लड़की 14 की थी तो क्या हुआ ? कोर्ट को अब यह ‘शादी’ मंजूर है ! जानिए कैसे हुआ यह संभव ?

कानून के इतिहास में कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जो हमारी सोच के परे होते हैं, तब ऐसे निर्णयों पर हमें आश्चर्य होता है और हम कह उठते हैं अहो आश्चर्यम् ! ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें मुंबई हाईकोर्ट ने एक 14 वर्ष की लड़की की शादी को मान्यता प्रदान की। इस मामले का हर एक पहलू आश्चर्यचकित करने वाला है। इस मामले का सबसे अधिक चौंकाने वाला तथ्य तो यह है कि हाई कोर्ट (HC) ने ऐसी शादी को मान्यता दी, जो इस लड़की की इच्छा के विरुद्ध हुई थी। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने इस नाबालिग पर बलात्कार करने वाले उसके पति के विरुद्ध मुकदमा भी वापस ले लिया और इस लड़की को उसके 56 साल के पति के साथ रहने भी भेज दिया। आइये जानते हैं क्या है यह पूरा मामला…

दरअसल 2014 में एक 14 वर्ष की लड़की के दादा-दादी ने उसकी शादी एक 52 वर्ष के अधेड़ पुरुष से कर दी। यह पुरुष पेशे से वकील है। इसलिये कानून का जानकार होने के बावजूद उसने न सिर्फ इस नाबालिग की इच्छा के विरुद्ध उससे शादी की, बल्कि उसके साथ बलात्कार भी किया। यह मामला सामने आने के बाद पुलिस ने इस वकील को हिरासत में लिया और उसे जेल भेज दिया। 10 महीने तक जेल में रहने के बाद उसे जमानत पर रिहा किया गया।

18 सितंबर-2018 को जब लड़की की उम्र 18 वर्ष पूरी हो गई, तो इस वकील ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और अपने विरुद्ध दाखिल मुकदमे को खारिज करने की माँग करने वाली याचिका दायर की। इतना ही नहीं, दूसरी ओर से पीड़िता ने भी एक याचिका दायर की, जिसमें उसने भी अपने पति के साथ रहने के लिये उसके विरुद्ध दायर बलात्कार का मुकदमा वापस लेने की माँग की। पीड़िता ने दलील दी कि वह 18 वर्ष की हो चुकी है और अपने फैसले लेने के लिये कानूनी रूप से बालिग और स्वतंत्र है, इसलिये उसे अपने पति के साथ रहने की अनुमति दी जाये।

हालाँकि अभियोजन पक्ष के वकील की ओर से पीड़िता की याचिका का विरोध किया गया और कहा गया कि इस तरह के मामले से लोगों में गलत संदेश जाएगा। इसके बाद इस मामले की सुनवाई करते हुए मुंबई हाईकोर्ट के जस्टिस रंजीत मोरे और भारती डांगरे की बेंच ने 2 मई को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालत इस लड़की के भविष्य को लेकर चिंतित है। बेंच ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि जब लड़की का विवाह हुआ तब वह नाबालिग थी, परंतु अब वह बालिग हो चुकी है और उसने अपने पति के साथ रहने की इच्छा जताई है। चूँकि दोनों का विवाह हुआ है, जो भले ही कानूनी तौर पर वैध न हो, परंतु अब दोनों की इच्छा को कानूनी रूप से अमान्य रखने का कोई कारण नहीं है।

बेंच ने कहा कि अब इस महिला को समाज में कोई पत्नी के रूप में स्वीकार नहीं करेगा, इसलिये अदालत को लगता है कि इस महिला का भविष्य सुरक्षित करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। बेंच ने आरोपी वकील को पीड़िता के सुरक्षित भविष्य के लिये उसे 10 एकड़ कृषि भूमि और 7 लाख रुपये बतौर डिपोजिट जमा करने का आदेश दिया। साथ ही अदालत ने पुलिस को भी निर्देश दिया कि वह इस महिला के पति के विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही न करे।

इस प्रकार हाईकोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में न सिर्फ एक 14 साल की लड़की की इच्छा के विरुद्ध हुई अवैध शादी को वैध ठहराते हुए उसे मान्यता प्रदान की, बल्कि उसके साथ बलात्कार करने के आरोपी पति के साथ ही उसे रहने की अनुमति भी दी।

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