‘अमदावादीओ’ के लिए BIG GOOD NEWS : 37 साल से दम घोंट रही पिराणा डम्पिंग साइट से मिलेगा छुटकारा

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* NGT ने 1 वर्ष के भीतर पिराणा डम्पिंग साइट हटाने का दिया आदेश

* आगामी 6 महीनों में कार्यवाही शुरू कर देने का भी आदेश

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 27 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। अहमदाबाद के लोगों के लिए दिल्ली से एक बड़ी खुशखबरी आई है। यह ऐसी खुशखबर है, जो महानगर के नारोल-शाहवाडी-पिराणा क्षेत्र में बसने वाले लाखों लोगों को दमघोंटू जीवन से छुटकारा देगी। पिछले 37 वर्षों से शहर के इन इलाकों में बसने वाले लोग जिस पिराणा डम्पिंग साइट से परेशान थे, उन्हें अगले छह महीनों में इस डम्पिंग साइट से छुटकारा मिल जाएगा।

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकारण (NGT) ने गुजरात सरकार और अहमदाबाद महानगर पालिका (AMC) को आदेश दिया है कि वे नारोल स्थित पिराणा डम्पिंग साइट को एक वर्ष के भीतर वहाँ से हटा दे। एनजीटी ने पूरे शहर के कूड़े का पहाड़ बन चुकी इस डम्पिंग साइट को हटाने की कार्यवाही आगामी छह महीने के भीतर ही शुरू कर देने का आदेश दिया है।

उल्लेखनीय है कि पिराणा में पूरे शहर का कचरा जमा किया जाता है और यह सिलसिला 1982 से च रहा है। 84 एकड़ भूमि में फैले इस कचरे के पहाड़ को हटाने की वर्षों से मांग की जा रही थी। एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि पिराणा डम्पिंग साइट को हटाने में 12 महीनों से अधिक का समय नहीं लगना चाहिए और इसके लिए कार्यवाही अगले छह महीनों के भीतर शुरू कर दी जाए।

इंदौर मॉडल अपनाने की आवश्यकता

एनजीटी ने पिराणा डम्पिंग साइट को हटाने के लिए इंदौर मॉडल अपनाने का भी सुझाव दिया। एनजीटी के अनुसार लम्बी निविदा प्रक्रिया में न पड़ते हुए मशीन व मानव बल के संयुक्त फॉर्मेशन से जल्द से जल्द समस्या का निवारण लाने की आवश्यकता है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने इसे लेकर एसओपी तैयार की है। इंदौर मॉडल को अपनाया जाए, जिसमें 10 करोड़ रुपए के खर्च से 15 टन कूड़ा दूर किया गया था। एनजीटी के अनुसार पिराणा डम्पिंग साइट पर हाल में 3300 मैट्रिक टन कूड़ा डाला जा रहा है, जबकि वहाँ से कूड़े की निकासी का प्रमाण अत्यंत कम और धीमी गति से किया जा रहा है।

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