मोदी के नज़रअंदाज़ करने से अपने ही देश के लोगों की नज़रों में गिर गए इमरान

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* पाकिस्तानी अवाम व मीडिया में इमरान की हो रही थू-थू

* ‘मोदी नीति’ को राजनीति बता कर निकाली जा रही भड़ास

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 31 मई, 2019। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू करने से पहले ही राजनीतिक मोर्चे पर पाकिस्तान को एक और पटखनी दे दी है। अपने पहले कार्यकाल में पीएम मोदी ने पाकिस्तान को दुनिया के बाकी देशों से अलग-थलग कर दिया और अब अपने शपथ ग्रहण समारोह से भी पाकिस्तान को अलग-थलग करके पाकिस्तान में ऐसी POLITICAL STRIKE कर दी, जिससे पाकिस्तान में बवाल मच गया है और हर कोई पाकिस्तानी पीएम इमरान खान से एक ही सवाल पूछ रहा है कि ‘कब तक सहें अपमान।’

पीएम नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार शाम के अपने शपथ ग्रहण समारोह में पाकिस्तान को न्यौता नहीं दिया, इससे पाकिस्तान खुद को अपमानित महसूस कर रहा है। पाकिस्तान की अवाम, विपक्षी नेता और मीडिया हर जगह पाकिस्तान के पीएम इमरान खान की थू-थू हो रही है। सब इस अपमान के लिये इमरान खान को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और उन्हें कोस रहे हैं। इससे पहले 26 फरवरी को जब पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायुसेना की एयर स्ट्राइक हुई थी, तब पाकिस्तान की संसद में इमरान खान के विरुद्ध ‘शेम शेम’ के नारे लगे थे।

इससे पहले 2018 में जब इमरान खान पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री बने थे, तो उनकी ओर से भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर, कपिल देव, नवजोतसिंह सिद्धू और फिल्म अभिनेता आमिर खान आदि को निमंत्रण भेजा गया था, परंतु इनमें से नवजोतसिंह सिद्धू के अतिरिक्त कोई नहीं गया था। नवजोतसिंह सिद्धू के जाने पर भारत में काफी बवाल भी मचा था। क्योंकि 2016 में उरी अटैक के बाद भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच सम्बंधों में तनाव आ गया था।

इससे भी पहले 2014 में दोनों देशों के बीच सम्बंध ठीकठाक थे और पहली बार प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने के लिये न सिर्फ पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ़ को अपने शपथ समारोह में आमंत्रित किया था, बल्कि वह एक बार बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के पाकिस्तान जाकर नवाज शरीफ से मिले थे, जिसको लेकर उन्हें विरोधी दलों का निशाना भी बनना पड़ा था।

इससे पहले 2009 में डॉ. मनमोहन सिंह के शपथ समारोह में भी नवाज शरीफ को आमंत्रित किया गया था, हालाँकि शरीफ के शपथ समारोह में डॉ. मनमोहन सिंह नहीं गये थे। इस प्रकार भारतीय प्रधानमंत्री के शपथ समारोह में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया जाता रहा है और वह आते भी रहे हैं, परंतु पाकिस्तान के पीएम के शपथ समारोह में भारतीय प्रधानमंत्री ने शिरकत नहीं की है। इसका कारण है कि कश्मीर और आतंकवाद को लेकर दोनों देशों के बीच सम्बंधों में नरमी-गरमी चलती रहती है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने 23 मई को आये भारत के लोकसभा चुनाव परिणामों के समय भी काफी उत्सुकता दिखाई थी और रुझानों में ही बढ़त मिलने पर ट्विटर के जरिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जीत की बधाई दे दी थी। मोदी ने भी दुनिया भर से मिल रहे बधाई संदेशों के जवाब में ट्विटर पर धन्यवाद कहा था। बधाई संदेश देने के बाद इमरान खान उम्मीद कर रहे थे कि उन्हें मोदी शपथ ग्रहण समारोह में बुलायेंगे, परंतु ऐसा नहीं हुआ और अब वह अपने लोगों के बीच घिर गये हैं।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की बेटी मरियम शरीफ़ ने तो इमरान खान को फर्जी प्रधानमंत्री तक कह दिया। मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में न बुलाये जाने को लेकर दो दिन पहले मरियम ने इमरान खान पर निशाना साधा और कहा कि पीएम मोदी पाकिस्तान के पीएम इमरान खान का बिल्कुल भी सम्मान नहीं करते, यहाँ तक कि वह इमरान खान का फोन तक नहीं उठाते हैं। मरियम ने कहा कि इमरान शरीफ़ को मोदी का दोस्त कहते थे। वही मोदी शरीफ़ से मिलने के लिये पाकिस्तान तक आ गये थे और उन्हें 2014 के शपथ ग्रहण में भी बुलाया था। इतना ही नहीं, अटल बिहारी वाजपेयी भी नवाज़ शरीफ़ से मिलने के लिये पाकिस्तान आये थे। क्योंकि शरीफ़ को हिंदुस्तान ही नहीं, पूरी दुनिया सम्मान देती थी और उन्होंने पाकिस्तान को पूरी दुनिया में सम्मान दिलाया था, जबकि आप पूरी दुनिया में अपनी और पाकिस्तान की फजीहत करवा रहे हैं। मोदी आपका फोन भी नहीं उठाते हैं, इसलिये कि वह जानते हैं कि आप फर्जी प्रधानमंत्री हैं। मरियम ने यह भी कहा कि आपका दर्जा किसी कठपुतली से ज्यादा कुछ नहीं है, दुनिया में आपका कोई सम्मान नहीं है।

विरोधियों के अलावा पाकिस्तानी मीडिया में भी इस मुद्दे पर बहस छिड़ी हुई है। समा टीवी के एक कार्यक्रम में एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा कि खुद भारत दुनिया में यह बताना चाहता है कि वह पाकिस्तान के साथ बेहतर रिश्ते चाहता है तो उसे जरूर एक न एक दिन पाकिस्तान को दावत देनी होगी। दूसरी तरफ मोदी पाकिस्तान पर दबाव बनाये रखना चाहते हैं, अगर वह इसी नीति पर चलते रहेंगे तो पाकिस्तान को निमंत्रण नहीं भेजेंगे और अगर भेजेंगे तथा इमरान वहाँ जाते हैं तो भी मोदी उनसे सख्त लहजे में बात करेंगे। इससे तो रिश्ते सुधरने के बजाय और बिगड़ जाएँगे।

एक अन्य कार्यक्रम में एक अन्य विश्लेषक ने कहा कि शपथ ग्रहण में नहीं बुलाये जाने को ज्यादा तरजीह नहीं देनी चाहिये। वैसे भी ऐसे कार्यक्रमों में कश्मीर को लेकर कोई बातचीत तो होनी नहीं है। हाँ, अगर बातचीत के लिये विशेष तौर पर बुलाया जाता है तो उसके परिणाम निकल सकते हैं।

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