उमर ने दिखाई ‘होशियारी’, लोगों ने कर दिया होशियार : ‘मोटा भाई से दूर ही रहना, रहम नहीं करेंगे, हमेशा चार्ज रहते हैं…’

अहमदाबाद, 2 जून-2019 (युवाप्रेस.कॉम)। नई मोदी सरकार-2 के दूसरे नंबर के दिग्गज नेता अमित शाह ने देश की घरेलू सुरक्षा की कमान सँभाल ली है। उनके कमान सँभालते ही सबसे ज्यादा खलबली जम्मू-काश्मीर में देखी जा रही है। जम्मू-काश्मीर में युवाओं तथा अलगाववादी मानसिकता वाले लोगों को बरगलाकर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने वाले राजनेताओं को अब मोदी सरकार की वापसी से अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। क्योंकि इससे पहले प्रथम कार्यकाल में मोदी सरकार इस राज्य के कई अलगाववादी नेताओं पर नकेल कस चुकी है। अब मोदी के साथ अमित शाह भी सरकार में जुड़ गये हैं, जिनकी छवि मास्टर माइंड की है, इसलिये विशेषकर जम्मू-काश्मीर के नेताओं को उनके गृहमंत्री बनने से सविशेष चिंता हो रही है।

जम्मू-काश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने TWEETER पर ‘SMARTNESS’ दिखाने की कोशिश की, परंतु इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी ही क्लास लगा दी और उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई।देश के नये गृहमंत्री बने अमित शाह ने शनिवार को अपने मंत्रालय का कार्यभार सँभाला तो उन्हें बधाई देने वालों का ताँता लग गया। जम्मू-काश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक भी दिल्ली में उनसे मिलने आये। 15 मिनट चली दोनों की बैठक में सत्यपाल मलिक ने शाह को नया पद सँभालने की बधाई देने के साथ ही उन्हें जम्मू-काश्मीर के वर्तमान सुरक्षा हालात की जानकारी भी दी। इतना ही नहीं, 1 जुलाई से शुरू होने वाली और डेढ़ महीने चलने वाली अमरनाथ यात्रा को लेकर भी दोनों के बीच महत्वपूर्ण चर्चा हुई। इसके अलावा जम्मू-काश्मीर में इसी साल के अंत तक विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं, हालाँकि इसको लेकर दोनों के बीच कोई चर्चा नहीं हुई, परंतु बैठक के बाद सत्यपाल मलिक ने मीडिया से बात की और बताया कि उन्होंने नये गृहमंत्री को जम्मू-काश्मीर के सुरक्षा मामलों की जानकारी दी है।

इसके बाद जम्मू-काश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी ट्वीटर पर नये अंदाज में शाह को मुबारकबाद देने की होशियारी दिखाई, मगर इस स्मार्टनेस को लेकर वह खुद ही सोशल मीडिया यूजर्स से ट्रोल होने लगे। यूजर्स ने उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई। उमर ने सभी मंत्रियों को अब अपने ट्वीटर पर अपना बायोडाटा अपडेट करने की सलाह दी थी।

उनका यह मशविरा ट्वीटर यूजर्स को पसंद नहीं आया और यूजर्स ने उनकी क्लास लगाकर उन्हें खूब लताड़ा। एक यूजर्स ने ट्वीट करके लिखा कि ‘370 पर काश्मीर में अशांति को लेकर जो लोग देश की सरकार को सलाह दे रहे थे, उनके लिये जल्दी ही बायो भूगोल बदल दिया जाएगा।’ एक ट्वीटर यूजर्स ने लिखा कि ‘मोटा भाई से दूर ही रहना, यह कोई रहम नहीं करेंगे। गन्ने की तरह पीस दिये जाओगे।’ एक ट्वीटर यूजर्स ने लिखा कि मोटा भाई हमेशा चार्ज रहते हैं।

एक यूज़र्स ने उमर को जवाब देते हुए लिखा, ‘आपके (उमर अब्दुल्ला के) कुछ मित्रों (जिहादियों और शहरी नक्सलियों के लिए ये (अमित शाह) काफी हैं।’

उल्लेखनीय है कि चुनाव प्रचार के दौरान तथा भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में पार्टी ने जम्मू-काश्मीर को लेकर देश की जनता से कई महत्वपूर्ण वादे किये हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उमर अब्दुल्ला ने भी भड़काऊ बयानबाजी की थी और जम्मू-काश्मीर में पुराना समय वापस लाने तथा जम्मू-काश्मीर में अलग प्रधानमंत्री का पद फिर से शुरू करने की बात कही थी। जबकि भाजपा ने जवाब में कहा था कि वह जम्मू-काश्मीर से धारा 370 और अनुच्छेद 35ए हटाकर जम्मू-काश्मीर को देश के अन्य राज्यों की तरह विकास की मुख्य धारा में लाएगी। अब जब भाजपा पुनः सत्ता में लौट आई है, तब से ही जम्मू-काश्मीर के नेताओं की नींद उड़ी हुई है। इसमें भी गुजरात के गृहमंत्री रहते हुए अमित शाह ने राज्य में जिस तरह की कार्य शैली से काम किया, उसे लेकर भी इन नेताओं में खलबली मची हुई है। अमित शाह की छवि मास्टर-माइंड की रही है। इसलिये जम्मू-काश्मीर में युवाओं तथा अलगाववादी मानसिकता वाले लोगों को बरगलाकर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने वाले राजनेताओं को अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है।

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