वाले अधिकांश परिवारों को मुआवजा तक नहीं मिल पाता है, इसीलिये सरकार ने 2018 से कार या टू-व्हीलर खरीदने वालों के लिये 3 या 5 साल की बीमा पॉलिसी लेना अनिवार्य कर दिया है। सरकार ने दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों के इलाज के लिये हर नजदीकी अस्पताल को बिना शर्त और बिना पैसे के तुरंत इलाज शुरू करने की हिदायत दी है। इसके अलावा सरकार राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर 100 कि.मी. की दूरी पर एक ट्रोमा सेंटर बनाने की योजना पर भी काम कर रही है। सरकार सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु का औसत घटाने के लिये हर स्तर पर काम कर रही है, परंतु सड़क पर बैड मैनर्स वाले ड्राइवरों पर अंकुश लगाना भी अत्यावश्यक है। इसीलिये सरकार ने भारी जुर्माने का भी कदम उठाया है। सरकार का यह प्रयास अब सफल होता दिख रहा है, क्योंकि बैड मैनर्स वाले वाहन चालकों में भारी चालान का भय न सिर्फ दिख रहा है, बल्कि अच्छे से काम भी कर रहा है। बिना बीमा के गाड़ी चलाने पर फाइन चार गुना बढ़ा तो अब बीमा पॉलिसी लेने के लिये भी भारी भीड़ जुटने लगी है। पॉलिसी बाजार डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार 1 सितंबर से नया मोटर वेहिकल एक्ट लागू होने के बाद पहले सप्ताह में ही बीमा पॉलिसीज़ की सेलिंग टू-व्हीलर के लिये 7 गुना और फोर-व्हीलर के लिये 3 गुना बढ़ गई है। हेल्मेट की दुकानों पर भी भीड़ लग रही है। सड़कों पर भी ट्रैफिक के नियमों का पालन होने लगा है और ट्रैफिक नियमों को तोड़ने की घटनाएँ घटने लगी हैं।

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