मंदी से मत हों हैरान : मोदी सरकार ने कर दिये हैं 6 बड़े ऐलान

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 25 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। समूचा विश्व इन दिनों मंदी की मार झेल रहा है, जिससे भारत भी अछूता नहीं है। इसके बावजूद मोदी सरकार ने आँकड़ों को छुपाकर देश की जनता की आँखों में धूल झोंकने के बजाय दिलेरी दिखाई और पिछले शुक्रवार (23 अगस्त) को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर घटी होने का ऐलान कर दिया। सरकार ने बताया कि जीडीपी की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में घटकर 5.8 प्रतिशत हो गई है, जो कि पहली तिमाही में 6.6 प्रतिशत थी। देश और विदेश के अर्थशास्त्री इस मंदी से पहले अनुमान लगा रहे थे कि भारत की जीडीपी वर्ष 2019-20 में 7 से 7.5 प्रतिशत तक रह सकती है। मोदी सरकार कितनी संवेदनशील है, इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि मंदी की छाया पड़ते ही सरकार ने अपना एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। इतना ही नहीं, हड़बड़ी का माहौल देखते हुए एक्शन प्लान को समय से पहले ही घोषित भी कर दिया है। इस एक्शन प्लान में मोदी सरकार ने मंदी पर प्रहार करने वाले 6 शस्त्रास्त्र चमका लिये हैं।

क्या हैं मोदी सरकार के 6 शस्त्रास्त्र

जब देश में मंदी ने द्वार खटखटाया तो लोग घबरा गये। छोटे से लेकर बड़े व्यापारियों, बैंकों और कर्जदारों में जब हड़बड़ी मची थी, तब बंद दरवाजे के पीछे मोदी सरकार मंदी से लड़ने के लिये अपने हथियार चमकाने में जुटी थी। वैसे तो सरकार ने अपना एक्शन प्लान तैयार कर लिया था और वह अगले सप्ताह में इस प्लान को देश के सामने रखने वाली थी, परंतु इसी बीच नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने देश की अर्थ व्यवस्था को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसे सुनने के बाद सरकार भी पीछे नहीं रहना चाहती थी, इसलिये जो पत्ते उसे नये सप्ताह में खोलने थे, वो पत्ते सरकार ने शुक्वार को ही खोल दिये। राजीव कुमार ने कहा था कि देश का वित्तीय तंत्र बड़े संकट से गुज़र रहा है। हालांकि बाद में उन्होंने सफाई भी दे दी थी, परंतु सरकार के पास जब एक्शन प्लान तैयार था तो वह भला क्यों रुकती, लिहाजा उसने अर्थ व्यवस्था को बूस्ट देने के लिये अपने 6 बड़े उपायों की घोषणा कर दी।

1 सार्वजनिक बैंकों में 70,000 करोड़ रुपये डालने की घोषणा

सरकार ने अर्थ व्यवस्था को भरोसा और राहत देने के लिये आर्थिक पैकेज तैयार किया है। इस पैकेज से सामान्य व्यक्ति से लेकर बड़े कारोबारी तक को राहत देने की कोशिश की गई है। सरकार को उम्मीद है कि इस राहत पैकेज से अर्थ व्यवस्था को गति मिलेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खस्ता हाल अर्थ व्यवस्था को सुधारने के लिये सार्वजनिक बैंकों में 70,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूँजी डालने की घोषणा की है। इससे बैंक 5 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त कर्ज देने के लिये सक्षम होंगे। केन्द्र सरकार के इस कदम से कॉर्पोरेट्स, खुदरा कर्जदार और छोटे व्यापारियों समेत कई क्षेत्र के लोगों को फायदा पहुँचेगा और उन्हें आसानी से कर्ज मिल सकेगा। इस प्रकार सरकार के इस कदम से क्रेडिट की वृद्धि दर को बढ़ावा मिलेगा, जो लगभग 12 प्रतिशत तक बढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि सरकार ने बैंकों में 70,000 करोड़ रुपये के पुनर्पूंजीकरण की घोषणा जुलाई में पेश किये गये बजट में भी की थी। सरकार ने यह कदम इसलिये उठाया है ताकि क्रेडिट ग्रोथ हो, यानी बैंकों से कर्ज लेने में गति आये। बैंकों का कहना है कि भारत को आगामी 2024-25 तक 5 ट्रिलियन वाली अर्थ व्यवस्था बनाने के लिये कर्ज देने की दर को वार्षिक 18-20 प्रतिशत की दर से बढ़ाना होगा।

