BRAVO BVR : इस ‘छत्तीसगढ़ी’ ने गढ़ा था ‘मिशन कश्मीर’ का खाक़ा

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अहमदाबाद, 6 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। जम्मू कश्मीर से धारा 370 और अनुच्छेद 35ए हटाने के लिये पीएम नरेन्द्र मोदी, उनके गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल पर बधाइयों की वर्षा हो रही है, परंतु इस बधाई के अधिकारी कुछ और लोग भी हैं, जिन्होंने मोदी सरकार और गृह मंत्री अमित शाह के मिशन कश्मीर का खाका तैयार करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज हम उन्हीं में से एक अधिकारी के बारे में आपको बताने जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ कैडर के IAS ने गढ़ा मिशन कश्मीर का खाका

जबसे केन्द्र में दोबारा मोदी सरकार बनी और उसमें गृह मंत्री अमित शाह बने, तब से ही मोदी सरकार और अमित शाह मिशन कश्मीर का खाका तैयार करने में जुट गये थे। इस मिशन कश्मीर पर जमीनी कार्यवाही शुरू हुई जून महीने के तीसरे सप्ताह से, जब मोदी सरकार ने 1987 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अदिकारी बीवीआर सुब्रमण्यम (BVR SUBRAHMANYAM) को जम्मू कश्मीर का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया। बीवीआर सुब्रमण्यम प्रधान मंत्री कार्यालय (PMO) में संयुक्त सचिव के रूप में पीएम मोदी के साथ काम कर चुके थे और पीएम मोदी उनकी काबिलियत से वाकिफ थे। इसीलिये वह मोदी सरकार के मिशन कश्मीर के मुख्य अधिकारियों की टीम के सदस्य बने। मोदी सरकार ने मिशन कश्मीर का पूरा काम गृह मंत्री अमित शाह को सौंप दिया था। उन्होंने कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद के साथ मिलकर अपनी कोर कमिटी के साथ मिलकर संवैधानिक प्रावधानों की गहन समीक्षा की और संवैधानिक तरीके से जम्मू कश्मीर से धारा 370 और उसके खंड-प्रखंड तथा अनुच्छेदों को दूर करने का मार्ग खोज लिया। इस कोर कमिटी में कानून और न्याय सचिव आलोक श्रीवास्तव, अतिरिक्त सचिव कानून (गृह मंत्रालय) आर. एस. वर्मा, अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल, केन्द्रीय गृह सचिव राजीब गौबा औ कश्मीर खंड की उनकी चुनी हुई टीम शामिल थी। अब संसद के रास्ते धारा 370 और उसके प्रावधानों को हटाने से पहले जम्मू कश्मीर में स्थिति को सामान्य रखने की बड़ी चुनौती थी। इसलिये संसद में इस मामले को लाने से पहले जम्मू कश्मीर में स्थिति को नियंत्रित रखने का काम शुरू किया गया था, जिसके लिये बीवीआर सुब्रमण्यम पर भरोसा जताया गया और उन्हें जम्मू कश्मीर का मुख्य सचिव बनाकर वहाँ भेजा गया। सुब्रमण्यम ने वहाँ पहुँचकर मोर्चा सँभाल लिया और वहाँ की कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी।

सुब्रमण्यम ने शुरू की थी सुरक्षा की प्लानिंग

जम्मू कश्मीर के नये मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम ने प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क बनाये रखकर ग्राउण्ड जीरो यानी जम्मू कश्मीर में सुरक्षा के लिहाज से कई कदम उठाने का खाका तैयार किया। इसमें उन्होंने पुलिस, अर्ध सैनिक बलों और प्रशासन के प्रमुख अधिकारियों से सैटेलाइट फोन का ही प्रयोग करने की हिदायत दी और संवेदनशील शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) की तैनाती करवाने के साथ ही नियंत्रण रेखा पर सेना की चौकसी बढ़ाने जैसे कदम उठाये। इस दौरान वह सेना, सुरक्षा एजेंसियाँ और केन्द्रीय अर्ध सैनिक बलों के प्रमुख केन्द्रीय अधिकारियों और गृह मंत्रालय के साथ चौबीसों घण्टे संपर्क में रहे। 4 अगस्त की महत्वपूर्ण रात को मुख्य सचिव ने पुलिस महानिदेशक (जम्मू कश्मीर) दिलबाग सिंह को कई निवारक कदम उठाने के निर्देश दिये, जिनमें कई प्रमुख नेताओं की नज़रबंदी, हिरासत में लेने और गिरफ्तारी करने के साथ-साथ राज्य में मोबाइल और लैंडलाइन सेवाएँ बंद करने तथा संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लागू करने और घाटी में कर्फ्यू के दौरान सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ाना शामिल था।

अमित शाह और एनएसए अजित डोभाल ने की सुरक्षा-समीक्षा

दूसरी तरफ पीएम मोदी की सलाह पर गृह मंत्री अमित शाह ने एनएसए अजीत डोभाल के साथ कई बार बैठकें करके सुरक्षा मामलों की समीक्षा की। इसके बाद शाह ने खुद कश्मीर का दौरा करके वहाँ की स्थिति का जायजा लिया और एनएसए अजीत डोभाल को घाटी में सुरक्षा व्यवस्था की कमान सँभालने की जिम्मेदारी सौंपी। एनएसए डोभाल ने भी जम्मू कश्मीर का दौरा किया और वहाँ तीन दिन रुके। एनएसए के दिल्ली लौटने के बाद 26 जुलाई को ही अमरनाथ यात्रा को रोककर यात्रियों को जम्मू कश्मीर से सुरक्षित निकालने का फैसला किया गया। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर में जितने भी देशी-विदेशी पर्यटक घूमने-फिरने के लिहाज से गये हुए थे, उन्हें भी निकालने की डोभाल की सलाह पर काम हुआ। इसी के साथ वहाँ केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों की 100 अतिरिक्त कंपनियों की भी तैनाती की गई। इस तरह मिशन कश्मीर की पूरी ब्लूप्रिंट तैयार हुई थी, जिसमें आईएएस बीवीआर सुब्रमण्यम की भी अहम भूमिका रही है।

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