ट्यूशन के बढ़ते टशन पर टाइट होगी मोदी सरकार : NEP करेगी नियंत्रण

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अहमदाबाद, 17 जून, 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। मोदी सरकार-2 ने नई शिक्षा नीति-2019 (नेशनल एज्युकेशन पॉलिसी-NEP) के लिये जो ड्राफ्ट तैयार करवाया है, उसमें शिक्षा क्षेत्र में कोचिंग और प्राइवेट ट्यूशन सिस्टम के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। इस ड्राफ्ट सुझाव दिया गया है कि स्कूली शिक्षा के दौरान ही छात्रों को अलग-अलग विषयों में निपुणता और सिखाने की प्रक्रिया पर जोर दिया जाना चाहिये। इस ड्राफ्ट में बोर्ड की परीक्षाओं के मूल्यांकन में भी सुधार लाने के कई प्रस्ताव दिये गये हैं। एनईपी के अनुसार बोर्ड परीक्षाओं का प्रभाव यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षाओं पर भी पड़ता है।

एनईपी में कोचिंग सिस्टम के बढ़ते प्रभाव पर चिंता

एनईपी ने सुझाव दिया है कि कई महीनों की कोचिंग और रट्टा मारकर अंक लाने की बजाय छात्रों की विषयों के प्रति गहरी समझ का परीक्षण करने पर जोर दिया जाना चाहिये। सीबीएसई और अन्य बोर्ड को भी यह ध्यान रखना चाहिये कि बच्चे की समझ और विषय को लेकर उसकी जानकारी तथा रुचि का मूल्यांकन होना चाहिये न कि कोचिंग पैटर्न को बढ़ावा देकर अंक हासिल करने पर।

सभी कॉलेजों में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट का सुझाव

एनईपी ने यह भी सुझाव दिया है कि विभिन्न कॉलेजों में प्रवेश के लिये अलग-अलग टेस्ट के स्थान पर एक ही कॉमन प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जाना चाहिये। इससे छात्रों के पास भी मनचाहे विषय में प्रवेश लेने के अवसर बढ़ेंगे। एनईपी ड्राफ्ट में सिफारिश की गई है कि अलग-अलग विषयों में दाखिले के लिये प्रवेश परीक्षाएँ साल में कई बार होंगी। इस व्यवस्था के शुरू होने से कॉलेज की ओर से अलग-अलग विभागों की ओर से आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया बंद हो जाएगी।

एनईपी ड्राफ्ट में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में बोर्ड परीक्षा में 95 प्रतिशत और इससे अधिक मार्क्स लाना सामान्य बात हो गई है। 2018 में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेजों में प्रवेश के लिये कटऑफ 96 प्रतिशत तथा इससे अधिक रहा है। नई शिक्षा नीति की प्रस्तावित योजना अभी जनता के बीच फीडबैक लेने के लिये है। यदि एनईपी के सुझावों को स्वीकार कर लिया जाता है तो प्रवेश प्रक्रिया में भी बड़े बदलाव हो सकते हैं।

एनईपी ने अभी जो सुझाव दिये हैं, उसमें कॉमन एंट्रेस ट्रेस्ट साल में कई बार आयोजित करने का भी सुझाव दिया गया है। इस सुझाव के पीछे यह तर्क दिया है कि इससे छात्रों को कई बार प्रवेश परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। प्रवेश परीक्षा में छात्रों को लॉजिक, रिजनिंग और विषय से जुड़े सवाल भी पूछे जाएँगे। एनईपी कमिटी ने कक्षा 10 तथा 12 की बोर्ड की परीक्षाओं के मूल्यांकन के लिये भी कई सुधार सुझाए हैं। इस ड्राफ्ट के अनुसार छात्रों के पास अवसर होगा कि वह कई प्रवेश परीक्षाओं तथा कई विषयों की प्रवेश परीक्षा में भाग ले सकेंगे। प्रवेश परीक्षा का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से किया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत इससे छात्रों के पास विषयों को चुनने के विकल्प बढ़ जाएँगे। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी तथा कॉलेजों के पास भी यह विकल्प होगा कि वह छात्रों के विषयवार प्रदर्शन का मूल्यांकन कर सकेंगे।

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