VOTE के बदले ऐसा RETURN GIFT मिलेगा पूर्वोत्तर को, जो खुश कर देगा इन 8 राज्यों को !

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अहमदाबाद, 19 जून 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। पूर्वोत्तर के मतदाताओं ने 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की वोटों से झोली भर दी तो अब मोदी सरकार-2 भी पूर्वोत्तर के लोगों पर खूब मेहरबान हो रही है। अब असम की राजधानी गुवाहाटी और मणिपुर की राजधानी इंफाल के बाद अब त्रिपुरा की राजधानी अगरतला को भी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे की भेंट मिलने जा रही है।

2019 के अंत तक बन जाएगा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा

अगरतला हवाई अड्डा इस साल के अंत तक अथवा 2020 के प्रारंभ में उत्तर पूर्वी क्षेत्र का तीसरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बन जाएगा। त्रिपुरा के परिवहन और पर्यटन मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय के अनुसार भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण (AAI) ने राज्य सरकार को सूचित किया है कि अगरतला के महाराजा बीर बिक्रम (MBB) हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का हवाई अड्डा बनाने का काम तेजी से चल रहा है। यह काम इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा, परंतु यदि मॉनसून का मौसम या अन्य कोई कारक इस काम में बाधक बना तो भी 2020 के प्रारंभ में इसके अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में घोषणा कर दी जाएगी।

सिंघा रॉय के अनुसार एएआई ने अगरतला हवाई अड्डे पर विश्वस्तरीय सुविधाएँ उपलब्ध करवाकर उसे अंतर्राष्ट्रीय मानकों में अपग्रेड करने के लिये 438 करोड़ रुपये खर्च किये हैं। इस बजटीय खर्च में बढ़ोतरी की उम्मीद है। हालाँकि, त्रिपुरा सरकार एएआई से लगातार कहती आ रही है कि वह इस काम को जल्द से जल्द पूरा करे और निर्धारित मानकों को भी बनाए रखे। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने हाल ही में नई दिल्ली जाकर केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु से मुलाकात की है और उनके साथ अगरतला हवाई अड्डे के उन्नयन के बारे में विस्तार से चर्चा की है।

त्रिपुरा के राजा बीर बिक्रम ने बनवाया था एयरपोर्ट

उल्लेखनीय है कि अगरतला हवाई अड्डे को 1942 में तत्कालीन राजा महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर ने बनवाया था। भारत में विलय से पहले महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर 1923 से 1947 तक त्रिपुरा के राजा रहे। वह बहुत ही बुद्धिमान और उदार शासक थे। उन्हें त्रिपुरा में आधुनिक वास्तुकला का जनक माना जाता है। क्योंकि वर्तमान त्रिपुरा शासन की पूरी योजना उनके शासन के दौरान शुरू की गई थी। उन्होंने एक दूरदर्शी शासक के रूप में दुनिया के अधिकांश देशों की यात्रा की थी और त्रिपुरा के विकास के लिये कई महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। उन्हें भूमि सुधारक अग्रदूतों में से भी एक माना जाता है। उन्होंने 1939 में त्रिपुरा की स्थानीय जन-जातियों के लिये भूमि आरक्षित की, जिसने बाद में त्रिपुरा ऑटोनोमस जिला परिषद के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अगरतला हवाई अड्डे का निर्माण महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर की ओऱ से दान की गई भूमि पर 1942 में हुआ था। उनके प्रयासों से ही अगरतला में एक एयरोड्रॉम का निर्माण किया गया था। जो पूर्वोत्तर क्षेत्र में दूसरे सबसे व्यस्त हवाई अड्डे के रूप में विकसित हुआ है और जो त्रिपुरा को महत्वपूर्ण हवाई कनेक्टिविटी प्रदान करता है। इसलिये महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर को श्रद्धांजलि देने के रूप में अगरतला हवाई अड्डे का नाम बदलने की लंबे समय से माँग की जा रही थी, जिसे 2018 में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने स्वीकार किया अगरतला हवाई अड्डे का नाम बदलकर महाराजा बीर बिक्रम हवाई अड्डा रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस प्रकार अगरतला हवाई अड्डे का नया नामकरण हुआ।

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