मन की बात 2.0’ की 15वीं कड़ी में प्रधानमंत्री का सम्बोधन

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मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। आमतौर पर ये समय उत्सव का होता है, जगह-जगह मेले लगते हैं, धार्मिक पूजा-पाठ होते हैं। कोरोना के इस संकट काल में लोगों में उमंग तो है, उत्साह भी है, लेकिन, हम सबको मन को छू जाए, वैसा अनुशासन भी है ।  बहुत एक रूप में देखा जाए तो नागरिकों में दायित्व का एहसास भी है। लोग अपना ध्यान रखते हुए, दूसरों का ध्यान रखते हुए, अपने रोजमर्रा के काम भी कर रहे हैं ।  देश में हो रहे हर आयोजन में जिस तरह का संयम और सादगी इस बार देखी जा रही है, वो अभूतपूर्व है। गणेशोत्सव भी कहीं ऑनलाइन मनाया जा रहा है, तो, ज्यादातर जगहों पर इस बार इकोफ्रेंडली गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की गई है। साथियो, हम, बहुत बारीकी से अगर देखेंगे, तो एक बात  अवश्य हमारे ध्यान में आयेगी – हमारे पर्व और पर्यावरण। इन दोनों के बीच एक बहुत गहरा नाता रहा है। जहां एक ओर हमारे पर्वों में पर्यावरण और प्रकृति के साथ सहजीवन का सन्देश छिपा होता है तो दूसरी ओर कई सारे पर्व प्रकृति की रक्षा के लिये ही मनाए जाते हैं।

मेरे प्यारे देशवासियो, कोरोना के इस कालखंड में देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ, कई बार मन में ये भी सवाल आता रहा कि इतने लम्बे समय तक घरों में रहने के कारण, मेरे छोटे-छोटे बाल-मित्रों का समय कैसे बीतता होगा। और इसी से मैंने गांधीनगर की Children University जो दुनिया में एक अलग तरह का प्रयोग है, भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, सूक्ष्म-लघु और मध्यम उद्योग मंत्रालय, इन सभी के साथ मिलकर, हम बच्चों के लिये क्या कर सकते हैं, इस पर मंथन किया, चिंतन किया।

साथियो, हमारे चिंतन का विषय था- खिलौने और विशेषकर भारतीय खिलौने। हमने इस बात पर मंथन किया कि भारत के बच्चों को नए-नए Toys कैसे मिलें, भारत, Toy Production का बहुत बड़ा Hub कैसे बने।

       साथियो, हमारे देश में Local खिलौनों की बहुत समृद्ध परंपरा रही है। कई प्रतिभाशाली और कुशल कारीगर हैं, जो अच्छे खिलौने बनाने में महारत रखते हैं। भारत के कुछ क्षेत्र Toy Clusters यानी खिलौनों के केन्द्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं। जैसे, कर्नाटक के रामनगरम में चन्नापटना, आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा में कोंडापल्ली, तमिलनाडु में तंजौर, असम में धुबरी, उत्तर प्रदेश का वाराणसी – कई ऐसे स्थान हैं, कई नाम गिना सकते हैं। आपको ये जानकार आश्चर्य होगा कि Global Toy Industry, 7 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक की है। 7 लाख करोड़ रुपयों का इतना बड़ा कारोबार, लेकिन, भारत का हिस्सा उसमें बहुत कम है मैं अपने start-up मित्रों को, हमारे नए उद्यमियों से कहता हूँ -Team up for toys… आइए मिलकर खिलौने बनाएं । अब सभी के लिये Local खिलौनों के लिये Vocal होने का समय है। आइए, हम अपने युवाओं के लिये कुछ नए प्रकार के, अच्छी quality वाले, खिलौने बनाते हैं। खिलौना वो हो जिसकी मौजूदगी में बचपन खिले भी, खिलखिलाए भी। हम ऐसे खिलौने बनाएं, जो पर्यावरण के भी अनुकूल हों।

       साथियो, इसी तरह, अब कंप्यूटर और स्मार्टफ़ोन के इस जमाने में कंप्यूटर गेम्स का भी बहुत Trend है। ये गेम्स बच्चे भी खेलते हैं, बड़े भी खेलते हैं। लेकिन, इनमें भी जितने गेम्स होते हैं, उनकी Themes भी अधिकतर बाहर की ही होती हैं। हमारे देश में इतने Ideas हैं, इतने Concepts हैं, बहुत समृद्ध हमारा इतिहास रहा है। क्या हम उन पर Games बना सकते हैं ? मैं देश के युवा Talent से कहता हूँ, आप, भारत में भी Games बनाइये, और, भारत के भी Games बनाइये। कहा भी जाता है – Let the Games Begin ! तो चलो, खेल शुरू करते हैं !

