मोदी का डंडा : अब दंड से भी नहीं धुलेगा काले धन का कलंक, जाना पड़ेगा जेल !

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अहमदाबाद, 17 जून, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। दूसरी बार सत्ता में आने के साथ ही मोदी सरकार ने कड़ा रवैया अपनाया है और पहले सरकार पर बोझ बने सफेद हाथी जैसे सरकारी बाबुओं पर चाबुक चलाई। अब टैक्स चोरों की खैर नहीं ! सरकार ने टैक्स चोरों के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए नियम-कानूनों में मिलने वाली छूट छीन ली है और अब टैक्स चोरी करते पकड़े जाने पर या हिसाब-किताब में फर्जीवाड़ा करने पर जेल ही जाना पड़ेगा।

सीबीडीटी का नया दिशानिर्देश हुआ लागू

केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने ‘कंपाउंडिंग ऑफ ऑफेंसेज़ डायरेक्ट टैक्स लॉज’ पर 30 से अधिक पन्नों का एक संशोधित दिशानिर्देश जारी किया है। यह संशोधित दिशानिर्देश दिसंबर-2014 में जारी किये गये दिशानिर्देशों की जगह ले चुका है। पहले की गाइडलाइंस में अघोषित विदेशी खातों और विदेशी संपत्तियों से जुड़े अपराधों में बड़ा अर्थदंड भरने के बाद सज़ा में छूट मिल जाती थी। हालाँकि ऐसी रियायत तभी मिलती थी जबकि टैक्स पेयर ने जाँच में सहयोग किया हो और बकाया टैक्स चुका दिया हो।

नई गाइडलाइंस में किये गये हैं कड़े प्रावधान

इसके बाद 2015 में मोदी सरकार काला धन विरोधी कानून लाई, जिसमें इसकी अनुमति नहीं दी गई। इस कानून में सीमित अवसर दिया गया था कि 30 प्रतिशत ब्याज और बड़ा जुर्माना देकर ही सज़ा से बचा जा सकता था, परंतु अब नई संशोधित गाइडलाइंस में सख्ती बरती गई है और इसमें काल धन विरोधी कानून के तहत आने वाले अपराधों तथा अघोषित विदेशी खातों व संपत्तियों से जुड़े अपराधों के मामलों में कंपाउंडिंग यानी जुर्माना चुकाकर सज़ा से बचने की विकल्प नहीं दिया गया है।

अब जुर्माना भरकर जेल जाने से नहीं बच पाएँगे टैक्स चोर

कर विशेषज्ञों के अनुसार अब यदि यह सिद्ध हो जाए कि किसी टैक्स पेयर ने अन्य से टैक्स चोरी करवाई है तो उसे भी कंपाउंडिंग (भारी जुर्माना भरकर सज़ा से बचने की) की अनुमति नहीं दी जाएगी। यही नियम उन कर दाताओं पर भी लागू होगा जो खरीद-बिक्री की झूठी पर्चियाँ बनाते हैं या होटलों आदि में ठहरने का फर्जी बिल बनाते हैं। बेनामी लेनदेन विरोधी कानून के अंतर्गत आने वाले अपराधों में भी अब बड़ा जुर्माना भरकर सज़ा से बचने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

उल्लेखनीय है कि 2017 में अप्रैल से नवंबर के आठ महीने में ऐसे हजारों मामलों में भारी जुर्माना लेकर टैक्स चोरी करने वालों को सज़ा से छूट दी गई थी, परंतु अब रिवाइज्ड गाइडलाइंस के आने से आने वाले कुछ महीनों में अभियोजन के मामलों में भारी वृद्धि होने की संभावना है। हालाँकि संशोधित दिशानिर्देश में यह प्रावधान जरूर किया गया है कि सीबीडीटी की रिपोर्ट के आधार पर वित्त मंत्री को उचित लगेगा तो वह कंपाउंडिंग पर पाबंदी में ढील दे सकते हैं।

इस प्रकार जो लोग पहले जानबूझकर टैक्स चोरी करते थे या टैक्स बचाने के लिये फर्जीवाड़े की सहायता लेते थे और पकड़े जाने पर भारी जुर्माना भरकर जेल जाने से बच जाते थे, वह अब ऐसा नहीं कर पाएँगे और अब उन्हें जेल ही जाना पड़ेगा।

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