2 होम, वाहन व अन्य खुदरा लोन की ईएमआई घटेगी

केन्द्र सरकार ने दूसरे नीतिगत उपाय की घोषणा यह की है कि अब बैंक सभी कर्जदाताओं को लाभान्वित करने के लिये एमसीएलआर (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड बेस्ड लेंडिंग रेट- अर्थात् सरकार ने 2016 से एमसीएलआर लागू किया है जिसके मुताबिक बैंक आपसे कर्ज पर ब्याज के स्थान पर एमसीएलआर रेट लेते हैं। बैंक से लिये गये कर्ज के ब्याज की न्यूनतम दर को आधार दर कहा जाता है और इस आधार दर से कम रेट पर कोई बैंक कर्ज नहीं दे सकता है।) कटौती के हिसाब से कर्ज की दर में कटौती करेंगे। इस कदम से होम लोन, वाहन व अन्य खुदरा लोन की ईएमआई कम हो जाएगी, क्योंकि अब इस प्रकार के सभी लोन को सीधे-सीधे भारतीय रिज़र्व बैंक की रेपो रेट दर से जोड़ दिया जाएगा। केन्द्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि उद्योगों के लिये कार्यशील पूँजी कर्ज भी सस्ता होगा। सरकार ने सार्वजनिक बैंकों को कर्ज चुकाने के 15 दिन के भीतर अनिवार्य रूप से कर्ज से जुड़े दस्तावेज लौटाने के निर्देश दिये हैं, इससे उन उधारकर्ताओं को लाभ होगा, जिनकी संपत्ति गिरवी रखी होती है, क्योंकि इससे उन्हें आगे भी कर्ज जुटाने में मदद मिलेगी।

3 MSME को 30 दिन में GST रिफंड देने की घोषणा

बाजार में वित्तीय तरलता लाने और लोगों को खर्च करने के लिये अधिक पैसा उपलब्ध कराने के उपायों के तौर पर सरकार ने एनबीएफसी (गैर बैंकिंग कंपनियाँ- जिनका व्यवसाय विविध योजनाओं, व्यवस्थाओं या अन्य तरीकों से पूँजी जुटाना है) तथा एमएसएमई (लघु और मध्यम उद्योग) को भी अधिक क्रेडिट सहायता यानी कर्ज देने का फैसला किया है। इसके अलावा निर्मला सीतारमण ने गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसीज़) तथा एचएफसीज़ को एक लाख करोड़ रुपये तक की संपत्ति खरीदने के लिये बजट में घोषित आंशिक क्रेडिट गारंटी योजना की निगरानी प्रत्येक बैंक में उच्चतम स्तर पर करने की घोषणा की है तथा एमएसएमई को 30 दिन में जीएसटी (GST) रिफंड देने की भी घोषणा की है।

4 FPI को बाहर जाने से रोकने के लिये बड़ा ऐलान

केन्द्र सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को बड़ी मात्रा में बाहर जाने से रोकने के लिये इन पर बजट में लगाया गया सरचार्ज वापस ले लिया है। इस कदम से एफपीआई (FOREIGN PORTFOLIO INVESTORS-FPI) के लिये कर 4 से 7 प्रतिशत तक घट जाएगा। इस कदम से घरेलू निवेशक भी खुश हैं, क्योंकि यह उन पर भी लागू होगा। सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब कई सप्ताहों से एफपीआई सिर्फ बिकवाली कर रहे थे, क्योंकि केन्द्रीय बजट में सरचार्ज लगा दिया गया था। एफपीआई ने बजट घोषणा के बाद से अभी तक लगभग 8,500 करोड़ रुपये निकाल लिये हैं। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पहले बजट में सुपर रिच लोगों पर या जिनकी आय वार्षिक कर योग्य दो करोड़ से 5 करोड़ के बीच है, उन पर सरचार्ज बढ़ाया था, जिनकी आय दो करोड़ रुपये है उन पर 25 प्रतिशत और जिनकी आय पाँच करोड़ रुपये से अधिक है, उन पर 39 प्रतिशत सरचार्ज लगाया था।

5 एचएफसीज़ को 20,000 करोड़ रुपये देने की घोषणा

मोदी सरकार ने हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और रियल एस्टेट क्षेत्र को भी बड़ी राहत देते हुए नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) एचएफसीज़ को भी 20,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त देने की घोषणा की है। सरकार के अनुसार इससे तरलता बढ़कर 30,000 करोड़ रुपये हो जाएगी।

6 ऑटो सेक्टर के लिये राहत देने वाली घोषणा

मोदी सरकार ने ऑटो सेक्टर के लिये भी राहत देने वाली घोषणा की है। निर्मला सीतारमण ने बताया कि कंपनियों, डीलरों तथा ग्राहकों के लिये खुशखबरी है। उन्होंने कहा कि मार्च-2020 तक खरीदी गई BS-IV गाड़ियाँ बंद नहीं होंगी। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल-2020 से बीएस-वीआई लागू करके बीएस-आईवी वाहनों की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला दिया था। हालाँकि निर्मला सीतारमण ने कहा कि ऑटो सेक्टर में तेजी लाने के लिये सरकारी विभाग भी पुरानी गाड़ियाँ रिप्लेस करके नई गाड़ियाँ खरीदेंगे। अब 31 मार्च-2020 तक खरीदे गये ऐसे वाहन वैध रहेंगे। गाड़ियों पर 30 प्रतिशत डेप्रिसिएशन होगा। जून-2020 तक गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन फीस में इजाफा नहीं किया जाएगा और जल्दी ही नई स्क्रैपेज पॉलिसी लाई जाएगी।

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