     मेरे प्यारे देशवासियो, भारतीयों के Innovation और Solution देने की क्षमता का लोहा हर कोई मानता है और जब समर्पण भाव हो, संवेदना हो तो ये शक्ति असीम बन जाती है। इस महीने की शुरुआत में, देश के युवाओं के सामने, एक App Innovation Challenge रखा गया। इस आत्मनिर्भर भारत App Innovation Challenge में हमारे युवाओं ने बढ़-चढ़कर के  हिस्सा लिया। करीब, 7 हजार Entries आईं। ये आत्मनिर्भर भारत के लिए, देश के भविष्य के लिए, बहुत ही शुभ संकेत है। आत्मनिर्भर app innovation challenge के results देखकर आप ज़रूर प्रभावित होंगे। काफी जाँच-परख के बाद, अलग-अलग  category में, लगभग दो दर्जन Apps को award भी दिए गये हैं।आप जरुर इन  Apps के बारे में जाने और उनसे जुडें। हो सकता है आप भी ऐसा कुछ बनाने के लिए प्रेरित हो जायें ।  इनमें एक App है, कुटुकी Kids Learning App ये छोटे बच्चों के लिए ऐसा Interactive App है जिसमें गानों और कहानियों के जरिए बात-बात में ही बच्चे Math, Science में बहुत कुछ सीख सकते हैं ।  इसमें activities भी हैं, खेल भी हैं। इसी तरह एक Micro Blogging Platform का भी App है। इसका  नाम है कू – KOO कू। इसमें, हम, अपनी मातृभाषा में Text, Video और Audio के जरिए अपनी बात रख सकते हैं, Interact कर सकते हैं ।  इसी तरह चिंगारी App भी युवाओं के बीच काफी Popular हो रहा है ।  एक app है Ask सरकार। इसमें Chat Boat के जरिए आप Interact कर सकते हैं और किसी भी सरकारी योजना के बारे में सही जानकारी हासिल कर सकते हैं, वो भी Text, Audio और Video तीनों तरीकों से। ये आपकी बड़ी मदद कर सकता है। एक और App है, Step Set Go, ये  fitness App है। आप कितना चले, कितनी Calories Burn की, ये सारा हिसाब ये App रखता है, और आपको Fit रहने के लिये Motivate भी करता है। मैंने ये कुछ ही उदाहरण दिये हैं। कई और apps ने भी इस challenge को जीता है ।  कई  Business Apps हैं, games के App है, जैसे  ‘Is EqualTo’, Books & Expense, Zoho (जोहो) Workplace, FTC Talent, आप इनके बारे में Net पर Search करिए, आपको बहुत जानकारी मिलेगी। आप भी आगे आएं, कुछ Innovate करें, कुछ Implement करें। आपके प्रयास, आज के छोटे-छोटे Start-ups, कल बड़ी-बड़ी कंपनियों में बदलेंगे और दुनिया में भारत की पहचान बनेंगे। और आप ये मत भूलिये कि आज जो दुनिया में बहुत बड़ी-बड़ी कम्पनियाँ नज़र आती हैं ना, ये भी, कभी, startup हुआ करती थी ।

प्रिय देशवासियो, बीते दिनों, जब हम अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहे थे, तब एक दिलचस्प खबर पर मेरा ध्यान गया। ये खबर है हमारे सुरक्षाबलों के दो जांबाज किरदारों की। एक है सोफी और दूसरी विदा। सोफी और विदा, Indian Army के श्वान हैं, Dogs हैं और उन्हें Chief of Army Staff ‘Commendation Cards’ से सम्मानित किया गया है। सोफी और विदा को ये सम्मान इसलिए मिला, क्योंकि इन्होंने, अपने देश की रक्षा करते हुए, अपना कर्तव्य बखूबी निभाया है। हमारी सेनाओं में, हमारे सुरक्षाबलों के पास, ऐसे, कितने ही बहादुर श्वान है Dogs हैं जो देश के लिये जीते हैं और देश के लिये अपना बलिदान भी देते हैं। कितने ही बम धमाकों को, कितनी ही आंतकी साजिशों को रोकने में ऐसे Dogs ने बहुत अहम् भूमिका निभाई है।

मेरे प्रिय देशवासियो, कुछ दिनों बाद,  पांच सितम्बर को हम शिक्षक दिवस मनायेगें। हम सब जब अपने जीवन की सफलताओं को अपनी जीवन यात्रा को देखते है तो हमें अपने किसी न किसी शिक्षक की याद अवश्य आती है। तेज़ी से बदलते हुए समय और कोरोना के संकट काल में हमारे शिक्षकों के सामने भी समय के साथ बदलाव की एक चुनौती लगती है। मुझे ख़ुशी है कि हमारे शिक्षकों ने इस चुनौती को न केवल स्वीकार किया, बल्कि, उसे अवसर में बदल भी दिया है।

मेरे प्रिय देशवासियो, देश आज जिस विकास यात्रा पर चल रहा है इसकी सफलता सुखद तभी होगी जब हर एक देशवासी इसमें शामिल हो, इस यात्रा का यात्री हो, इस पथ का पथिक हो, इसलिए, ये जरूरी है कि हर एक देशवासी स्वस्थ रहे सुखी रहे और हम मिलकर के कोरोना को पूरी तरह से हराएं। कोरोना तभी हारेगा जब आप सुरक्षित रहेंगे, जब आप “दो गज की दूरी, मास्क जरुरी”, इस संकल्प का पूरी तरह से पालन करेंगे आप सब स्वस्थ रहिये, सुखी रहिये, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ अगली ‘मन की बात’ में फिर मिलेंगे।

बहुत बहुत धन्यवाद।  नमस्कार।

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